शिवपाल के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले उदयवीर सिंह सपा से छह साल के लिए निकाले गए

शिवपाल के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले उदयवीर सिंह सपा से छह साल के लिए निकाले गएप्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले विधान परिषद सदस्य उदयवीर सिंह को सपा से निकाल दिया गया।

लखनऊ (भाषा)। उत्तर प्रदेश में सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को चिट्ठी लिखकर पार्टी प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले विधान परिषद सदस्य उदयवीर सिंह को आज सपा से निकाल दिया गया।

सपा प्रवक्ता अम्बिका चौधरी ने यहां संवाददाताओं को बताया कि विधान परिषद सदस्य उदयवीर सिंह को अनुशासनहीनता के आरोप में छह साल के लिए सपा से निष्कासित कर दिया गया है।

मालूम हो कि सिंह को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है।

अमर्यादित तरीके से अनुशासनहीन आचरण करने वालों को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी पिछले 25 वर्षों में अनुशासन और संकल्प के बलबूते ही यहां पहुंची है। उदयवीर ने जो अमर्यादित, अशोभनीय और अनुशासनहीन आचरण किया है, उसके लिए उन्हें पार्टी से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया गया है।
अम्बिका चौधरी समाजवादी पार्टी

इस बीच, उदयवीर सिंह ने अपने निष्कासन के बारे में कहा ‘‘मुझे कोई अफसोस नहीं है, मैंने जो भी राजनीतिक मुद्दे उठाये, वे लोकतांत्रिक अधिकार के तहत उठाये थे। नेताजी (मुलायम) पार्टी के संरक्षक है] मुझे पूरा भरोसा है कि वह सबके साथ न्याय करेंगे, मुख्यमंत्री (अखिलेश यादव) जी के साथ भी न्याय करेंगे।''

उन्होंने कहा कि अफसोस इस बात का है कि नेताजी को मंचों से गाली देने वाले लोग इस वक्त पार्टी में मौजूद हैं और पत्र लिखने वाले शुभचिंतकों को पार्टी से निकाला जा रहा है. नेताजी जब भी कभी गम्भीरता से विचार करेंगे तो जरुर सोचेंगे।

मालूम हो कि प्रदेश के ‘समाजवादी परिवार' में रार बढ़ने के बीच पार्टी के विधान परिषद सदस्य उदयवीर सिंह ने गत 19 अक्तूबर को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को पत्र लिखकर सनसनी फैला दी थी। उन्होंने पत्र में पार्टी के प्रान्तीय अध्यक्ष शिवपाल यादव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया था कि शिवपाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जलन रखते हैं।

अपने चार पन्ने के पत्र में उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर यहां तक कह दिया था कि अखिलेश के खिलाफ साजिश में मुलायम की पत्नी, बेटा और बहू भी शामिल है और शिवपाल सपा मुखिया की पत्नी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का चेहरा हैं।


सिंह ने पत्र में आरोप लगाया था कि अखिलेश के खिलाफ षड्यंत्र वर्ष 2012 में उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के फैसले के बाद से ही शुरू हो गया था। उस वक्त शिवपाल ने इस निर्णय को रकवाने की भरसक कोशिश की थी। उसके बाद से ही शिवपाल की निजी महत्वाकांक्षा अखिलेश के पीछे पड़ी है। उन्होंने सपा मुखिया पर एकतरफा बातें सुनकर कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए अनुरोध किया था कि वह सपा के संरक्षक बन जाएं और अखिलेश को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दें।









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