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यूपी चुनाव: सपा प्रदेश अध्यक्ष उत्तम की प्रतिष्ठा दांव पर

यूपी चुनाव: सपा प्रदेश अध्यक्ष उत्तम की प्रतिष्ठा दांव परसमाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य नरेश उत्तम पटेल।

फतेहपुर (आईएएनएस/आईपीएन)। उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जिले की आधा दर्जन सीटों पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य नरेश उत्तम पटेल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। यह प्रदेश अध्यक्ष का यह गृह जनपद है और वह जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र के लहुरी सरांय गाँव के मूल निवासी हैं।

गठबंधन के तहत जिले की चार सीटों पर सपा व दो सीटों पर सहयोगी कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं। ऐसे में बतौर प्रदेश अध्यक्ष विधानसभा का यह चुनाव उत्तम के राजनीतिक कैरियर की दिशा तय करने वाला साबित होगा। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल को राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पारिवारिक विवाद के बाद नई जिम्मेदारी सौंपी है। उत्तम पहले पार्टी के प्रांतीय महामंत्री व उपाध्यक्ष पद पर काम कर चुके हैं। इतना ही नहीं, मुलायम सिंह यादव के अति नजदीकी मानेजाने वाले उत्तम मंडलों के साथ-साथ कई चुनावों के प्रभारी भी रह चुके हैं।

उत्तम का सियासी सफर काफी लंबा है। पहली बार वर्ष 1989 में जनता दल के टिकट पर जहानाबाद विधानसभा से चुनाव जीतने के बाद वह प्रदेश सरकार में उपमंत्री भी रह चुके हैं। वर्ष 1991 का चुनाव हार गए थे। उन्हें छत्रपाल वर्मा ने पराजित किया था। इसके बाद उत्तम जनता से होने वाले किसी भी सीधे चुनाव में रूबरू नहीं हुए।

संगठन में जिम्मेदारी संभालते हुए उन्हें दो बार सदस्य विधान परिषद बनने का मौका भी मिला। पारिवारिक झगड़े के बाद पहली बार अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया। ऐसे में अपने गृह जनपद की आधा दर्जन सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों के साथ-साथ सहयोगी कांग्रेस के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करना भी उनके लिए एक चुनौती होगी।

वैसे सपा की स्थापना के बाद से जिले में जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र के साथ सदर ऐसा विधानसभा क्षेत्र रहा है, जहां पूर्व में और 2012 के चुनाव में पार्टी के दो विधायक चुने गए थे। इनमें जहानाबाद से मदन गोपाल वर्मा व सदर से महरूम सैय्यद कासिम हसन शामिल थे।

दल बदल के कारण भी समाजवादी पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़ती रही है। वर्ष 2002 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाले मोहम्मद सफीर बसपा सरकार के जाने के बाद सपा में शामिल हो गए थे, लेकिन 2007 का चुनाव वह हार गए थे। 2012 में उनके स्थान पर काबीना मंत्री आजम खां के करीबी राफे राना को पार्टी ने हुसैनगंज विधानसभा से टिकट दिया था, लेकिन वह जीत नहीं सके थे।

इसी तरह 2012 के चुनाव तक बसपा के टिकट पर चार बार चुनाव जीतने वाले पूर्व मंत्री अयोध्या प्रसाद पाल भी अब समाजवादी पार्टी की साइकिल पर सवार हैं। पार्टी ने आसन्न चुनाव में जहानाबाद से मदन गोपाल वर्मा, बिंदकी से रामेश्वर दयाल दयालु, सदर से चंद्र प्रकाश लोधी और अयाह-शाह से अयोध्या प्रसाद पाल को टिकट दिया है। जबकि कांग्रेस के खाते से हुसैनगंज से उषा मौर्य व खागा सुरक्षित विधानसभा सीट से ओम प्रकाश गिहार चुनाव मैदान में हैं।

कांग्रेस उम्मीदवार बनने से पहले ओम प्रकाश गिहार सपा में ही थे। जिले की इन आधा दर्जन सीटों पर हो रहे चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष के सामने जीत हासिल करवाना उनकी सियासी परीक्षा भी है। आधा दर्जन सीटों में सर्वाधिक प्रतिष्ठा उनके पैतृक विधानसभा क्षेत्र जहानाबाद में लगी हुई है, जहां से मदन गोपाल वर्मा के सामने अभी पिछले दिनों तक सपा में रहे जय कुमार सिंह जैकी अब अपना दल-भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी हैं जो मदन गोपाल वर्मा को सजातीय समीकरण के आधार पर कड़ी टक्कर दे सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि जैकी के आ जाने से अब मौजूदा विधायक मदन गोपाल वर्मा की राह उतनी आसान नहीं दिख रही है, जितनी पिछले चुनाव में थी।

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