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यूपी के अस्पतालों में जल्द तैनात होंगे 2,065 नए डॉक्टर 

Shrinkhala PandeyShrinkhala Pandey   13 Sep 2017 5:25 PM GMT

यूपी के अस्पतालों में जल्द तैनात होंगे 2,065 नए  डॉक्टर यूपी में तैनात होगें नए डॉक्टर।

लखनऊ (भाषा)। प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने चयनित 2065 नये चिकित्सकों की सूची जारी कर दी है। जल्द ही इन्हें प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में ड्यूटी पर भेज दिया जाएगा।

सिंह ने कहा कि 2065 नए डॉक्टरों की तैनाती से सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर होगी और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसी भी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी नहीं रहने दी जाएगी। डॉक्टरों की नियुक्ति प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है ताकि अस्पतालों में बेहर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी ना रहे इसका प्रयास भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उप्र लोक सेवा आयोग से कहा गया है कि वह चिकित्सा विभाग के अनुरोध को प्राथमिकता दें तथा चिकित्सकों के लम्बित रिक्त पदों के भरने में तेजी लायें।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में लम्बे समय से 7328 चिकित्सकों के पद रिक्त थे। इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी तरह बंद थी, जिसके कारण बहुत से अस्पताल चिकित्सकों की भारी कमी हो गई।

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उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने अस्पतालों मे चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, जिसके फलस्वरुप उप्र लोक सेवा आयोग से बेहतर समन्वय स्थापित कर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने का प्रयास किया गया। आयोग ने इस प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुए चिकित्सकों की भर्ती पर विशेष ध्यान दिया। जिसके परिणाम स्वरुप 2065 नवचयनित चिकित्सकों की सूची जारी कर दी गई है।

कितने डॉक्टर हैं कम

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सात हजार डॉक्टर और 18 हजार पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। वहीं, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2015 के अनुसार, देश में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में 83 फीसदी चिकित्सा पेशेवरों और विशेषज्ञों की कमी है।

स्त्रीरोग विशेषज्ञों की कमी

देश भर के सीएचसी केंद्रों में 76 फीसदी प्रसूति और स्त्रीरोग विशेषज्ञों की कमी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में भारत का मातृ, नवजात शिशु एवं शिशु मृत्यु के मामले में खराब प्रदर्शन है।

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