कन्नौज से पहली बार बनीं महिला राज्यमंत्री, अर्चना पांडेय को मिली लालबत्ती 

कन्नौज से पहली बार बनीं महिला राज्यमंत्री, अर्चना पांडेय को मिली लालबत्ती शपथ लेंती कन्नौज की अर्चना पांडेय। फोटो- विनय गुप्ता

कन्नौज। जिले की सबसे बड़ी राजनीति का केंद्र बिंदु छिबरामऊ विधानसभा से एमएलए बनीं अर्चना पांडेय के साथ कई संयोग जुड़े हैं। वह पहली बार चुनाव जीतीं और राज्यमंत्री बन गईं। अब तक जिले से दो महिला विधायक चुनी गईं, लेकिन सरकार में लालबत्ती लाने में भी महिला के रूप में उनका नाम पहली बार ही शामिल हुआ है।

पूर्व सहकारिता मंत्री रामप्रकाश त्रिपाठी वर्ष 1993 और 2002 में छिबरामऊ से विधायक बने। भाजपा-बसपा गठबंधन की सरकार में उनको कैबिनेट मंत्री पद मिला था। वर्श 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनका निधन हो गया। बाद में यहां पर भाजपा की राजनीति में उनकी पुत्री अर्चना पांडेय सक्रिय हो गईं। पार्टी ने उनको वर्ष 2012 में भाजपा प्रत्याशी बनाया, लेकिन वह सपा के अरविंद यादव से चुनाव हार गई थीं। इस विधानसभा चुनाव ने उन पर भरोसा जताया और टिकट दिया। वह चुनाव जीतीं। उन्होंने बसपा प्रत्याषी ताहिर हुसैन सिद्दीकी को परास्त किया। तीसरे नंबर पर सपा प्रत्याषी अरविंद यादव रहे।

शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन करतीं अर्चना पांडेय।

इससे पहले तिर्वा विधानसभा क्षेत्र (पहले उमर्दा) से पूर्व सांसद रामबख्श सिंह वर्मा की पत्नी रामनंदनी वर्मा दलित मजदूर किसान पार्टी से वर्श 1985 में विधायक बनीं थीं। कन्नौज में सदर सुरक्षित, तिर्वा और छिबरामऊ तीन विधानसभा सीट हैं। इसमें महिला विधायक होने वाली अर्चना पांडेय दूसरी एमएलए हैं। मंत्री बनने वाली वह पहली महिला विधायक की सूची में शामिल हो गई हैं। कहा जा रहा है कि उनके पिता भाजपा के कद्दावर नेता रहे। उन्होंने कभी पार्टी नहीं छोड़ी। इसी का फायदा अर्चना पांडेय को भाजपा ने दिया है।

अब तक इनको मिली लालबत्ती, तीनों विस से प्रतिनिधित्व

इस नई भाजपा सरकार में भी कन्नौज ने राज्यमंत्री दिया है। इससे पहले सदर कन्नौज विधानसभा क्षेत्र से वर्श 1980 और 1985 में कांग्रेस से चुनाव जीतने वाले बिहारीलाल दोहरे स्वास्थ्य राज्यमंत्री रह चुके हैं। बाद में सदर सीट से कोई भी विधायक मंत्री नहीं बन सका। तिर्वा विधानसभा क्षेत्र से सपा सरकार में विधायक विजय बहादुर पाल को वर्श 2012 में माध्यमिक षिक्षा राज्यमंत्री का दर्जा मिला। वह पूरे पांच साल तक मंत्री रहे। पूर्व में तीसरी महत्वपूर्ण विधानसभा सीट छिबरामऊ से जीते रामप्रकाष त्रिपाठी भी सहकारिता मंत्री बने। अब इसी विधानसभा से जीतीं उनकी पुत्री अर्चना को भी मंत्री बनाया गया। इस विधानसभा क्षेत्र से वह दूसरी मंत्री बनी हैं।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और राज्यपाल राम नाईक के साथ।

छिबरामऊ से हैं विधायक, है मायका

खास बात यह है कि 196 छिबरामऊ विधानसभा क्षेत्र से अर्चना पांडेय विधायक हैं। यह उनका मायका है। वर्ष 2008 में उनके पिता रामप्रकाश त्रिपाठी का निधन हो गया। लेकिन गैर जिले में शादी होने के बाद भी उन्होंने पिता की कर्मभूमि (मायके) में राजनीति जारी रखी।

बिना विधायक के भी लालबत्ती

वर्श 2007 में उमर्दा से विधायकी जीते कैलाश राजपूत को तो बसपा सरकार में लालबत्ती नहीं मिल पाई थी, लेकिन बसपा जिलाध्यक्ष अजय भारती को नागरिक सुरक्षा परिशद का उपाध्यक्ष यानि दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री पद से नवाजा गया। वर्तमान में कैलाश भाजपा से तिर्वा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।

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