मुख्यमंत्री से मिलने गोरखनाथ मंदिर पहुचें अनुदेशक गिरफ्तार

गोरखपुर के नगरनिगम पार्क में शांतिपूर्वक धरना कर रहे अनुदेशकों को एडीएम सिटी गोरखपुर ने सुबह मुख्यमंत्री से मिलने के लिए बुलाया जहां मुख्यमंत्री से मिलाने के बजाय अनुदेशकों को गिरफ्तार कर लिया गया ।

मुख्यमंत्री से मिलने गोरखनाथ मंदिर पहुचें  अनुदेशक गिरफ्तार

लखनऊ। पिछले 15 महीने से बढ़े हुए मानदेय को लागू करवाने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश के अनुदेशक अब तक कई बार धरना प्रदर्शन कर चुकें है।लेकिन पिछले 15 महीनों से लगातार संघर्ष करनें के बावजूद अनुदेशकों को अब तक सरकार की तरफ से सिर्फ आश्वासन मिलें हैं।सरकार के वादा न पुरे करने से नाराज अनुदेशक एक बार फिर गोरखपुर में धरना प्रदर्शन पर बैठ गये हैं।

गोरखपुर के नगर निगम पार्क में चल रहा हैं धरना प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के नगर निगम पार्क में धरनें पर बैठे परिषदीय अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने बताया कि पिछले साल मानव संसाधन विकास मंत्रालय दिल्ली की पीएबी की बैठक में अनुदेशकों का मानदेय 17 हजार रूपये पास की गया था। साथ ही शिक्षामित्रों के लिए 10 हजार रूपये मासिक मानदेय तय किया गया था।बैठक के बाद शिक्षामित्रों और शिक्षा क्षेत्र के अन्य संविदाकर्मियों को बैठक में पास मानदेय दिया गया लेकिन अनुदेशकों को मानदेय नहीं दिया।

विक्रम आगे बताते हैं कि अनुदेशकों के मानदेय के लिए केंद्र सरकार द्वारा दो किश्तों में अनुदेशकों के मानदेय भुगतान के पैसा भेजा भी गया लेकिन इसके बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारीयों की उदासीनता के चलते 15 महीने से अनुदेशकों को बढ़े हुए मानदेय का भुगतान नहीं किया गया जिसके चलते अनुदेशक दर–बदर भटकनें के लिए मजबूर हैं।

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एक अधिकारी का दंभ पड़ा अनुदेशकों पर भारी

परिषदीय अनुदेशक संघ(सयुक्त मोर्चा) के नेता तेजस्वी शुक्ला ने गाँव कनेक्शन को फोन पर बताया ,"एक अधिकारी का दंभ 31 हजार अनुदेशकों पर ही नहीं बल्कि सरकार के प्रयासों पर भी भारी पड़ा हैं।

तेजस्वी बताते हैं कि अखिलेश सरकार में अनुदेशकों का मानदेय 7 हजार से 84 सौ रूपये किया गया था जो की प्रस्ताव पास होने के अगले महीनें से मिलना शुरू हो गया था और 17 हजार मासिक मानदेय का प्रस्ताव भी अखिलेश सरकार में ही दिया गया था।लेकिन सपा सरकार का प्रोजेक्ट होनें के चलते सही पैरवी न होने के कारण पीएबी में यह प्रस्ताव पास नहीं हो पाया। उसके बाद चंदौली से सांसद और वर्तमान भाजपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय के पैरवी करने पर पीएबी द्वारा अनुदेशकों के लिए 17 हजार मासिक मानदेय का प्रस्ताव पास कर दिया गया। लेकिन उत्तर प्रदेश के अपर मुख्यसचिव राजप्रताप सिंह के उदासीन रवैये के चलते प्रदेश के 31हजार अनुदेशक आज तक अपने हक से वंचित हैं।

बेसिक शिक्षा परियोजना निदेशक वेदपति मिश्रा ने बताया,"पिछले साल पीएबी की बैठक में अनुदेशकों के लिए 17 हजार रूपये मानदेय स्वीकृत किया गया था। इस वेतन में केंद्र और राज्य सरकार का 60:40 का अनुपात होता है।केंद्र सरकार के हिस्से का अंशदान न मिल पाने की वजह से अनुदेशकों को बढ़े हुए मानदेय का लाभ नहीं दिया जा सका।

संवाददाता द्वारा ये पूछने पर की वित्तीय वर्ष 2018-19 में अनुदेशकों ,शिक्षामित्र और कंप्यूटर शिक्षक के लिए कितने मानदेय का प्रस्ताव पीएबी भेजा गया हैं।इस पर परियोजना निदेशक ने बताया की अभी पीएबी की अप्रूवल रिपोर्ट देखी नहीं है इसलिए कुछ बता पाना संभव नहीं हैं।

इस विषय पर बात करनें के लिए कई बार अपर मुख्य सचिव शिक्षा राज प्रताप सिंह के मोबाइल नम्बर और लैंडलाइन नंबर पर फोन किया गया लेकिन कोई रिप्लाई नही मिला।

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एडीएम सिटी के बुलावे पर योगी से मिलनें पहुचे अनुदेशकों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

अनुदेशक नेता अभिषेक गुप्ता ने बताया कि धरना प्रदर्शन स्थल पर एडीएम सिटी आये थे और प्रदर्शन का नेत्तव कर रहें प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह को सूचना दी कि कल सुबह मुख्यमंत्री ने मिलने के लिए बुलाया है। जिस पर आज सुबह अध्यक्ष विक्रम सिंह व् कुछ अन्य साथी गोरखनाथ मंदिर योगी से मिलने गये थे लेकिन 12 बजे तक मुख्यमंत्री से मुलाक़ात नहीं हो पायी।

गोरखनाथ मंदिर प्रशाशन ने अनुदेशकों को बताया कि मुख्यमंत्री लखनऊ निकल रहें हैं। आज मुलाकात नहीं होगी जिस पर प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने चलते -चलते सिर्फ दो मिनट बात करनें का समय माँगा पर स्थानीय प्रशाशन द्वारा अनुदेशकों को मुख्यमंत्री से मिलाने से इनकार कर दिया गया ।जिस पर अनुदेशकों ने परिसर में नारेबाजी की और पुलिस द्वारा अध्यक्ष विक्रम सिंह सहित कई अन्य अनुदेशकों को गिरफ्तार करके पुलिस लाइन भेज दिया हैं।

एसपी सिटी गोरखपुर विनय कुमार सिंह ने बताया कि अनुदेशक गोरखनाथ मंदिर में नारेबाजी और हंगामा कर रहें थे जिसके चलते पुलिस द्वारा चार -पांच लोगों को गिरफ्तार करके पुलिस लाइन भेज दिया गया है,गिरफ्तार लोगों के नाम मुझे पता नहीं हैं। उन्हें एक- दो घंटे में छोड़ दिया जायेगा।

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