अतीत के पन्नों में न खो जाए दशहरी आम, कभी नहीं बनता चुनावी मुद्दा 

अतीत के पन्नों में न खो जाए दशहरी आम, कभी नहीं बनता चुनावी मुद्दा आम के फल की पैकिंग करते किसान।

ऋषि मिश्र

मलिहाबाद (लखनऊ)। राजधानी लखनऊ से काकोरी पहुंचते ही हरदोई रोड के बाएं हाथ पर एक सड़क गाँव दशहरी की ओर गई है। लगभग डेढ़ किलोमीटर सड़क पर चलने के बाद हम दशहरी गाँव पहुंचे, जहां गाँव के आखिर में सड़क पर बरगदनुमा एक आम का पेड़ है। इस आम के पेड़ को चारों ओर से रस्सियों से घेर कर संरक्षित करने की कोशिश की गई है। दुनियाभर में अपने स्वाद और खुशबू का डंका पीटने वाले दशहरी आम का ये पहला पेड़ है। दशहरी गाँव के नाम से ही आम की इस प्रजाति का नाम दशहरी पड़ गया।

आम का पेड़।

चुनावी माहौल में राजधानी की “मैंगो बेल्ट” में भी सरगर्मियां तेज हैं। मगर यहां का जो बड़ा सवाल वह चुनाव में नहीं उठता है। दशहरी पेड़ों की अवैध कटान और बागों में प्लाटिंग का खेल भविष्य में दशहरी को अतीत की एक कहानी में तब्दील कर सकता है। यहां बागबान से लेकर आम लोग इस कटाई को लेकर परेशान हैं। जिसमें पुलिस व भूमाफिया मिलीभगत को रोक पाना संभव नहीं हो रहा है। बागबानों का कहना है कि कुछ लोग इस तरह से बागों को खत्म कर रहे हैं और लग रहा है कि आने वाले 10 साल में कहीं दशहरी की ये प्रजाति विलुप्त ही न हो जाए।

दशहरी गाँव में आम के सबसे पहले पेड़ के सामने जब हम पहुंचे तब हमारी मुलाकात स्कूल प्रबंधक सुशील कुमार सिंह लोध से हुई। दशहरी पेड़ों की कटान को लेकर सुशील व्यथित हैं।

बहुत मुश्किल से इस सबसे पहले पेड़ को बचा पाए हैं। यहां नगर निगम कूड़ा निस्तारण संयंत्र स्थापित करने जा रहा था। मगर लंबी लड़ाई के बाद उसको रोक पाए वरना ये ऐतिहासिक पेड़ काट दिया जाता है। इस पेड़ को तो बचा लिया है मगर बाग के बाग पूरी रात में काट दिए जाते हैं। भूमाफिया और पुलिस की मिलीभगत से ये हो रहा है।
सुशील कुमार सिंह लोध, स्कूल प्रबंधक

वो आगे कहते हैं, “पिछले करीब पांच साल में लगभग 20 फीसदी आम के पेड़ कम हो गए हैं। जगह जगह मैंगो बेल्ट में प्लाटिंग की जा रही है। मगर नेता जब वोट मांगने आते हैं तब अपनी धरोहर को बचाने की बात कभी नहीं करते हैं। विकास अपनी जगह मगर हमारी पहचान तो आम है।”

मलिहाबाद की दुनियाभर में मशहूर “दशहरी” प्रजाति अवैध कटान से हो सकती है खत्म काकोरी के दशहरी गाँव में है इस प्रजाति का पहला पेड़, ग्रामीण बचाने को कर रहे हैं हर जतन पिछले पांच साल में 10 से 15 फीसदी दशहरी आम के पेड़ों का हुआ कटान की गई प्लाटिंग

उनके साथ ही हाल ही में कामर्स से स्नातक कर चुके जियाउल खड़े थे। जियाउल सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय हैं। मगर अपना बचपन में बागों में खेलना बहुत याद आता है। बताते हैं कि दशहरी गाँव के ही हैं। कहते हैं कि “जब छोटे थे तब इस सबसे पुराने पेड़ के पास खेला करते थे। इस पर चढ़ कर आम तोड़ते थे। कई बार पेड़ से गिरे भी हैं। मगर आज दुख इस बात का है कि दशहरी के पेड़ों पर खतरा है। जबकि जिस आम की वजह से पूरे देश में मलिहाबाद की पहचान है, उसका संरक्षण होना चाहिये। “मैंगो बेल्ट” को पर्यटन स्थल तरह विकसित करना चाहिए। ताकि दूरदराज से लोग यहां आएं। इस चुनाव में कम से कम उम्मीद करेंगे कि यहां से जीतने वाले उम्मीदवार इस मुद्दे पर भी ध्यान देंगे।”

पास के ही एक अन्य गाँव के रहने वाले करीब रमेश नाई (60 वर्ष ) का काम करते थे। मगर डेढ़ साल पहले उनके दाहिने हाथ का अंगूठा कट गया। अब उनके बेटे कमाते हैं और वे घरेलू काम में मदद करते हैं। कहते हैं कि “ये पेड़ कितना पुराना है, मैं नहीं बता सकता हूं। मेरे बचपन से मैं ऐसा ही देख रहा हूं। मगर आम के पेड़ों की कटाई ऐसे न जाने कितने ही पेड़ों को लील चुकी है। बाग के बाग साफ हो जाते हैं। नेताओं के लिए अब दश्हरी को बचाने के लिए जुटना बहुत जरूरी है। ”

विधानसभा क्षेत्र एक नजर में

  1. माल, काकोरी और मलिहाबाद मिलाकर बनी मलिहाबाद सुरक्षित विधानसभा सीट।
  2. सपा के इंदल रावत हैं वर्तमान विधायक, मगर इस बार नहीं मिला सपा से टिकट।
  3. भाजपा से सांसद कौशल किशोर की पत्नी को मिला इस बार टिकट, बीजेपी अाज तक नही जीती।
  4. पिछली बार सपा के इंदल रावत से कौशल किशोर नजदीकी अंतर से हारे थे। कौशल तब थे निर्दल।

आम की पैदावर एक नजर में

  1. राजधानी की दो विधानसभा सीटों मलिहाबाद और बख्शी का तालाब में मैंगो बेल्ट है।
  2. जिसका दायरा दुबग्गा, काकोरी, मलिहाबाद, माल, इटौंजा तक है।
  3. राजधानी में करीब 26320 हेक्टेयर मैंगो बेल्ट है।
  4. लगभग 5127 मीट्रिक टन आम की पैदावर पिछले साल यहां हुई थी।

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