यूपी में हर साल बर्बाद होती हैं 20 फीसदी हरी सब्जियां

Ashwani NigamAshwani Nigam   28 Jun 2017 2:24 PM GMT

यूपी में हर साल बर्बाद होती हैं 20 फीसदी हरी सब्जियांसब्जी उत्पादक किसानों की लगभग 20 प्रतिशत हरी सब्जियां हर वर्ष बर्बाद हो जाती हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खाद्यान्न उत्पादकता का लगभग चार से पांच गुना अधिक सब्जी का उत्पादन होता है, लेकिन भंडारण और विपणन जैसी उचित व्यवस्था न होने के कारण सब्जी उत्पादक किसानों की लगभग 20 प्रतिशत हरी सब्जियां हर वर्ष बर्बाद हो जाती हैं।

उत्तर प्रदेश का देश में सब्जियों के उत्पादन और क्षेत्रफल में पश्चिम बंगाल के बाद दूसरा स्थान है। एसोचैम की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोल्ड स्टोरेज की कमी और प्रदेश में निर्यात सुविधाओं के अभाव के कारण हर साल 10.30 करोड़ रुपए की बर्बादी होती है।

देवरिया जिले के केवटलियां गाँव के किसान रामजतन मौर्या कहते हैं, “इस साल लौकी, भिंडी, बैंगन की बंपर पैदावार है, लेकिन इसके बाद भी हमारी लागत नहीं निकल रही है। यह सब्जियां जल्दी खराब हो जाती हैं, जिसके कारण हमें कम दाम में बेचना पड़ रहा है।’’

ये भी पढ़ें- पूर्वांचल के किसानों को है कर्जमाफी का इंतजार

ग्रीन वेज एक्पोटर्सप प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रोशन गुप्ता ने बताया, “उत्तर प्रदेश में बड़ी मात्रा में हरी सब्जियां पैदा होती हैं, लेकिन सरकार की तरफ से सुविधा नहीं मिलने के कारण जितनी सब्जियां निर्यात होनी चाहिए, नहीं हो पा रही हैं।“

उत्तर प्रदेश में पैदा हो रही सब्जियों को देश के बड़े बाजारों के साथ विदशों में निर्यात करके प्रदेश के किसानों को लाभ कैसे पहुंचाया जाए, इसको लेकर उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें बताया गया है कि प्रदेश के कोल्ड चेन की व्यवस्था नहीं होने के कारण हरी सब्जियां जल्द ही खराब हो जाती हैं, जिस कारण किसानों को अपनी सब्जी आनन-फानन में कम दामों में बेचनी पड़ती है और किसानों को इसका घाटा उठाना पड़ता है।

उत्तर प्रदेश में इस साल रिकॉर्ड 1 करोड़ 16 लाख 78 हजार 666 मीट्रिक टन हरी सब्जियां पैदा हुई हैं, जिसमें बैंगन 2,67,189, मूली 1,45,358, कद्दू 3,60,054, परवल 53,908, अरबी 1,55,939, तोरई 3,13,598, लोबिया 22,261, बंदगोभी 2,78,831, गोभी 3,93,264, करेला 2,84,230, लौकी 3,60,054, मिर्च 23,416 और धनिया 3,870 मीट्रिक टन की पैदा हुआ है, लेकिन इसमें से 20 प्रतिशत सब्जियां बर्बाद हो गई हैं।

फलों और सब्जियों के भंडारण के लिए मल्टी चैम्बर कोल्ड स्टोरेज नहीं है। इस बारे में कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक प्रो़ राजेन्द्र कुमार ने बताया, “प्रदेश में पैदा होने वाली मुख्य सब्जियों के लिए संग्रह केन्द्रों की स्थापना, फार्म लेवल पर भण्डारण सुविधा और रेगुलेटरी मार्केट की व्यवस्था जब तक नहीं होगी, तब तक सब्जियां बर्बाद होती रहेंगी।“

ये भी पढ़ें- 70 प्रतिशत किसान परिवारों का खर्च आय से ज्यादा, कर्ज की एक बड़ी वजह यह भी, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

बाराबंकी जिले जैदपुर गांव के किसान गंगाराम ने बताया, “एक बीघा में लौकी बो रखी है, फसल भी अच्छी है, लेकिन मंडी में दाम नहीं मिल रहा है।’’ लखनऊ स्थित नवीन सब्जी मंडी दुबग्गा में सब्जियों के बड़े आढ़ती मो. शहनवाज ने बताया, “मंडी में रोजाना लाखों रुपए की सब्जियां बर्बाद होती हैं, खासकर हरी सब्जियां। सरकार इस सब्जियों के रख-रखाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर रही है।“

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स एण्ड पालिसी रिसर्च (एनएआईपी), नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक, डॉ. शिव कुमार ने कहा, “उत्तर प्रदेश में पैदा हो रही सब्जियों के संभावित मूल्य के संबंध में किसानों को जानकारी दी जाए और मुख्य सब्जियों को नेशनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग के अंतर्गत लाया जाए, तभी सब्जियों की बर्बादी रुकेगी।“उन्होंने कहा कि किसानों को अधिकतर सब्जियां खेत से लेकर मंडियों तक आने में खराब हो जाती हैं, ऐसे में इस परिवहन हानियों को रोकने के लिए शीत रेफ्रीजरेटर वाहन की व्यवस्था की जानी चाहिए।

उत्तर प्रदेश सरकार ने फल और सब्जियों की बर्बादी को रोकने लिए पिछले दिनों प्रदेश में चार मेगा फूड पार्क बनाने की घोषणा की है, लेकिन इस योजना पर भी अभी तक कोई काम नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बताया, “किसानों को सब्जियों का उचित मूल्य दिलाने के लिए पैकेजिंग, मार्केटिंग और परिवहन सुविधायें विकसित की जा रही हैं।

राज्य में जो फल और सब्जियां पैदा हो रही हैं, वे बर्बाद न हो और किसानों को उनका उचित मूल्य मिल सके इसके लिए काम किया जा रहा है।“उत्तर प्रदेश में अभी 1708 कोल्ड स्टोरेज हैं जिनमें 130 लाख मैट्रिक टन भण्डारण क्षमता है। लेकिन सब्जियों के लिए कोई कोल्ड स्टोरेज नहीं है। जिसके कारण फल और सब्जियां बर्बाद हेाती हैं।

ये भी पढ़ें- ‘एक रात मैं सोई थी, कुछ लोगों ने छत से फेंक दिया, एक हाथ कट गया लेकिन... हौसला जिंदा रहा’

देश में हर वर्ष सड़ जाती हैं एक लाख करोड़ की फल-सब्जियां

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की रिपोर्ट में बताया है कि देश में कोल्ड स्टोरेज की संख्या कम होने के कारण हर साल लगभग एक लाख करोड़ की फल-सब्जियां सड़ जाती हैं। आईसीएआर के लुधियाना स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ने यह अध्ययन किया। इस रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में भी उचित भंडारण के अभाव में बर्बाद हो रही सब्जियों के बारे भी जिक्र किया गया है।

कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक प्रो़. राजेन्द्र कुमार ने बताया कि प्रदेश में मुख्य सब्जियों के लिए संग्रह केन्द्रों की स्थापना, फार्म लेवल पर भंडारण सुविधा और रेगुलेटरी मार्केट की व्यवस्था जब तक नहीं होगी, तब तक किसानों की सब्जियां बर्बाद होती रहेंगी।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top