वह भी एक मजा था मतगणना का जब टीवी पर आती थीं फिल्में

वह भी एक मजा था मतगणना का जब टीवी पर आती थीं फिल्मेंमतगणना करते कर्मचारी। (फाइल फोटो)

लखनऊ। 11 मार्च को यूपी इलेक्शन-2017 का परिणाम आएगा। जिसमें चार घंटे में तस्वीर साफ होगी। साल 1998 से पहले चुनाव में सबसे ज्यादा लंबी प्रक्रिया मतगणना होती थी। तीन दिन तक का समय मतगणना पूरी होने में लग जाया करता था। इस दौरान लोगों की नजर दूरदर्शन पर आने वाले समाचारों और चुनाव विश्लेषणों पर लगी रहती थी। जिनको चुनाव में अधिक रुचि नहीं थी, वे इस दौरान आने वाली फिल्मों का आनंद लिया करते थे।

मगर मतगणना का नजारा साल 1999 के चुनाव से बदला जब पहली बार इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन ने काम करना शुरू कर दिया। अब चुनाव परिणाम आने में बामुश्किल छह से सात घंटे का समय लगता है। जबकि रूझान के हिसाब से एक स्पष्ट तस्वीर तो तीन घंटे में ही सामने आ जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही होगा। सुबह 8:00 बजे से प्रदेश भर के केंद्रों पर मतगणना शुरू हो जाएगी। जबकि 2:00 बजे तक अंतिम परिणाम आ जाएंगे। पहला रुझान सुबह 9:00 बजे तक मिलेगा। बहुत तेजी से ये संख्या बढ़ती जाएगी।

इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के जरिये देश में चुनाव प्रक्रिया का संचालन 1999 के चुनाव में कुछ सीटों पर बतौर पॉयलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। जिसके बाद में 2004 से नियमित तौर पर विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में इसका उपयोग शुरू हो गया। जिसके बाद में मतगणना का काम बहुत तेजी से होने लगा है।

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पुराने समय में इस तरह से होती थी मतगणना

मतपत्रों के जरिये जब मतगणना हुआ करती थी, तब काउंटिंग में बहुत समय लगा करता था। लगभग दो से ढाई दिन तक का वक्त अंतिम रिजल्ट आने में लग जाता था। जबकि रुझान में भी इस औसत के हिसाब से समय लगा करता था। सबसे पहले सील तोड़ कर मतपेटियों से मतपत्र निकाले जाते थे। इसके बाद में उनकी बंडलिंग होती थी। फिर अलग अलग चुनाव चिन्ह पर मोहर वाले मतपत्रों को अलग किया जाता था। फिर इन मतपत्रों को अलग अलग गिनती होती थी। इसके बाद अलग अलग टेबल की संख्या का जोड़ किया जाता था। आखिरकार रिजल्ट घोषित होता था। कई बार काउंटिंग की त्रुटियां सामने आती थी तब दोबारा काउंटिंग की जाती थी। जिसमें कई सीटों पर और अधिक वक्त लगा करता था। जिससे रिजंल्ट की इस लंबी प्रक्रिया के दौरान कई बार झगड़े भी सामने आते थे।

अब धड़धड़ आते हैं नतीजे

ईवीएम के जरिये प्रक्रिया बहुत आसान हो गई है। सबसे पहले आठ बजे से करीब 9:00 बजे तक डाक के वोट की काउंटिंग होती है। नौ बजे से ईवीएम खोली जाती हैं। इसमें केवल रिजल्ट का बटन दबाते ही परिणाम आना शुरू हो जाता है। जिसमें अलग अलग दलों को उस ईवीएम में मिली वोटों की संख्या लाल रंग के डिस्प्ले के साथ मशीन पर दिखने लगते हैं। जिसके बाद अलग अलग ईवीएम की काउंटिंग को मिला कर रिजल्ट घोषित होता है। एक ईवीएम से निकले वोट को एक राउंड कहा जाता है। ऐसे में एक विधानसभा क्षेत्र में जितनी ईवीएम होती हैं, उतने चरण की वोटिंग होती है।

सबसे पहले गिने जाएंगे सर्विस वोट

पहले डाक से आने वाले मतपत्र उस दशा में गिने जाते थे जब मुकाबला टाई होता था। मगर अब ये तरीका बदल दिया गया है। अब पोस्टल बैलेट सबसे पहले गिन लिये जाते हैं। उसके बाद में ईवीएम खोली जाती हैं। ऐसे में एक एक वोट काउंटिंग में जोड़ा जाता है।

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