... तो पिता और भाई की राह पर रीता बहुगुणा जोशी

... तो पिता और भाई की राह पर रीता बहुगुणा जोशीरीता बहूगुणा जोशी फाइल फोटो

लखनऊ। यूपी में 27 साल बाद वापसी की राह देख रही कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है। राजधानी लखनऊ में कांग्रेस का चेहरा रही लखनऊ कैंट से कांग्रेस विधायक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम सकती हैं। रीता बहुगुणा बीजेपी में जाएंगी, इसकी अटकलें उस समय से ही लगनी शुरू हो गईं थी जब इसी साल उत्तराखंड में कांग्रेस से बगावत करके उनके भाई विजय बहुगुणा और भतीजे साकेत बहुगुणा बीजेपी में शामिल हो गए थे।

दरकिनार की गईं रीता बहुगुणा

विजय बहुगुणा उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री थे। साल 2012 में उत्तरखंड में आई त्रासदी के बाद उनके कामकाज पर सवाल उठा। जिसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने उनको मुख्यमंत्री के पद से हटाकर हरीश रावत को मुख्यमंत्री बना दिया था। उस समय भी रीता बहुगुणा जोशी ने कांग्रेस से अपनी नाराजगी जताई थी। माना जा रहा था कि वह भी बीजेपी में शामिल होंगी, लेकिन उन्होंने अपना फैसला बदल दिया था। लेकिन पिछले दिनों प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए राजबब्बर और मुख्यमंत्री की उम्मीदवार शाली दीक्षित को घोषित करने के बाद रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस में दरकिनार कर दी गईं।

बीजेपी में शामिल होने के कयासों को मिला बल

कांग्रेस कमेटी में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं मिलने के कारण रीता बहुगणा जोशी अपने को पार्टी के कार्यक्रमों से भी अलग-थलग कर लिया था। राहुल गांधी की खाट सभा और किसान यात्रा में भी उनकी भूमिका नहीं रही। ऐसे में माना जा रहा था कि वह बहुत दिनों से बीजेपी नेतृत्व के संपर्क में थी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से उनकी मुलाकात भी हुई थी। बीजेपी में उनको शामिल कराने को लेकर उनके भाई विजय बहुगुणा भी लगे हुए थे। रीता बहुगुणा जोशी से जब इस बारे में संपर्क करने के कोशिश की गई तो वह उपलब्ध नहीं थीं। ऐसे में बीजेपी में शामिल होने के कयास को और भी ज्यादा बल मिला।

पिता के नक्शेकदम पर चलना हैरानी नहीं

रीता बहुगुणा जोशी अगर बीजेपी में शामिल होती हैं तो यह कोई चौंकाने वाली बात नहीं होगी। उनका परिवार पहले भी कांग्रेस से बगावत करने के बाद भी फैमिली में शामिल रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और कभी प्रदेश के दिग्गज कांग्रेस नेता रहे रीता बहुगुणा जोशी के पिता हेमवतीनंदन बहुगुणा ने इंदिरा गांधी के लगाए आपातकाल के बाद कांग्रेस छोड़कर जगजीवन राम के साथ कांग्रेस फार डेमोक्रेसी पार्टी का गठन किया था। उनकी पार्टी ने चुनाव लड़ा था और बाद में उनकी पार्टी का जनता पार्टी में उनका विलय हो गया था। लेकिन 18 महीने की जनता सरकार के बिखरने के बाद वह दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गए थे। रीता बहुगुणा जोशी भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलें तो हैरानी नहीं होगी।

सपा से अपने करियर की शुरूआत की रीता बहुगुणा जोशी ने

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इतिहास पढ़ाने वाली रीता बहुगुणा जोशी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत मुलायम सिंह के कहने पर सपा से की थी। सपा के टिकट पर वह इलाहाबाद की मेयर रह चुकी रीता बहुगुणा जोशी अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद ही कांग्रेस में शामिल हो गईं। कांग्रेस ने रीता बहुगुणा जोशी को हाथों-हाथ लिया और अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बनाई गईं। रीता बहुगुणा लखनऊ लोकसभा क्षेत्र से साल 2009 और 2014 का चुनाव भी कांग्रेस के टिकट पर लड़ा, लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में रीता बहुगुणा जोशी कैंट विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का विधायक बनने में कामयाब रही।

शीला और रीता की लड़ाई में कांग्रेस की बढ़ जाएंगी मुश्किलें

आगामी विधानसभा चुनाव में यूपी को फतह करने के लिए कांग्रेस ब्राम्हण वोटों पर नजर गढ़ाए हुए है। कभी कांग्रेस को सबसे मजबूत आधार रहे ब्राम्हण वोटों को अपने पाले में करने के लिए कांग्रेस के रणनीतिकार काम कर रहे हैं। ब्राह्मणों को लुभाने के लिए कांग्रेस ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित को अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। शीला दीक्षित के ससुर उमाशंकर दीक्षित कांग्रेस के बड़े नेता थे। ब्राम्हणों में उनकी बड़ी पकड़ थी। उनके कहने पर ही शीला दीक्षित राजनीति में आईं और यूपी के कन्नौज से सांसद भी रहीं। रीता बहुगुणा जोशी खुद ब्राम्हण हैं और वह शीला दीक्षित को यूपी सीएम प्रोजेक्ट किए जाने से नाराज चल रही हैं। ऐसे में कांग्रेस को यूपी में नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि कई दशक से रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस के संगठन में महत्वपर्ण पदों पर रही हैं।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है असर

यूपी के साथ ही उत्तराखंड विधानसभा चुनाव पर भी इसका असर पड़ सकता है। यूपी के अलग-अलग हिस्सों में निवास कर रहे उत्तराखंड मूल के लोगों पर भी रीता बहुगुणा जोशी की पकड़ है। कांग्रेस ने अगर डैमेज कंट्रोल नहीं किया तो यह वोट कांग्रेस से छिटक सकता है। रीता बहुगुणा अगर बीजेपी में शामिल होती हैं तो उनके साथ बड़ी संख्या में महिला कांग्रेस नेता भी बीजेपी में जाएंगी।

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