गाँव की सड़कों पर दौड़ कर हासिल किया मुकाम

Akash SinghAkash Singh   6 Nov 2017 2:54 PM GMT

गाँव की सड़कों पर दौड़ कर हासिल किया मुकामप्रमाण पत्र दिखाती शिवांकी  

स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

बाराबंकी। शिवांकी दौड़ने की शौकीन थी और गाँव की सड़कों पर ही अभ्यास करती थी। अपनी मेहनत, लगन और मजबूत इरादों की बदौलत आज शिवांगी राष्ट्रीय स्तर पर दौड़ प्रतियोगिता की तैयारी कर रही है।

बाराबंकी के हैदरगढ़ तहसील की पेचरुआ गाँव की रहने वाली 15 साल की शिवांकी ने सिर्फ सात वर्ष की उम्र से ही अपने सपनों की दौड़ शुरू कर दी। हैदरगढ़ के ही सार्वजनिक इण्टर कॉलेज में कक्षा 10 की छात्रा शिवांकी ने ने डिस्ट्रिक्ट लेवल से लेकर स्टेट लेवल तक की दौड़ को पारकर एक नया मुकाम हासिल किया है।

शिवांकी अपनी प्रैक्टिस गाँव की सड़कों पर ही करती है क्योंकि हैदरगढ़ तहसील क्षेत्र में कोई बड़ा खेल मैदान नहीं है, जहाँ वो दौड़ सके। और कई बार जब सड़क पर कोई गाड़ी य ट्रैक्टर वगेराह आ जाता है तो उसे अपनी दौड़ बीच मे ही रोक कर सड़क के किनारे खड़े हो जाना पड़ता है, जब तक कि वो गाड़ी निकल नही जाती।

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शिवांकी बताती हैं, “मैं जब कक्षा सात में थी तभी से मैंने दौड़ना शुरू किया और तबसे मैं आज तक रोजाना दौड़ का अभ्यास करती हूं।” वह आगे बताती हैं, “मैं कॉलेज में अक्सर लंच टाइम में ग्राउंड में खेला करती थी, तभी हमारे कॉलेज में एक बार दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, वहाँ पर मेरा प्रदर्शन सभी को पसंद आया। फिर मेरे टीचर्स द्वारा मुझे ब्लॉक लेवल फिर डिस्ट्रिक्ट, स्टेट तक भेजा, जिसमें मेरा प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। इन सब में मेरे कॉलेज के टीचर्स ने मेरा बहुत सहयोग किया।”

शिवांकी बताती हैं, “डिस्ट्रिक्ट लेवल पार करने के बाद जब मैं मण्डल लेवल पर खेलने गई तो मेरी टाइमिंग और रेस कुछ भी अच्छी नहीं हुई, जिसकी वजह से मैं डिसक्वालिफाई हो गई, लेकिन सबने मुझे सपोर्ट किया और मैंने फिर से तयारी की और दुबारा मण्डल तक पहुँची और इस बार मेरा सेलेक्शन हो गया।जिसके बाद मैंने स्टेट लेवल पर किया और अब नेशनल लेवल की बारी है।”

शिवांकी के पिता चक्रपाण्ड धर अवस्थी बताते हैं, “पहली बार जब मेरी बेटी डिस्ट्रिक्ट लेवल पर दौड़ने के लिए गई तो मुझे लगा कि बिटिया अभी छोटी है ऐसा करना गलत रहेगा लेकिन जब उसने डिस्ट्रिक्ट लेवल पर अपनी जीत दर्ज की तो मुझे बहुत गर्व महसूस हुआ और तबसे मैं भी उसका आत्मविस्वास बढ़ाने लगा। अब तो उसने स्टेट लेवल भी क्वालीफाई कर लिया है।” शिवांकी के पिता जी बताते हैं, “मेरी बेटी ने आज तक मुझसे किसी भी चीज की माँग नही की, न ही कभी शूज के लिए किट के लिए मुझसे कहा। यहाँ तक कि वो बिना जूतों के भी दौड़ जाती थी।”

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स्पाइक्स न होने की वजह से कर दिया था दौड़ने से मना

शिवांकी बताती हैं, “पिछली बार जब मेरा स्टेट लेवल के लिए सेलेक्शन हुआ था तब वहाँ के कोच ने मेरे पास स्पाइक्स न होने की वजह से मुझे दौड़ने से मना कर दिया था। तब मेरे टीचर ने उनसे बहुत रिक्वेस्ट की तब उन्होंने कहीं से स्पाइक्स अरेंज कर के मुझे दिए और तब जाकर मैंने अपनी रेस पूरी की।”

समाज के लोग क्या कहते हैं, इससे कोई फर्क नही पड़ता

शिवांकी के पिता चक्रपाण्ड धर अवस्थी बताते हैं, “हम जहाँ रहते हैं, यहाँ के लोग बहुत अच्छे हैं और सभी ने हमारा सहयोग किया और बाकी समाज में जो लोग जो भी कहते हैं, उससे हमको कोई समस्या नहीं है, हमारी बिटिया जो भी कर रही है, उसमें हमारा पूरा सहयोग रहेगा।”

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