मायावती के दौरे के बाद सहारनपुर में फिर भड़की हिंसा

मायावती के दौरे के बाद सहारनपुर में फिर भड़की हिंसासहारनपुर में दंगे की तस्वीर (फाइल)।

गाँव कनेक्शन नेटवर्क

लखनऊ/सहारनपुर। बसपा सुप्रीमो मायावती के दौरे के बाद मंगलवार को सहारनपुर में एक बार फिर जातीय हिंसा शुरू हो गई। मायावती के जाते ही सहारनपुर में वर्ग विशेष के लोगों ने फायरिंग कर लोगों को दहशत में ला दिया है। जवाब में दूसरे वर्ग ने तलवारें निकाल कर लोगों पर हमला कर दिया। मायावती ने कहा कि सहारनपुर विवाद पक्षपात के चलते हुआ।

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पिछले कई दिनों से राजपूतों और दलितों के बीच हो रहे संघर्ष के कारण सुलगता सहारनपुर मंगलवार को एक बार फिर हिंसाग्रस्त हो गया। ताजा हिंसा में पांच लोगों को तलवार से हमला कर के घायल कर दिया गया है, जबकि एक व्यक्ति को गोली लगी है, जिससे माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया है। शब्बीरपुर गाँव के देशी (55 वर्ष) ने बताया कि बसपा प्रमुख मायावती के जाने के बाद यह दोनों समुदायों के बीच हमला हुआ।सहारनपुर के साथ ही आसपास के जिलों के अधिकांश थाना की फोर्स के साथ ही पीएसी को भी बुलाया गया है। वहीं, मेरठ से एडीजी आनंद कुमार शब्बीरपुर के लिए रवाना हुए।

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जातीय संघर्ष में 25 घरों को जला दिया गया था।

बता दें कि बसपा सुप्रीमो मायावती हिंसा से पीड़ित गाँव शब्बीरपुर पहुंची थी। मायावती के दौरे से पहले ही कुछ अज्ञात दलितों ने राजपूतों के घरों पर पत्थरबाजी और आगजनी की। जिसके बाद मायावती के जाने के बाद राजपूतों ने तलवारें निकाल लीं और शब्बीरपुर के नजदीक दूसरे गाँव चंद्रपुरा में पांच लोगों पर तलवारों से हमला कर के घायल कर दिया। वहीं एक व्यक्ति को गोली मार दी। घायलों में से दो की हालत गंभीर बनी हुई है।

सहारनपुर की घटना पक्षपात का नतीजा : मायावती

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने कहा कि सहारनपुर में हुई घटना दर्दनाक है। यह घटना पक्षपात की वजह से हुई है। मायावती दिल्ली से सड़क मार्ग से सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव पहुंचीं, लेकिन पहुंचने में निर्धारित समय से ढाई घंटे विलंब हो गया। बसपा अध्यक्ष के पहुंचते ही वहां पर उपस्थित भीड़ पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगी। मायावती की मौजूदगी में दलितों ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसी के बीच मायावती ने शब्बीरपुर में जले हुए घरों को देखा। इन घरों को राजपूतों ने जलाया था और दलितों की पिटाई की थी।

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