‘मीना मंच के 10 बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाएगा प्रशासन’

Neetu SinghNeetu Singh   14 Nov 2017 11:23 PM GMT

‘मीना मंच के 10 बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाएगा प्रशासन’श्रावस्ती के कस्तूरबा बालिका विद्यालय हरिहरपुरानी में बाल दिवस में कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद रहे बच्चे।

भिनगा (श्रावस्ती)। बाल दिवस के मौके पर तीन ब्लॉक से मीना मंच के सक्रिय 20 बच्चों ने प्रेस कांफ्रेंस में बाल विवाह, बाल श्रम को लेकर अपना अनुभव साझा किया। इन बच्चों के अनुभव को सुनकर जिलाधिकारी दीपक मीणा ने इनकी उच्च शिक्षा के लिए 10 बच्चों को छात्रवृति देने की घोषणा की।

बच्चों के हक के लिए काम करने वाली विश्वस्तरीय संस्था यूनिसेफ और गाँव कनेक्शन के साझा प्रयास से बाल दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के छह जिलों में हो रहे अलग-अलग कार्यक्रमों में से श्रावस्ती जिले के एक कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने यह घोषणा की।

हमें मीना की बातें बहुत अच्छी लगती थीं

"जब स्कूल में हमने मीना मंच कार्यक्रम सुनना शुरू किया, उसमें हमें मीना की बातें बहुत अच्छी लगती थी, मीना उन बच्चों को स्कूल लाने का काम करती थी, जो स्कूल नहीं जाते थे, जिनके मम्मी-पापा जल्दी शादी करने की सोचते थे, उनकी शादी रुकवाती थी, यही देखकर मैंने अपनी भी सहेली की शादी रुकवाई।" ये कहना है आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली सलमा (13 वर्ष) का।

सलमा जैसी कई छात्राओं ने रोका बाल विवाह

सलमा उच्च प्राथमिक विद्यालय कुन्ननपुर, भिनगा में पढ़ती है और मीना प्रेरक हैं। सलमा इस विद्यालय की पहली छात्रा नहीं है, जिसने अपनी दोस्त का बाल विवाह रोका हो, बल्कि सलमा के साथ की कई छात्राओं ने अपने आस-पास हो रहे बाल विवाह को रोका है।

डीएम ने कहा, अन्य बच्चों के लिए प्रेरणाश्रोत ये बच्चे

बाल दिवस पर कार्यक्रम के दौरान मीना मंच के बच्चों के अनुभव सुनते श्रावस्ती के जिलाधिकारी दीपक मीणा।

बच्चों की प्रेस कांफ्रेंस में पहुंचे जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कहा, "बच्चों के अनुभव सुनकर मैं बहुत खुश हूँ, निश्चित तौर पर ये बच्चे पूरे जिले के लिए रोल मॉडल हैं, ये बच्चे जब तक पढ़ाई करना चाहे करें, प्रशासन इन्हें छात्रवृति देगा, जिससे इनकी पढ़ाई किसी भी तरह से बाधित न हो।" उन्होंने आगे कहा, "इन स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए जो भी संसाधन का अभाव होगा, उसे हम पूरा करेंगे, जिससे ये बेहतर तरीके से पढ़ाई कर पायें। इतनी कम उम्र में इन्होंने बाल विवाह रोका, मजदूरी करने वाले बच्चों को स्कूल लाने का काम किया, ये जिले के अन्य बच्चों के लिए प्रेरणाश्रोत हैं।"

उसने कहा, अभी शादी नहीं करना चाहती

मीना मंच की सदस्या सलमा।

सलमा ने बताया, "हमारी सहेली जिसकी उम्र 13 साल की थी, उसकी शादी की बात चल रही थी, इस बात से वो परेशान रहने लगी थी, जब मैंने उससे पूछा तो उसने मुझे बताया कि वो शादी नहीं करना चाहती है, वो पढ़ना चाहती है, हमने उसके घरवालों से बात करके उसकी शादी रुकवाई, अभी वो पढ़ाई कर रही है।"

50 रुपए की मजदूरी करने जाती थी

प्रेस कांफ्रेंस में कस्तूरबा बालिका विद्यालय हरिहरपुरानी में पढ़ने वाली आठवीं की छात्रा शुभि पाण्डेय ने कहा, "मेरी एक सहेली 50 रुपए की मजदूरी करने जाती थी, उसकी मम्मी उसे स्कूल नहीं भेजती थी, उसकी मम्मी को हमने उसे स्कूल भेजने के लिए बहुत समझाया, आज वो 9वीं कक्षा में पढ़ रही है।" सलमा और शुभि की तरह प्रेस कांफ्रेंस में कई छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए, जिसे जिलाधिकारी से लेकर वहाँ मौजूद सभी अधिकारियों ने बहुत सराहा।

जो काम अधिकारियों के, वे ये बच्चे कर रहे हैं

कार्यक्रम में बच्चों को संबोधित करते प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार।

प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार ने कहा, "जो काम हम अधिकारियों को करना चाहिए, वो काम ये बच्चे कर रहे हैं, हमें इनसे सीख लेने की जरूरत है, आज इनका अनुभव सुनकर मुझे लग रहा है कि अगर हम लोग भी इन बच्चों की तरह सक्रिय हो जाएं तो बदलाव बहुत जल्दी सम्भव है।"

'सलमा के लिए इससे बड़ा कोई तोहफा नहीं हो सकता'

उच्च प्राथमिक विद्यालय कुन्ननपुर की प्रधानाध्यापिका सुधा वाल्मीकि उस समय बहुत खुश हुई, जब जिलाधिकारी महोदय ने सलमा को स्कॉलरशिप देने की बात कही। उन्होंने कहा, "सलमा हमारे स्कूल की बहुत ही होशियार बच्ची है, पर गरीब घर से थी, मुझे लगता था पता नहीं इसकी आगे की पढ़ाई कैसे होगी, पर आज सर ने स्कॉलरशिप देकर इसकी पढ़ाई को पूरा होने आश्वाशन दिया, बाल दिवस के मौके पर इससे बड़ा कोई तोहफा नहीं हो सकता है।"

कार्यक्रम में कई अधिकारी रहे मौजूद

प्रेस कांफ्रेंस में बच्चे, शिक्षक, जिलाधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्यवक महेंद्र सिंह, अजीत उपाध्याय, यूनीसेफ और देहात संस्था की तरफ से शिल्पी सिंह, ओमकार यादव, शिव प्रसाद, दीक्षा दुबे आदि मौजूद रहे। इस प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन मुस्कान परियोजना समन्यवक शिल्पी सिंह ने किया।

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बाल दिवस पर तस्वीरों में देखें श्रावस्ती की छात्राओं का हुनर

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