योगी की मंशा पर पानी फेर रहें हैं यूपी के अफसर

बढ़ा हुआ मानदेय न मिलनें से नाराज अनुदेशक 19 जून से गोरखपुर में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करने की तैयारी में है। अनुदेशको के एक नेता ने ट्विटर पर सरकार को टैग करते हुए 18 जुलाई तक बढ़ा मानदेय न मिलने पर आत्महत्या करनें की चेतावनी दी हैं।

योगी की मंशा पर पानी फेर रहें हैं यूपी के अफसर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा कई बार खुले मंच से घोषणा की गयी सरकार के अधिकृत ट्विटर अकाउंट और बीजेपी उत्तर प्रदेश के ट्विटर अकाउंट से पोस्ट की गयी। लेकिन हकीकत ये है, कि उत्तर प्रदेश के अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय का वायदा सिर्फ वायदा ही रह गया। पूरा सत्र बीत जाने के बाद भी आज तक अनुदेशकों को बढ़े हुए मानदेय का भुगतान नहीं किया गया।

राजधानी में हुआ था लाठियों से स्वागत

विक्रम सिंह (अध्यक्ष अनुदेशक संघ, उत्तर प्रदेश)

गोरखपुर के निवासी परिषदीय अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 31 हजार अनुदेशक ढेढ़ साल से बढे हुए मानदेय के भुगतान के लिए संघर्ष कर रहें हैं। पीएबी द्वारा स्वीकृत 17 हजार मासिक मानदेय भी पिछले सत्र में नहीं मिला।जिसके चलते प्रदेश के अनुदेशक सरकार के रवैये को लेकर आहत और आक्रोशित हैं।जब अनुदेशक अपनी तकलीफ को मुख्यमंत्री तक पहुँचाने के लिए अप्रैल में धरना स्थल पहुंचे तो उस दिन हमारी संख्या करीब 2 हजार थी। हमारी तकलीफ सुनने के बजाय प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अनुदेशकों का पुलिस द्वारा लाठियों से स्वागत किया गया। जिसमे करीब दो दर्जन अनुदेशक बुरी तरह से घायल हो गये, और पुलिस का दमनात्मक रवैया देखते हुए हमें मजबूरी में प्रदर्शन ख़त्म करना पड़ा।

मुख्यमंत्री के प्रयास से ही बढ़ा था अनुदेशकों का मानदेय

विक्रम सिंह आगे बताते है ,"9 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार द्वारा मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पीएबी(प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड) में उत्तर प्रदेश के अनुदेशकों के लिए 17 हजार प्रतिमाह मानदेय का प्रस्ताव भेजा था। जो की पीएबी द्वारा 27 मार्च 2017 को रिजेक्ट कर दिया गया।जिसके बाद 6 अप्रैल को हजारों की संख्या में अनुदेशक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलें।अनुदेशकों की दिक्कतों का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने पीएबी को दुबारा प्रस्ताव भिजवाया और सरकार के प्रयास से 14 अप्रैल 2017 को पीएबी द्वारा अनुदेशकों के लिए17 हजार मासिक मानदेय स्वीकृत कर दिया गया।

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मई में पीएबी ने जारी किये मिनट्स

विक्रम सिंह बताते हैं की 15 मई 2017 को पीएबी ने मिनट्स(आदेश) जारी कर दिया। जिसमें अनुदेशकों को 17 हजार, शिक्षामित्रों को 10 हजार और इन्टरनेट /रिसर्च शिक्षक 14 हजार 5 सौ रूपये मानदेय स्वीकृत किया गया था। जिसमे शिक्षामित्रों और इंटरनेट शिक्षकों को मानदेय बराबर सरकार द्वारा मानदेय दिया जा रहा हैं, सिर्फ अनुदेशकों को छोड़ दिया गया।

मुख्यमंत्री ,राज्यपाल से लेकर प्रधानमंत्री तक सबको पत्र लिखा

विक्रम सिंह बताते है की पिछले ढेढ़ साल में संगठन की कार्यकारिणी द्वारा 29 बार मुख्यमन्त्री से मुलाकात की गयी।हर बार मुख्यमंत्री ने कुछ बेहतर होनें का आश्वासन दिया लेकिन अधिकारीयों की हीलाहवाली के चलते आज तक कुछ नहीं हुआ।इस संदर्भ में राज्यपाल द्वारा भी राज्य सरकार को पत्र दिया गया उस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।

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अनुदेशकों के नेता ने ट्विटर पर दी आत्महत्या करने की धमकी

अनुदेशकों के दुसरे गुट उच्च प्राथमिक अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर के अध्यक्ष व् जिला प्रतापगढ़ के निवासी तेजस्वी शुक्ला ने ट्विटर पर सरकार द्वारा किये गये वादों के ट्विट का स्क्रीन शॉट के साथ ये सन्देश लिखा है, "केंद्र सरकार द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात अनुदेशको का मानदेय 17 हजार किया गया है। पर योगी सरकार की तानाशाही की वजह से अभी आदेश जारी नहीं किया गया, हमारा संगठन हर स्तर पर धरना दिया है संघर्ष किया है और योगी सरकार ने धरने पर हम सभी पर लाठी चार्ज भी कराया हैं। योगी सरकार को अनुदेशक संगठन अंतिम मौका देता हैं। यदि 17 जुलाई 2018 तक योगी सरकार सरकार 17 हजार का आदेश जारी नही करती है तो संघर्ष भी होगा और 18 जुलाई को मैं खुद आत्महत्या कर लूंगा अपने जन्म दिन के शुभ अवसर पर, जिसकी जिम्मेदार योगी सरकार होगी।

इस संदर्भ में बात करने पर अपर मुख्यसचिव शिक्षा राज प्रताप सिंह ने बताया, "मैं इस समय दिल्ली में पीएबी की मीटिंग में आया हूँ और जब तक पीएबी से कार्यवित्त पास नहीं हो जाता तब तक मानदेय मै कोई जानकारी नही दे सकता।"

वेतन सिर्फ 11 माह का तो बीएलओ की ड्यूटी अनुदेशकों को क्यों

प्रदेश के सभी अनुदेशकों की ड्यूटी जून माह में बीएलओ में लगा दी गयी है, जिसका अनुदेशक विरोध कर रहें हैं, लखनऊ के अनुदेशक मनीष कुमार का कहना हैं कि अनुदेशकों को सिर्फ 11 माह का वेतन दिया जाता है। इसलिए अनुदेशक को बीएलओ बनाने का कोई औचित्य नहीं है।बीएलओ ड्यूटी के दौरान मिलने वाले मानदेय के बारे में पूछने पर बताया की इसके पहले भी दो बार बीएलओ की ड्यूटी कर चुके हैं। अब तक उसका कोई भुगतान नहीं दिया गया है।

इस विषय पर बात करने पर खंड शिक्षा बीकेटी अधिकारी सतीश त्रिपाठी ने बताया कि सभी अनुदेशकों को सूचना दे दी गयी है। जो लोग ड्यूटी नहीं करेंगे उनकी रिपोट एसडीएम् को भेजी जाएगी और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 के तहत किसी भी कार्यवाही के लिए सम्बंधित अनुदेशक उत्तरदायी होंगे।

इस विषय पर बात करने पर बेसिक शिक्षा अधिकारी लखनऊ डॉ अमरकांत ने बताया की बीएलओ की ड्यूटी हमारे यहाँ से नहीं लगती है। जिन्होंने ड्यूटी लगाईं है, उनके पास इसके दिशा निर्देश होंगे।

एसडीएम बीकेटी सूर्यकान्त त्रिपाठी ने बताया कि निर्वाचन आयोग का काम रोका नही जा सकता। इसलिए सभी सम्बंधित विभागों से स्टाफ माँगा गया है। अनुदेशकों के लिए बीएसए और एबीएसए को पत्र लिखा है, कि इनका 27 दिन का अर्जित अवकाश या तो इन्हें आगे दे दिया जाये या फिर अवकाश के दौरान कार्य करनें का भुगतान कर दिया जाये।प्रदेश के कई जिलों में ये फार्मूला अपनाया जा रहा हैं।

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