यूपी इलेक्शन 2017: चार करोड़ मतदाताओं ने नहीं किया मतदान

यूपी इलेक्शन 2017: चार करोड़ मतदाताओं ने नहीं किया मतदानलखनऊ के मतदान केंद्र पर पसरा सन्नाटा।

ऋषि मिश्र

लखनऊ। सरोजनी नगर का बहसा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एक मतदान केंद्र बनाया गया था। जहां जब पोलिंग पार्टी पहुंची तब इस केंद्र में बिजली का कोई इंतजाम नहीं था। ऐसा नहीं है कि बिजली गई हुई थी। वास्तविकता ये है कि बिजली इस केंद्र पर थी ही नहीं। ये सच्चाई है। चुनाव आयोग ने दावा किया था कि चुनाव से ठीक पहले करीब 65 करोड़ रुपए का खर्च कर के प्रदेश भर के ऐसे मतदान केंद्रों का विद्तीयकरण करवाया गया है जहां बिजली नहीं थी। मगर वास्तविकता राजधानी में सामने आ गई। इन कमियों का सीधा असर मतदान प्रतिशत पर गया। पांचवें राउंड तक ही आयोग के तमाम दावे हवाई साबित हो गए। दावा तो 80 फीसदी तक मतदान कराने का था मगर वास्तविकता ये है कि पांच जिलों में मतदान फीसदी 2012 के मुकाबले भी घट गया। ओवरऑल भी पांचवें चरण में मतदान का प्रतिशत 60 फीसदी के नीचे आ गया। कई जगह चुनावी बहिष्कार पर भी आयोग लगाम नहीं लगा सका। पांच चरणों में कुल करीब 10 करोड़ में चार करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग नहीं किया।

प्रथम चरण में करीब 65 फीसदी मतदान हुअ था। दूसरे चरण में ये 63, फिर 62 और 61 फीसदी का सफर करते हुए मतदान का प्रतिशत पांचवें चरण में 58.36 तक जा पहुंचा है। ये लगातार नीचे गिर रहा है। जबकि न तो कहीं मौसम की कोई खराबी सामने आ रही है और न ही किसी तरह की अन्य कोई परेशानी है।

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इन जिलों में 2012 से कम हो गया मतदान का प्रतिशत

  • जिला 2012 2017
  • अमेठी 56.68 56.25
  • बहराइच 59.65 59.60
  • संतकबीर नगर 53.31 52.59
  • सुल्तानपुर 58.60 56.53

कई जगह हुआ चुनाव बहिष्कार, कुछ न कर पाया आयोग

प्रदेश के कई जगहों पर ग्रामीण और शहरी इलाकों में मतदातओं ने मतदान का बहिष्कार की घोषणा काफी पहले से ही कर दी थी। कई जगह पर “नेताओं का इस क्षेत्र में प्रचार करने आना मना है”जैसे बोर्ड भी लगाए गए थे। मगर चुनाव आयोग ने कहीं भी संज्ञान नहीं लिया। जिसका परिणाम ये हुआ कि मतदान का प्रतिशत काफी घट गया।

औरैया में गांव को जोडने के लिए सड़क न होने की वजह से ग्रामीणों ने विधान चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। प्रशासन ने काफी मान-मनौव्वल की लेकिन ग्रामीण नहीं माने। औरैया सदर सीट के बीजेपी के प्रत्याशी के सडक बनवाने के वादे पर कुछ ग्रामीणों ने मतदान शुरू कर दिया था मगर फिर भी संख्या बहुत कम रही।

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ऐसा नहीं है कि चुनाव आयोग ने कोशिश नहीं की। कई तरह के जागरूकता अभियान चलाए गए हैं। अधिकांश जिलों में मतदान का प्रतिशत बढ़ा भी है। कुछ जगह घटने की सूचना है।
टी. वेंकटेश, मुख्य चुनाव अधिकारी, उप्र

जिला मुख्यालय से 11 किलोमीटर व शहर से 6 किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव अटा के ग्रामीणों को आने-जाने के लिए सडक नहीं है। इसलिए ग्रामीणों ने विधान चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। अटा निवासी सुरेश मिश्रा (39) का कहना है कि सडक आज तक गांव को जोडने के लिए नहीं बनी। कई बार शिकायत वर्तमान सरकार के माननीयों से की गयी लेकिन किसी ने नहीं सुनी। अटा के ओम नरायन मिश्रा (40) बताते है कि दिबियापुर और फफूंद मार्ग को जोडने के लिए कच्चा रास्ता है बरसात के मौसम में काफी परेशानी होती है। सडक न होने की वजह से चुनाव का बहिष्कार किया गया, आश्वासन मिलने पर वोटिंग शुरू हो गई है।

महरौनी (ललितपुर) में भी करीब एक दर्जन से अधिक गाँवो के मतदाता मतदान का बहिष्कार किया था।प्रदेश सरकार ने विधानसभा को दो नयी तहसील देकर सौगात तो दे दी, यह सौगात इन गाँव वालों को किसी चुनौती से कम नही है! एक दर्जन से अधिक गाँव महरौनी तहसील के पास है, जिसकी 10 से 15 किमी दूरी है! शासन ने इन गाँवों को पाली तहसील मै जोड दिया, जिसकी दूरी 30 से 40 किमी है! परेशानी का हवाला देकर उन्होंने ने बताया "पाली जाने के लिए तीन जगह बस बदलनी पडती है, जिसमे एक तरफ से तीन घंटे का समय लगता है, यह कहना है ललितपुर जनपद की महरौनी विधानसभा दूरी 52 किमी बारचौंन गाँव के शिशुपाल (27 वर्ष) का।

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बारचौन गाँव के दरयाव सिंह (29 वर्ष) बताते है कि "पाली तहसील मै जोडकर हमलोगो पर पहाड पटका है, छोटे से छोटा काम वहीं से होता है, कम नही बना तो बार बार भागना पडता है, जिससे समय व पैसा दोनों बर्बाद होते है, जब से लगातार महरौनी तहसील मै वापिस जोड़ने की माँग उठा रहे है, जिसको लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल तक गुहार लगा चुके है, आश्वासन मिला लेकिन हल नही निकला!"

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