तीन दिन में सुधारने होंगे गांवों के 50 हजार खराब हैंडपंप

तीन दिन में सुधारने होंगे गांवों के 50 हजार खराब हैंडपंपइस हालत में हैं सरकारी हैंडपंप

लखनऊ। तीन दिन का समय और 50 हजार हैंडपंप को दुरुस्त करने की चुनौती। गर्मी शुरू होते ही प्रदेश के गांवों में पेयजल की समस्या का ध्यान अमले को आ गया है। इसलिए कागजी फरमान भी जारी कर दिया गया है। पंचायती राज विभाग की ओर से ये फरमान पूरे प्रदेश के लिए जारी हो चुका है। मगर वास्तविकता ये है कि कुल दो लाख हैंडपंप में से 50 हजार पूरी तरह से काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में तीन दिन के भीतर किस तरह से सारे हैंडपंप ठीक किये जा सकेंगे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज चंचल कुमार तिवारी द्वारा जारी आदेश में समस्त मण्डलीय उप निदेशक पंचायत व सभी जिला पंचायतराज अधिकारी से कहा गया है कि हैण्डपम्पों में अस्थायी खराबी को दूर करने के लिए ग्राम पंचायते उत्तरदायी हैं। यह सुनिश्चित किया जाये कि हैंडपंपों में से अस्थायी खराबी की मरम्मत हैंडपंप खराब होने के तीन दिन के अन्दर करा ली जाये। यदि कोई भी हैंडपंप सात दिन से अधिक समय तक खराब रहता है तो सम्बंधित ग्राम पंचायत अधिकारी के विरूद्व दण्डात्मक कार्रवाई की जाये। कागजों में ये कहना आसान है, मगर वास्तविकता ये है कि प्रदेश में कुल दो लाख में से 50 हजार हैंडपंप खराब हैं।

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जारी आदेश के मुताबिक, प्रदेश सरकार द्वारा गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए सभी जनपदों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। जिसके लिए ग्राम स्तर पर स्थापित इण्डिया मार्का हैण्डपम्प का सुचारू रूप से क्रियाशील होना अति आवश्यक है। केन्द्रीय (14वां) वित्त आयोग एवं चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की ग्राम पंचायतों को अंतरित धनराशि को व्यय किये जाने के लिए दिशा-निर्देश दिये गये हैं। इन दिशा-निर्देशों में हैण्डपम्पों का मरम्मत कराया जाना भी शामिल है। प्रदेश में सभी ग्राम पंचायतों में उपलब्ध परिसम्पत्तियों की मरम्मत एवं रख रखाव के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है।

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प्रदेश में करीब दो लाख हैंडपंप, चौथाई खराब

ग्रामीण क्षेत्र में हैंडपंपों की स्थापना और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी जल निगम पर है। निगम से मिले आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में हैंडपंपों की संख्या लगभग दो लाख है। जिनमें से 50 हजार के लगभग खराब हो चुके हैं। एक लाख रीबोर के योग्य हैं। मात्र 50 हजार ही शत प्रतिशत चालू हालात में हैं। इसमें हैंडपंपों पर भी अवैध कब्जा होने की वजह से आम ग्रामीण इस सुविधा से वंचित है।

डेढ़ साल में नहीं लगाए गए 48000 नये हैंडपंप

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पेयजल की समस्या के त्वरित निराकरण के लिए करीब डेढ़ साल पहले घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 47,900 नए इंडिया मार्क-2 हैंडपंप स्थापित किये जाएंगे पहले से स्थापित इंडिया मार्क-2 हैंडपंपों को चालू हालत में लाने के लिए हैंडपंपों की री-बोरिंग के आदेश भी दिए गए थे।

ये सभी 95 हजार 800 नए एवं रीबोर हैंडपंप विधान सभा एवं विधान परिषद के सदस्यों की संस्तुति पर उनके ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों में स्थापित किए जाने थे। जिसके लिए प्रत्येक सदस्य को 100 नए इंडिया मार्क-2 हैंडपंप स्थापित करने के लिए संस्तुति करने का अधिकार दिया गया था, जबकि इतने ही हैंडपंपों के रीबोरिग के लिए भी प्रत्येक सदस्य संस्तुति कर सकते थे। मगर ये काम अब तक नहीं पूरा नहीं किया गया है।

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सरकारी हैंडपंपों पर रसूखदारों का कब्जा

लखनऊ में जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर डूढ़ीखेड़ा गांव में ये नजारा देखा जा सकता है, यहां के कई हैंडपंपों का इसी तरह से व्यक्तिगत इस्तेमाल लोग कर रहे हैं। गांव के 35 वर्षीय शिक्षक रत्नेश कुमार का कहना है कि हम लोगों को जब पानी की आवश्यकता पड़ती है तब हम इन हैंडपंपों का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। थाने से लेकर प्रधान तक शिकायत की जाती है मगर कोई सुनवाई नहीं होती है। राजधानी से ही करीब 35 किलोमीटर दूर माल ब्लॉक के रानीपारा गांव में भी इसी तरह का नजारा देखने को मिलता है। यहां भी हैंडपंप का इस्तेमाल ट्यूबवेल की तरह हो रहा है।

खराब हैंडपंप तीन दिन में ठीक करने के लिए निर्देश जारी कर दिये गये हैं। पर्याप्त धन पंचायतों के पास उपलब्ध है। इस काम में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चंचल कुमार तिवारी, अपर मुख्य सचिव, पंचायती राज विभाग

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