“अपने भाई” और सपाई की दुविधा में रहे पुराने लखनऊ के मुसलमान 

“अपने भाई” और सपाई की दुविधा में रहे पुराने लखनऊ के मुसलमान लखनऊ में मुसलमान वोटर इस बार बंटता हुआ नजर आ रहा है।

लखनऊ। मुसलमानों के लिए लखनऊ में ये दुविधा भरा चुनाव रहा। कई सीटों पर उनके सामने दो विकल्प थे, जिनमें से एक को चुनना बड़ी चुनौती बन गया। खासतौर पर लखनऊ मध्य, पश्चिम, बख्शी का तालाब, मोहनलालगंज, और सरोजनी नगर क्षेत्र में भाजपा के खिलाफ दो दो मजबूत उम्मीदवार होने से मुस्लिम बंटे हुए नजर आ रहे थे। सबसे अधिक दुविधा की स्थिति मुसलमानों के सामने मध्य और पश्चिम सीट पर रही। मुस्लिमों के लिए ऐसा उम्मीदवार चुनने की चुनौती सामने रही जो भाजपा को हरा रहा हो। मगर पुराने शहर की इन दो सीटों पर “अपने भाई” (मुसलमान उम्मीदवार) के लड़ने से वोटों का विभाजन होता स्पष्ट नजर आ रहा था।

लखनऊ पश्चिम के कालीचरण इंटर कॉलेज मतदान केंद्र के बाहर माली खां सराय के रहने वाले मोहम्मद आजाद से साथ के ही एक व्यक्ति ने कान में पूछा “चचा किसको दिया”, मगर गोपनीयता की चिंता न करते हुए आजाद का जवाब था “हाथी” को। दरअसल इस सीट पर जहां सपा के मो रेहान नईम विधायक हैं, वहां से बसपा ने भी मुसलमान उम्मीदवार उतार दिया है। बसपा से मो अरमान चुनाव लड़ रहे हैं। अरमान इलाके में पिछले करीब दो साल सक्रिय हैं। ऐसे में इन दोनों मुस्लिम प्रत्याशियों के बीच मुसलमान पिसते हुए नजर आ रहे हैं। एक ओर अखिलेश यादव का चेहरा और रेहान हैं तो दूसरी ओर अरमान। इसी तरह से मध्य क्षेत्र का भी हाल है। यहां सपा से रविदास हैं। जो मुसलमानों की पहली पसंद बन जाते मगर सामने से कांग्रेस के मारूफ खड़े हो गए हैं। गठबंधन होने के बावजूद आमने सामने हैं। बड़ी संख्या में मध्य क्षेत्र में मुसलमान वोटर हैं। खुरद मारूफ खान कहते हैं कि मैं मुसलमानों का “अपना भाई”हूं। मेरे जीतने पर भी सीएम तो अखिलेश यादव को ही बनना है। इसलिए उनको ही मुस्लिम वोट दे रहे हैं। इसका असर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। मुस्लिम पार्षदों ने इस क्षेत्र से टिकट देने को लेकर पहले ही एक पत्र मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लिखा था। कुल 11 पार्षद इसमें शामिल थे। मगर टिकट रविदास को मिल गया था। अब डैमेज कंट्रोल के लिए सपा के पार्षद दल के नेता यावर हुसैन रेशू को जिम्मेदारी सौंपी गई। मगर फिर भी “अपने भाई” और सपाई के बीच मुस्लिम बंट गए।

इसी तरह से ग्रामीण इलाकों में बसपा के उम्मीदवार मजबूती से लड़ रहे हैं। इस वजह से भी मुसलमान बंट गए हैं। बख्शी का तालाब क्षेत्र के काकोरी में रहने वाले अनस खान कहते हैं कि गोमती यादव तो क्षेत्र में ही नहीं आए मगर अखिलेश यादव का चेहरा सामने आता है। फिर भी अनस मानते हैं कि मुसलमान इस बार बंट गया है। इसी तरह से सरोजनी नगर में सपा के अनुराग यादव के सामने बसपा के शंकरी सिंह, मलिहाबाद में सपा, बसपा और निर्दलीय इंदल रावत के बीच मुसलमान बंटते हुए नजर आ रहे हैं।

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