यूपी की राजनीति में पुरानी है सेक्स मर्डर और धोखे की कहानी

यूपी की राजनीति में पुरानी है सेक्स मर्डर और धोखे की कहानीगाँव कनेक्शन।

ऋषि मिश्र

लखनऊ। यूपी की राजनीति में सेक्स धोखा और मर्डर का इतिहास पुराना है। यहाँ पहली बार अमरमणि और मधुमिता से शुरुआत हुई थी। इसके बाद बांदा का शीलू रेपकांड। फिर गायत्री प्रजापति कांड सुल्तानपुर का यौनशोषण और फैज़ाबाद का रेपकांड। अब अय्यूब खान का प्रकरण। यूपी की सियासत में ऐसे भूचाल आते रहे हैं। जिनसे कई बार सत्ताओं तक डिगने की नौबत आ चुकी है।

मधुमिता कांड के जरिये सबसे पहले 2003 में इस तरह के राजनीति में अपराधीकरण का आगाज हुआ था। तब पेपर मिल कॉलोनी स्थित कवियत्री मधुमिता शुक्ला के आवास उनकी हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद जब जांच हुई तो इस मामले में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मंत्री अमरमणि त्रिपाठी का नाम सामने आया था। मधुमिता की हत्या के पीछे वजह उसके पेट में पल रहा मंत्री अमरमणि का बच्चा था। जिसका मधुमिता ने गर्भपात कराने से इन्कार कर दिया था। इस वजह से उसकी हत्या हुई। बाद में इस मामले की सीबीआई जांच की गई। जिसके बाद में अमरमणि और उनकी पत्नी मधुमणि को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अब पत्नी की हत्या के आरोप में अमरमणि का बेटा अमनमणि भी जेल में है।

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शीलू निषाद रेपकांड में भी हुई बसपा विधायक को सजा

बसपा में रहे प्रदेश के पूर्व विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी समेत तीन लोगों को बांदा के शीलू निषाद दुष्कर्म मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी करार दिया था। अदालत ने पूर्व विधायक को 10 साल की सजा व एक लाख रुपए जुमार्ना लगाया था। दो अन्य आरोपी राम नरेश द्विवेदी और वीरेंद्र कुमार शुक्ला को दो साल की सजा एवं दो हजार रुपए का जुमार्ना लगाया। दिसंबर 2010 में बसपा के ही पूर्व विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी और उनके करीबी राम नरेश द्विवेदी उर्फ रावण, वीरेन्द्र कुमार शुक्ला, रघुवंश मणि द्विवेदी उर्फ सुरेश नेता और राजेन्द्र शुक्ला पर बांदा के नरैनी की नाबालिग लड़की शीलू ने रेप, छेड़खानी और मारपीट का आरोप लगाया था, हालांकि उस समय लड़की को चोरी के आरोप में जेल भेज दिया गया था। लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के हस्तक्षेप पर पुलिस ने पूर्व विधायक समेत सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया था।

बाद में मामले की जांच सीबी सीआईडी को सौंप दी गई थी। इस बीच मामला उच्चतम न्यायालय पहुच गया और उच्चतम न्यायालय ने मामले की जांच सीबीआई को सौपने के आदेश दे दिए थे। सीबीआई ने 2012 में चार्जशीट दाखिल की। 25 मई को मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने आज इस मामले में फैसला सुनाया था। गायत्री प्रजापति जो कि वर्तमान सरकार में पहले खनन और बाद में परिवहन मंत्री रहे उनका भी कुछ इसी तरह का मामला है।

सुप्रीम कोर्ट के आगे टूटा गायत्री का गुरुर, मगर गिरफ्तार अब भी नहीं

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजधानी के गौतमपल्ली थाने में गायत्री के खिलाफ केस लिखा गया। मगर अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई। उन पर आरोप है कि इस महिला का तीन साल तक यौन शोषण किया। आखिरकार महिला की 14 साल की नाबालिग बेटी के साथ भी इसी तरह का व्यवहार करने का प्रयास किया गया। जिसके बाद में महिला पुलिस की शरण में गई। जहां उसका केस नहीं लिखा गया। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद मुकदमा दर्ज किया गया।

अब फंसे डॉ अय्यूब

मड़ियांव कोतवाली में शनिवार की दोपहर पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मोहम्मद अय्यूब पर मुकदमा मुकदमा पंजीकृत किया गया । इस मामले में पीड़िता के भाई संतोष कुमार गौड़ ने आरोप लगाया कि "पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मो अय्यूब ने 2012 के विधान सभा चुनाव के दौरान विधान सभा मेहदावल से विधायक प्रत्याशी थे। डॉ अय्यूब प्रचार के दौरान ग्राम कौड़िया थाना बखिरा जनपद अबेडकर नगर आये। मेरी बहन अंजली 22 वर्ष से कहा कि मेरे लिए प्रचार करो हम जीत गए तो आपको पढ़ने के लिए लखनऊ भेज देंगे। बाद में आपकी सर्विस भी लगवा देंगे।

जीतने के बाद डॉ अय्यूब ने मेरी बहन अंजलि का दाखिला सेवा अस्पताल सीतापुर रोड लखनऊ में करवा दिया। मेरे माता पिता से कहा कि अब अंजलि का भविष्य अच्छा होगा। डॉ अय्यूब जब भी लखनऊ जाते तब वह अंजलि के पास जाते और वहां उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक सम्बन्ध बनाते थे। धमकी देते की अगर घर में किसी से कहा तो तुम्हारे लिए सही नही होगा। कुछ समय बाद जब मेरी बहन ने पेट में दर्द होने की बात डॉ अय्यूब से कही तो अय्यूब ने मेरी बहन को दवा लाकर दी। कहा कि इसे खाओ सब सही हो जायेगा। उस दवा को खाने से धीरे-धीरे मेरी बहन की तबियत और खराब होती गई तब मेरी बहन ने सारी बात हम लोगो को बतायी। हमने बहन को लखनऊ के कई अस्पतालों में दिखाया। सब जगह से जवाब होने पर 23 फरवरी की रात मेडिकल यूनिवर्सिटी लेकर गए। जहां 24 फरवरी की रात 10 बजे उसकी मौत हो गयी।

मगर जब फंसे तो कहा कि राजनैतिक साजिश

अमरमणि से लेकर डॉ अय्यूब तक ऐसे मामलों में फंसने वाले हमेशा ये कहते रहे कि उनको राजनैतिक मामलों में फंसाया जाता रहा। मगर बाद में सीबीआई जांच और अदालत के फेर में फंस कर ये मामले परवान चढ़ते रहे और आखिरकार सजा भी हुई। मगर सभी ऐसे मामलों में खुद को पाक साफ बताते रहे।

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