उत्तर प्रदेश को फिर खंड-खंड करने की सियासत

Rishi MishraRishi Mishra   7 Nov 2016 7:29 PM GMT

उत्तर प्रदेश को फिर खंड-खंड करने की सियासतयूपी विधानसभा (फोटो साभार: गूगल)

लखनऊ। दुनिया में देशों की आबादी के लिहाज से यूपी का नंबर पांचवां है। करीब 22 करोड़ की आबादी वाले कार और रोजगार के बयान के माध्यम से बसपा सुप्रीमो मायावती ने अलग बुंदेलखंड का मुद्दा एक बार फिर से छेड़ दिया। जबकि भाजपा की परिवर्तन रैली की शुरुआत में भी अलग बुंदेलखंड की मांग बात रखी गई थी। मायावती ने साल 2011 में अपनी सरकार जाने से पहले इसी तरह का एक प्रस्ताव केंद्र को भेजा था, जिस पर भारी विरोध के चलते कभी अमल नहीं किया जा सका।

15 साल से उठ रही है यूपी के टुकड़े करने की मांग

यूपी के टुकड़े करने की मांग पिछले करीब 15 साल से उठ रही है। जब उत्तराखंड के तौर पर चार लोकसभा क्षेत्रों का एक हिस्सा टूट गया था। ऐसे ही चार से पांच राज्य एक यूपी में बनाने की मांग हर तरफ से उठती रही। जिसमें पश्चिम उत्तर प्रदेश से हरित प्रदेश, मध्य प्रदेश और उप्र के कुछ जिले मिला कर बुंदेलखंड, उप्र के आठ से 10 जिलों को मिला कर अवध, पूर्वांचल के निर्माण की मांग समय समय पर उठती रही है। जिसको लेकर आंदोलन भी हुए हैं। मगर उत्तराखंड के बाद यूपी को तोड़ कर कोई अन्य राज्य बनाने का मुद्दा कभी भी परवान नहीं चढ़ सका है।

अपने शासनकाल के अंतिम दिनों में उठाई आवाज

पिछले साल जब संसद ने आंध्र प्रदेश से अलग तेलंगाना राज्य की मांग को मंजूर किया था, तब उमा ने कहा था कि राज्य पुनर्गठन आयोग को फिर से बनाया जाए और अलग राज्य बनाने के जो अन्य प्रस्ताव फैसले से वंचित रह गए हैं, उन पर भी विचार किया जाए। उन्होंने कहा था कि इनमें मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्रों को मिलाकर उसे पृथक राज्य बनाने और उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांटने के बसपा प्रमुख मायावती के प्रस्ताव सहित ऐसी सभी मांगों पर विचार हो। मायावती की मांग को हालांकि उन्होंने राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा था कि जब चुनाव करीब होते हैं, तभी वह ऐसी मांग उठाती हैं। लोकसभा चुनाव करीब आता देख उन्होंने यह मांग की है और इससे पहले यूपी के अपने शासन के अंतिम दिनों में उन्होंने उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल, पश्चिम प्रदेश, अवध प्रदेश और बुंदेलखंड में बांटने का प्रस्ताव पारित कराया था। भाजपा नेता ने कहा, बहरहाल जिस भी उद्देश्य से पृथक राज्यों की मांग की गई हो, अच्छा यही होगा कि राज्य पुनर्गठन आयोग का फिर से गठन हो और उसमें अलग राज्यों के सभी प्रस्तावों पर विचार के बाद संसद में उन पर व्यापक चर्चा से अंतिम फैसला किया जाए।

22 करोड़ की आबादी अधिक राज्य अब बन रहे जरूरत

वैसे प्रदेश की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए अब अधिक राज्यों की जरूरत बढ़ती जा रही है। मुजफ्फरनगर के रहने वाले शिक्षक भीम सिंह अस्वाल बताते हैं कि हम पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोगों को हाईकोर्ट में केस लड़ने के लिए इलाहाबाद जाना पड़ता है। ऐसे में अगर हमारा हाईकोर्ट मेरठ में ही तो क्या बुराई है। इसलिए पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग कर देना चाहिये। चौधरी अजित सिंह लंबे समय से हरित प्रदेश की मांग करते रहे हैं। इसी तरह से बुंदेलखंड की अनदेखी को देखते हुए अलग राज्य को लेकर बुंदेली समाज आंदोलन करता रहा है। जिसका नेतृत्व फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला ने किया है। वह अभी कर रहे हैं।

यूपी और इंडोनेशिया की आबादी लगभग बराबर

इसी तरह से इलाहाबाद को राजधानी मान कर पूर्वांचल राज्य का निर्माण किये जाने की मांग की जा रही है। उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 22 करोड़ लोगों की है। दुनिया में देखा जाए तो आबादी के लिहाल से यूपी 5वां सबसे बड़ा देश है। यूपी और इंडोनेशिया की आबादी लगभग बराबर हो चुकी है। 32 करोड़ की आबादी वाले संयुक्त राज्य अमेरिका में 75 राज्य हैं। मगर भारत में इनकी संख्या अभी केवल 27 ही है।

मायावती केवल तोड़ने की ही राजनीति करती रही हैं। कभी जातियों को तोड़ने की तो कभी राज्यों को तोड़ने की। मगर वे कभी भी इसको लेकर गंभीर नहीं रहीं। उनका एकमात्र लक्ष्य केवल चुनावी लाभ लेना है, मगर बीजेपी इस पर गंभीर कोशिशें करेगी।
हरिश्चंद्र श्रीवास्तव, प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी

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