उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अल्पसंख्यक बहुल सीटों में छिपी सत्ता की चाबी  

Sanjay SrivastavaSanjay Srivastava   19 Jan 2017 12:39 PM GMT

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अल्पसंख्यक बहुल सीटों में छिपी सत्ता की चाबी  उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2017 में मुस्लिम मतदाताओं को अपनी पार्टी के तरफ खींचने की कोशिश कर रहे हैं सभी दल।

लखनऊ (आईएएनएस)| उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2017 का बिगुल बज चुका है। सभी राजनीतिक दल धर्म और जाति के नाम पर अपनी बिसात बिछाने में जुटे हुए हैं। इन सबके बीच रोचक तथ्य यह है कि उत्तर प्रदेश में पिछले पांच विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार उसी की बनी, जिसने अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर अपनी पकड़ बनाई। इस बार भी सत्ता की चाबी इन्हीं सीटों में छिपी हुई है।

उत्तर प्रदेश में पिछले कई चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह बात सही साबित होती है। वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर विपक्षियों को मात दी थी, लिहाजा उसकी सरकार बनी थी। बाद में मंदिर आंदोलन की वजह से परिस्थतियां बदलती गईं और अल्पसंख्यक बहुल सीटों से भाजपा की पकड़ ढीली होती गई।

विधानसभा चुनाव 1991 में भाजपा ने 76 अल्पसंख्यक सीट जीती

वर्ष 1991 के विधानसभा में भाजपा को 122 अल्पसंख्यक बहुल सीटों में से 76 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। कांग्रेस सात सीटें जीती, जबकि सपा केवल एक सीट ही जीत पाई थी। 38 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी।

विधानसभा चुनाव 1993 में 69 अल्पसंख्यक सीटों पर खिला कमल

1993 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने इन सीटों पर अपना एकाधिकार बनाए रखा था। इस बार भाजपा को 69 सीटें मिलीं, जबकि सपा को 31 सीटें मिली थीं। बसपा ने पांच सीटों पर जीत दर्ज कराई थी। कांग्रेस को छह सीटों पर विजय मिली थी। अन्य के खाते में 16 सीटें गई थीं।

विधानसभा चुनाव 1996 में भाजपा सिर्फ 59 अल्पसंख्यक सीट ही जीत पाई

1996 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर जीत हासिल की। जीत का आंकड़ा हालांकि इस घट गया। कुल 128 अल्पसंख्यक बहुल सीटों में से भाजपा को 59 सीटें, समाजवादी पार्टी को 43 सीटें, और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को 13 सीटें मिली थीं। सात सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीते थे।

विधानसभा चुनाव 2002 में सपा ने 43 अल्पसंख्यक सीट जीत कर बनाई सरकार

वर्ष 2002 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर पिछले चुनावों की अपेक्षा बेहतर प्रदर्शन किया, लिहाजा सपा की सरकार बनी। सूबे की 129 अल्पसंख्यक बहुल सीटों में से सपा को 43 सीटें मिलीं और उसने मुलायम सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाई। इस चुनाव में बसपा को 24 सीटें और भाजपा को 32 सीटें मिली थीं।

विधानसभा चुनाव 2007 में बसपा ने 59 अल्पसंख्यक सीटों पर परचम लहराया

वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने अल्पसंख्यक बहुल 59 सीटों पर जीत हासिल की और मायावती की सरकार बनी। दूसरे नंबर पर सपा रही, जिसने 26 सीटों पर कब्जा जमाया। इस चुनाव में भाजपा अपना पिछला प्रदर्शन भी नहीं दोहरा पाई और उसे केवल 25 सीटों पर जीत हासिल हुई। कांग्रेस को सात और रालोद को छह सीटें मिलीं।

विधानसभा चुनाव 2012 में सपा ने 78 अल्पसंख्यक सीटों पर हासिल की कामयाबी

2012 के विधानसभा चुनाव बाद जब समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, तब उत्तर प्रदेश ने अल्पसंख्यक बहुल 130 सीटों में से 78 सीटों पर कामयाबी हासिल की थी। सपा के बाद बसपा ने 22 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा को 20 सीटें मिली थीं। चार सीटें कांग्रेस व दो सीटें अन्य के खाते में गई थीं।

इन चुनावों में एक बात स्पष्टतौर पर नजर आई कि समय बीतने के साथ भाजपा की पकड़ अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर ढीली पड़ती गई और वह सत्ता से दूर होती चली गई। सपा और बसपा ने जब-जब अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर बेहतर प्रदर्शन किया, तब तब उप्र में इन दलों की सरकार बनी।

पार्टी ने अल्पसंख्यक बहुल सीटों के लिए कोई अलग से तैयारी नहीं की है। भाजपा का हमेशा से ही नारा रहा है, सबका साथ, सबका विकास। पार्टी को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों को देखते हुए जनता इस बार चुनाव में जाति और धर्म से ऊपर उठकर मतदान करेगी।”
मनीष शुक्ला प्रदेश प्रवक्ता भारतीय जनता पार्टी

पार्टी हर सीट को ध्यान में रखकर तैयारी कर रही है। जहां तक बात अल्पसंख्यक बहुल सीटों की है तो पिछले पांच चुनावों की अपेक्षा इन सीटों पर पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी।”
रशीद मसूद प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय लोकदल

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