राम मंदिर पर भाजपा और आक्रामक, यूपी बीजेपी ने भी मिलाया विनय कटियार के सुर में सुर

राम मंदिर पर भाजपा और आक्रामक, यूपी बीजेपी ने भी मिलाया विनय कटियार के सुर में सुरअयोध्या में बोले विनय कटियार-अयोध्या में बिना राम मंदिर के शिक्षा,रोजगार सब कुछ बेकार है।

लखनऊ। कितनी भी आलोचना हो मगर भारतीय जनता पार्टी राम मंदिर के मुद्दे पर पीछे हटने को अब राजी नहीं नजर आ रही है। अंतिम दो चरणों के तहत पूर्वाचंल में चार और 8 मार्च को मतदान होना है, एक बार फिर राममंदिर को लेकर भाजपा ने आक्रामक रुख अपना लिया है।

सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में केस चल रहा है, इसके बावजूद भाजपा का दावा है कि राम मंदिर का निर्माण सरकार बनने के बाद किया जाएगा। अयोध्या में भाजपा के फायरब्रांड नेता विनय कटियार ने वोट देने के बाद मीडिया से बातचीत में इस बात का दावा किया। इस पर जब भाजपा के प्रदेश संगठन का पक्ष लिया गया, तब यहां भी कटियार के सुर में सुर मिलाया गया। भाजपा का स्पष्ट कहना है कि आपसी बातचीत और वैधानिक प्राविधानों का पालन करते हुए मंदिर का निर्माण करवाया जाएगा।

भाजपा सरकार बनने के बाद ये तय है कि हम राम मंदिर निर्माण की दिशा में राह प्रशस्त करेंगे। इसके अलावा सभी पक्षों में सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। वैधानिक प्राविधानों को भी हम पूरा करवाएंगे।
राकेश कुमार त्रिपाठी, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा

विनय कटियार भाजपा के स्टार प्रचारकों में शामिल किये गये थे। मगर उन्होंने बहुत अधिक जनसभाओं को संबोधित नहीं किया। मतदान के पांचवें चरण में कटियार ने सोमवार का मत डालने के बाद मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण भाजपा की सरकार आने के बाद किया जाएगा। मंदिर निर्माण की राह के सभी रोड़े हटाए जाएंगे। अगर अब भी मंदिर का निर्माण नहीं किया गया तो फिर सरकार बनने का मतलब क्या है।

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सुप्रीम कोर्ट में लंबित है प्रकरण

राम मंदिर बाबरी मस्जिद मालिकाना हक का प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस संबंध में 2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने फैसला सुनाया था। जिसमें विवादित स्थल को तीन टुकड़ों में बांट दिया गया था। जिसमें एक हिस्सा रामजन्म भूमि के तहत पक्ष रामलला विराजमान को दूसरा हिस्सा बाबरी मस्जिद को और तीसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़ा के सुपुर्द करने का फैसला था। तीन सदस्यीय खंडपीठ ने तब स्पष्ट कहा था कि ये प्रमाणित है कि विवादित स्थल पर रामजन्म भूमि थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट गया जहां हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे दे दिया गया था।

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