यूपी इलेक्शन में खपना था 30 से 35 अरब का काला धन

यूपी इलेक्शन में खपना था 30 से 35 अरब का काला धनफोटो साभार: गूगल इमेज 

ऋषि मिश्र

लखनऊ। आयकर विभाग के आंकलन के मुताबिक इस बार यूपी चुनाव में कितने रूपए खर्च होंगे और इसमें कालाधन का हिस्सा कितना होगा? एक मोटा आंकलन है कि इस चुनाव में लगभग 50 अरब रुपए का खर्च होना अनुमान था। इसमें काले धन का हिस्सा कुछ नहीं 30 से 35 अरब हो सकता था। जिसमें 15 अरब रुपए तो राजनीतिक दल औपचारिक तौर पर खर्च करते और बाकी ब्लैक मनी के तौर पर चुनाव में खपाया जाना था। जिसको लेकर चुनाव आयोग की ओर से आयकर विभाग के अफसरों और पुलिस अधिकारियों के साथ पहले ही बैठक हो चुकी थी। मगर मोदी सरकार के नये फरमान से निश्चित तौर पर काला धन यूपी इलेक्शन में कम होगा।

इसी तरह का आंकलन विभाग ने बिहार में 243 सीटों पर चुनाव को लेकर काले धन का आंकलन किया था। जिसमें राज्य में 2430 उम्मीदवारों के खर्च का अनुमान लगाया गया था। वैसे विधायक के लिए अधिकतम चुनाव खर्च की सीमा 28 लाख रुपये है, इस तरह से 6.80 अरब रुपए तो आधिकारिक रुप से खर्च हो गए। बाकी करीब 20 अरब रुपये काले धन के तौर पर खर्च किया गया।जिसमें आयकर विभाग ने अपनी कार्यवाही की।

आयकर विभाग के एक अफसर ने बताया कि इस तरह से यूपी के 403 विधानसभा सीटें हर सीट पर चार उम्मीदवार ही मुख्य माने जाते हैं। कहीं-कहीं पांचवा होता है लेकिन चार के हिसाब से करीब 1650 प्रत्याशी ऐसे होंगे जो कुछ नहीं तो जिनमें से प्रत्येक 28 लाख खर्च करेगा। पार्टियों का जो घोषित खर्च होता है वैसे तो वह प्रत्याशी के खाते में डाल दिया जाता है लेकिन अघोषित खर्च बहुत अधिक होता है। यूपीद में चुनाव कांटे का होने जा रहा है इसलिए यह पार्टियों का खर्च भी 300 करोड़ से ऊपर का आंका जा रहा है। । राष्ट्रीय नेताओं की चुनावी रैलियों पर घोषित-अघोषित मिलाकर 20-25 लाख का खर्च बैठता है।

प्रति वोटर कितना खर्च

आयकर विभाग के अफसर का मानना है कि प्रति वोटर करीब 300 रुपये का खर्च कांटे की टक्कर के दौरान एक वोटर पर होता है। जो कि यूपी में होने जा रही है। जिससे काले धन की खपत का स्पष्ट अंदाजा हो सकता है। चुनाव प्रबंधन से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि चुनाव जितना कड़ा होता है उतना ही खर्चा अधिक होता है। अगले साल पंचायत चुनाव होना है। उसमें प्रति वोटर खर्च पांच सौ रुपए से अधिक पहुंच जाता है।

आयकर ने बनाई सर्विलांस टीम

वैसे चुनाव आयोग के निर्देश पर आयकर विभाग ने चुनाव में काला धन का प्रवाह रोकने के लिए एक सर्विलांस टीम बनाई है। जिसमें कहीं भी 10 लाख से अधिक कैश पकड़ाने पर आयकर विभाग को सूचना देनी अनिवार्य होगी। विभाग ऐसी रकम की जांच करेगा। आयोग ने आयकर विभाग को हवाला से होने वाले लेनदेन पर भी नजर रखने को कहा है। हवाई अड्डे तक अलर्ट पर डाल दिए गए हैं। मगर सरकार के 500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद में ये कवायद अब उतनी अधिक नहीं करनी पड़ेगी।

कहां खपाते हैं काला धन

पेड कार्यकर्ताओं पर, कैश के बदले वोट, शराब बांटने में, सेलीब्रिटी बुलाने में, विज्ञापन पर, वोट काटने वाले उम्मीदवारों को खड़ा करने और बैठाने में काला धन आमतौर पर ये काला धन खर्च होता है।

लोकसभा चुनाव में कहां-कहां से पकड़ा गया था काला धन

पिछले लोकसभा चुनाव में ये कवायद सबसे अधिक सख्त थी, तब प्रदेश भर में हाईवे से करोड़ों रुपये पकड़े गये। घड़े में लाखों रू पश्चिमी यूपी में आयकर टीम ने मिट्टी के घड़े से 40 लाख रुपये बरामद किए थे। यह रुपया ट्रैक्टर-ट्रॉली में ले जाया जा रहा था। दूध के डिब्बे में 14 लाख रू पश्चिमी यूपी के जिलों में दूध के डिब्बों से 14 लाख रुपये बरामद किए गए तो मिठाई के डिब्बों में सोना भरा हुआ मिला।

कार में गुप्त ठिकाना रू एक अन्य मामले में कार डिग्गी के फर्श पर पड़ी मैट के नीचे लोहे की चादर काट कर बनाया गुप्त ठिकाना दिखाई दिया। इसमें सवा करोड़ रुपये भरे थे।ऑटो में 18 लाख रू बागपत में आयकर विभाग ने ऑटो रिक्शा से 18 लाख रुपये बरामद किए। इन रुपयों का कोई रिकॉर्ड नहीं था और न कोई दस्तावेज दिखाए जा सके।

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