आज कोई नाम भी नहीं जानता लेकिन कभी इन पार्टियों का बोलबाला था

आज कोई नाम भी नहीं जानता लेकिन कभी इन पार्टियों का बोलबाला थावो पार्टियां जिनका आज कोई नाम भी नहीं जानता

उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनावों की हर तरफ धूम हैं। सभी पार्टियां ज़ोर शोर से इस लोकतंत्र के पर्व में अपनी जीत की दावेदारी कर रही हैं, इन पार्टियों में सपा, बसपा, बीजेपी, कांग्रेस, AIMIM वगैरह शामिल हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में पहला विधानसभा कब हुआ था, कौन कौन सी राजनीतिक पार्टियां थीं और अब उन पार्टियों का हाल क्या है? आइये जानते हैं।

1951 में हुआ था पहला विधानसभा चुनाव

चुनाव में वोट डालते हुए लोग

उत्तर प्रदेश में पहला विधानसभा चुनाव साल 1951 में हुआ था। इस चुनाव में 2604 प्रत्याशियों ने अपनी क़िस्मत आज़माई थी। उस वक्त राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 3 करोड़ 17 लाख 151 थी जिसमें से कुल 1 करोड़ 67 लाख 58 हज़ार 619 वोट पड़े थे। इस दौर में कुल 12 राजनीतिक पार्टियों ने शिरकत की थी और इन 12 में से अब सिर्फ दो पार्टियां कांग्रेस और सीपीआई ही वजूद में हैं, बाकी की 10 पार्टियां वक्त की गर्द में खो चुकी हैं, जिनके बारे में अब सही तौर पर कोई बताने वाला भी मौजूद नहीं है।

12 में 10 पार्टियों का ख़त्म हो चुका है वजूद

पहले विधानसभा चुनाव की पार्टियों के चुनाव चिन्ह

साल 1951 में हुए चुनाव में गोविंद वल्लभ पंत मुख्यमंत्री चुने गए थे। इस चुनाव में कई पार्टियां थीं जिनके बारे में आज बहुत कम लोग जानते हैं। इस चुनाव में जो पार्टियां थीं उनका ज़िक्र कुछ यूं है-

1. भारतीय जनसंघ - भारतीय जनसंघ बाद में जनता पार्टी बना और फिर भारतीय जनता पार्टी। उन चुनाव में भारतीय जनसंघ ने मज़बूत दावेदारी की थी और बाकी की पार्टियों के लिए एक सशक्त चुनौती की तरह खुद को पेश किया था।

2. BPI यानी भारतीय बोलशेविक पार्टी ऑफ इंडिया - जैसा कि नाम से ज़ाहिर है इस पार्टी ने रुसी क्रांति के दो धड़े बोलशेनिक और मेनशेविक में से एक की विचारधारा के साथ खुद को चुनाव में पेश किया था, आज इस पार्टी का कोई नामो मिशान नहीं है।

3. FBL यानि फॉर्वड ब्लॉक - इस पार्टी का झुकाव नेता जी सुभाष चंद्र बोस के विचारों की तरफ था और 1951 के चुनावों में इसने पूरे उत्तर प्रदेश में कई रैलियां की थी, ये पार्टी फिर कहां गई कोई नहीं जानता।

3. HMS यानि हिंदू महासभा - हिंदू महासभा का नाम अब भी हम अक्सर सुनते हैं लेकिन ये वो हिंदू महासभा नहीं है जिसने यूपी के पहले विधानसभा में दावेदारी पेश की थी। मौजूदा वक्त में खुद को हिंदू महासभा का कार्यकर्ता बताने वाले वो लोग हैं जो महात्मा गांधी के हत्यारे नाथू राम गोड़से का मंदिर बनाकर पूजा करते हैं लेकिन इनका उस पार्टी से कोई लेना देना नहीं है, वो पार्टी अब खत्म हो चुकी है।

4. सीपीआई - कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, वो पार्टी है जो आज भी वजूद में है हालांकि आज इसका जनाधार वैसा नहीं है जैसा 1951 में हुआ करता था लेकिन फिर भी 2017 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई ने 68 उम्मीदवार उतारें हैं।

5. INC यानि इंडियन नैशनल कॉंग्रेस - कॉंग्रेस को देश का सबसे पुरानी पार्टी इसीलिए कहा जाता है। 1951 के चुनावों में भी कांग्रेस पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ रही थी और इस बार भी विधानसभा चुनाव मैदान में है। समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के बाद पार्टी और ज़्यादा मज़बूत स्थिति में है।

6. KMPP यानि किसान मज़दूर पार्टी - उत्तर प्रदेश की सियासत में किसानों और मज़दूरी की बात तब भी होती थी और आज भी होती थी ये और बात है कि किसान और मज़दूर दोनों की हालत अब भी वैसी ही है जैसी तब थी। किसान और मज़दूरों के अधिकारों के लिए लड़ने वाली एक राजनीतिक पार्टी और थी नाम था किसान मज़दूर पार्टी, लेकिन धीरे-धीरे इस राजनीतिक दल का नामोनिशान खो गया।

7. RCPI यानि रिवोल्यूशनरी कम्प्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया - नाम से ज़ाहिर है ये पार्टी कम्यूनिस्ट विचारधारा को मानने वाली थी लेकिन सीपीआई से अलग थी। सीपीआई अब भी वजूद में है लेकिन आरसीपीआई के बारे में आज पूछने पर भी शायद ही कोई बता पाए।

8. RSP यानि रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी - लोहिया के विचारों से प्रभावित होकर इस पार्टी ने खुद को सोशलिस्ट पार्टी का नाम दिया था लेकिन ये उस सोशलिस्ट पार्टी से अलग थी जो बाद में समाजवादी पार्टी के तौर पर पहचानी गई, RSP का कैडर धीरे धीरे खत्म हो गया और अब इस पार्टी का नाम लेना वाला भी कोई नहीं बचा।

9. SCF यानि ऑल इंडिया शिड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन - इस पार्टी को उस दौर की बीएपी समझ लीजिए, हालांकि इसका बीएसपी से कोई लेना देना नहीं है लेकिन विचारधारा एक जैसी थी। ये पार्टी खुद को पिछड़ों के लिए लड़ने वाली बताती थी, लेकिन वक्त के साथ लोगों ने इस पार्टी को नकार दिया और इसका वजूद खत्म हो गया।

10. सोशलिस्ट पार्टी - सोशलिस्ट पार्टी समाजवादी विचारधारा वाली पार्टी थी। इसका गठन 1951 के चुनावों से पहले ही हुआ था हालांकि बाद में इसका विभाजन भी हुआ और फिर बाद में एक धड़ा बाद में समाजवादी पार्टी के तौर पर सामने आया, लेकिन मूल रूप से जो सोशलिस्ट पार्टी थी वो खत्म हो गई।

11. UPPP यानि यूपी प्रजा पार्टी - उत्तर प्रदेश प्रजा पार्टी का गठन प्रदेश में ज़मीदारों के हक के लिए आवाज़ उठाने वाली पार्टी के तौर पर हुआ था। कांग्रेस ने जब ज़मीदारी प्रथा को खत्म कर दिया था तो उस फैसले के विरोध के लिए इस पार्टी को बनाया गया था, ये और बात है कि फैसला वापस नहीं हुआ और पार्टी धीरे-धीरे खत्म हो गई।

12. UPRSP यूपी रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी - ये राजनीतिक पार्टी राजस्तरीय थी और उत्तर प्रदेश के लिए गठित की गई थी। इसमें सोशलिस्ट विचारधारा को मानने वाले साथ आए थे लेकिन उनमें कुछ कुछ लेफ्ट का असर भी दिखता था। पार्टी ने 1951 के चुनावों में घोसी (पश्चिम) सीट पर कांग्रेस को हराकर जीत भी हासिल की थी।

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