परिवर्तन रैली: अपनों के मेले में नहीं मिला अटल जी का कोई मीत 

Rishi MishraRishi Mishra   2 Jan 2017 8:26 PM GMT

परिवर्तन रैली: अपनों के मेले में नहीं मिला अटल जी का कोई मीत लखनऊ की परिवर्तन रैली में नहीं दिखीं अटल जी की तस्वीरें।

ऋषि मिश्र

लखनऊ। लगी कुछ ऐसी नज़र बिखरा शीशे सा शहर, अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूं, गीत नहीं गाता हूँ… पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने खुद के प्रधानमंत्री रहते हुए ये गीत लिखा था, जिसके कुछ समय बाद वे राजनीति के नेपथ्य में चले गए थे। उनको सोमवार को वास्तविकता में बहुत दुख हुआ होगा। उनकी कर्मभूमि लखनऊ में आयोजित परिवर्तन रैली के दौरान मंच पर वैसे तो मार्गदर्शक मंडल के लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को भी जगह नहीं दी गई लेकिन इसके साथ ही अटल बिहारी बाजपेई जिनकी लखनऊ लंबे समय तक लोकसभा सीट रही उनको तस्वीर तक को शामिल नहीं किया गया। जबकि 15 मार्च 2014 को लोकसभा चुनाव से पहले जो रैली इसी जगह पर हुई थी, उसमें अटल बिहारी बाजपेई की तस्वीर मंच की पृष्ठभूमि में थी। हां ये बात दीगर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान अटल जी का ज़िक्र किया।

नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि ये लखनऊ की धरती अटल बिहारी बाजपेयी की कर्मभूमि है। उन्होंने अपनी जवानी इस धरती पर खपाई। पसीना बहाया। उन्होंने यहां रहकर भाजपा को एक वट वृक्ष बनाया। अटल जी आज बहुत खुश होंगे मगर अटल बिहारी बाजपेई और अधिक खुश हों, इसको लेकर इस रैली के कर्ता-धर्ता कुछ भी करते हुए नजर नहीं आए। उन्होंने अटल बिहारी बाजपेई की एक तस्वीर तक का इंतजाम नहीं किया। यहां तक की अटल बिहारी बाजपेई के समय के सबसे खास नेताओं में से एक लालजी टंडन भी नरेंद्र मोदी के मंच पर नजर आए।

अटल बिहारी बाजेपई तो हर भाजपाई के दिल में हैं। मंच की पृष्ठभूमि में जो विशाल कमल है, वह अटल जी का ही स्वरूप है। अटल जी ने हमेशा इस कमल की उन्नति के लिए ही काम किया है।चंद्रमोहन, प्रवक्ता, उप्र बीजेपी

अटल बिहारी बाजपेई और लखनऊ

लखनऊ और अटल बिहारी बाजपेई का नाता लंबा रहा। 1991 से लेकर 2004 तक वे लखनऊ के सांसद रहे। इस दौरान वे तीन बार प्रधानमंत्री भी रहे। जब तक अटल प्रधानमंत्री थे, लखनऊ के सांसद बने रहे। उनका लखनऊ खासतौर पर पुराने शहर से विशेष प्रेम था। उनके समय में चौक का सुंदरीकरण किया गया था। गोमती पर कुड़ियाघाट चमकाया गया था। गरीबों को लखनऊ में 10 और 15 रुपए रोज की किस्त पर मकान दिए गए थे। इसके अलावा लखनऊ विकास कार्यों की झड़ी लगी थी। लखनऊ के लोगों को भी अटल जी के प्रति लगाव अब तक कभी कम नहीं हुआ।

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