मुलायम और अखिलेश की लड़ाई में कौन चलाएगा साइकिल ?

मुलायम और अखिलेश की लड़ाई में कौन चलाएगा साइकिल ?फोटो साभार- मनमोहन शर्मा

मनीष मिश्र/ अरविंद शुक्ला

लखनऊ। समाजवादी पार्टी की अंतर्कलह चुनाव आयोग पहुंच गई है। अगर मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी और चुनाव चिन्ह के लिए चुनाव आयोग में चुनौती देते हैं, तो पार्टी की कमान और साइकिल चुनाव चिन्ह पार्टी में बहुमत के आधार पर अखिलेश यादव को मिलने की संभावना है। लेकिन इस प्रक्रिया में दो से तीन महीने लगने के कारण आगामी विधानसभा चुनाव उन्हें बगैर साइकिल चिन्ह के ही लड़ना पड़ सकता है।

“दोनों धड़े चुनाव आयोग में अपने बहुमत के लिए हलफनामा देंगे। इसके बाद आयोग तय करेगा कि चुनाव चिन्ह किसके पास रहे। बहुमत के लिए सांसदों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों की संख्या का हलफनामे के रूप में साक्ष्य देना होगा।” भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने गाँव कनेक्शन को फोन पर बताया।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी बताते हैं, “चुनाव आयोग को इस मामले को निपटाने के लिए कम से कम दो से तीन महीने लगेंगे, तब तक आयोग साइकिल सिंबल सीज कर देगा। प्रदेश में विधानसभा चुनाव दो महीने में होने की संभावना है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग दोनों दलों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह आवंटित कर देगा।”

2012 में लंबी साइकिल यात्रा कर सपा को सत्ता में लाए थे अखिलेश यादव।

लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में बुलाए गए समाजवादी पार्टी के आपात अधिवेशन पार्टी पदाधिकारियों ने चार प्रस्ताव पारित कर मुलायम सिंह को समाजवादी पार्टी का संरक्षक, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष, शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने और अमर सिंह को पार्टी से बर्खास्त करने पर मुहर लगा दी। इसी के साथ नरेश उत्तम को सपा प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।

ज्यादातर कार्यकर्ता अखिलेश होने के साथ दावा कर रहे हैं।

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बुलाए गए इस आपात अधिवेशन को असंवैधानिक करार देते हुए सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव, वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा और राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल को समाजवादी पार्टी से बर्खास्त कर दिया।

आपात अधिवेशन संवैधानिक है या असंवैधानिक इसके बारे में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा, “आज का जो राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ है, उससे चुनाव आयोग का कोई लेना-देना नहीं होगा। जो आपस में लड़ रहे हैं लड़ते रहें। आयोग हलफनामे के बहुमत से निर्णय लेगा।”

दूसरी ओर सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने पांच जनवरी को मुलायम सिंह यादव के द्वारा बुलाए गए राष्ट्रीय अधिवेशन को असंवैधानिक करार दिया है।

अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच उपजे विवाद के बाद आखिरकार समाजवादी पार्टी रविवार को दो फाड़ हो गई। महाधिवेशन में बोलते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, “नेताजी हमारे पिता हैं, एक बेटा होने नाते हमारी जिम्मेदारी बनती है कि उनके खिलाफ साजिश हो तो ऐसी स्थिति में हम साजिशकर्ताओं के खिलाफ खड़े होंगे।”


साइकिल पर अखिलेश

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप इस पूरे विवाद को परिवार की अंदरुनी लड़ाई बताते हुए फोन पर कहा, “जिसके पास बहुमत है पार्टी उसी की होगी, बहुमत के आधार पर चुनाव आयोग में दावेदार अपना पक्ष रखेंगे। ये मुलायम परिवार का अंदरूनी विवाद है इस पर देश का कानून नहीं बल्कि पार्टी के संविधान के मुताबिक ही काम होगा।”

इससे पहले शुक्रवार को अलग प्रत्याशियों की सूची जारी करने के आरोप में अखिलेश और रामगोपाल को पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया था। लेकिन दूसरे दिन शनिवार को दोनों को निष्कासन रद्द करते हुए पार्टी में शामिल कर लिया गया।

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त केजी राव कहते हैं, “अगर दोनों धड़े चुनाव आयोग के पास अपनी दावेदारी पेश करते हैँ, तो पूरी जांच पड़ताल के बाद निर्णय आने तक चुनाव आयोग साइकिल सिंबल को सीज कर देगा।”

इस घटना के बाद अखिलेश यादव एक कड़े प्रशासक बनकर उभरे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर कविराज इस पूरे घटनाक्रम कहते हैं, “जितनी तेजी से एक्शन हुए उससे लगा रहा है अखिलेश को पार्टी का सार्वभौमिक नेता बनाने के लिए सब कुछ स्क्रिप्टेड था, जिस तरह 200 से ज्यादा विधायक अखिलेश के साथ आए, इससे साबित करने की कोशिश हुई कि उन्हें पार्टी में चुनौती देने वाला कोई नहीं है। इस घटना से पहले इतने लोग अखिलेश के साथ नहीं थे लेकिन अब हैं।

चुनाव आयोग को इस मामले को निपटाने के लिए कम से कम दो से तीन महीने लगेंगे, तब तक आयोग साइकिल सिंबल सीज कर देगा। प्रदेश में विधानसभा चुनाव दो महीने में होने की संभावना है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग दोनों दलों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह आवंटित कर देगा।
एसवाई कुरैशी, भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त

जिसके पास बहुमत है पार्टी और चुनाव चिन्ह उसी का होगा, बहुमत के आधार पर चुनाव आयोग में दावेदार अपना पक्ष रखेंगे। यह मुलायम परिवार का अंदरूनी विवाद है इस पर देश का कानून नहीं बल्कि पार्टी के संविधान के मुताबिक ही काम होगा।
सुभाष कश्यप, पूर्व लोकसभा महासचिव एवं संविधान विशेषज्ञ

अगर दोनों धड़े चुनाव आयोग के पास अपनी दावेदारी पेश करते हैँ, तो पूरी जांच पड़ताल के बाद निर्णय आने तक चुनाव आयोग साइकिल सिंबल को सीज कर देगा।
केजी राव, भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त

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