करोड़ों भारतीयों के लिए आज़मगढ़ की विभा मिसाल हैं, शबाना आज़मी भी हैं इनकी कायल 

करोड़ों भारतीयों के लिए आज़मगढ़ की विभा मिसाल हैं, शबाना आज़मी भी हैं इनकी कायल विभा गोयल 

लखनऊ। विभा गोयल दोनों आँखों से देख नहीं सकती है। एम.ए. की पढ़ाई जैसे तैसे पूरी करने के बाद विभा गोयल ने सन 1999 में न्यू कला केंद्र समिति नाम से एक संस्था बनायी। जिसमें विभा आज आज़मगढ़ की महिलाओं को सिलाई, बुनाई, कढ़ाई, डांस, साथ ही शहर में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करवाती है।

विभा जब 9 साल की थी तो विभा के नाना ने उससे एक दिन घड़ी देखने को कहा, नाना उस बच्ची से समय पूछ रहे थे। लेकिन वो 9 साल की छोटी बच्ची घड़ी देख कर रोने लगी। दरअसल नाना समझ नहीं पाए थे, कि उनकी बिटिया अब बीमार हो चुकी है। उसे एक ऐसी बीमारी ने जकड़ लिया था जिससे अब वो कभी जिंदगी में देख नहीं सकती। उस बिमारी का नाम रेटिनाइटिस पिग्मेंट टोसा है।

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विभा बताती है कि मुझे और मेरी बड़ी बहन दोनों को ये बीमारी बचपन से थी। लेकिन बचपन में परिवार वालों ने इसे आँख की कमजोरी समझ के कई आँख के अस्पतालों में हमारा चेकअप कराया लेकिन डॉक्टर चश्मा लगाने की राय देकर कुछ दवाईयां दे देते। विभा बताती हैं कि हमने अपने इलाज के लिए पूरे भारत के चक्कर काटे, लखनऊ, दिल्ली, बनारस, मुम्बई, इंदौर, चेन्नई, मुम्बई यहां तक कि विदेशों में भी हमारी बिमारी को लेकर बात हुयी। लेकिन बाद में पता चला कि हमें एक ऐसी बीमारी है जिसके कारण हम पूरी जिंदगी कुछ देख ही नहीं सकते। डॉक्टर ने बताया कि इस बीमारी में आप की उम्र जितनी बढ़ती जायेगी आप उतना ही कम आँखों से देख पायेंगी। ये सुनकर, जानकर हमें बहुत दुख हुआ लेकिन फिर कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे कब तक बैठोगी। कुछ करो, कब तक ख़ाली बैठोगी।

बीस साल की उम्र में दिखना ही बंद हो गया

जब मै और मेरी बहन 20 साल के हो गए तो हम दोनों को बिलकुल भी आँख से दिखना बंद हो गया। इसी कारण मेरी बड़ी बहन का डाइवोर्स भी हो गया जो आज हमारे साथ ही रहती है। फिर हमने भी खुद को तैयार किया, शुरुवात में समझ ही नहीं आ रहा था कि हम क्या करें, कहाँ जाएं। फिर धीरे धीरे कुछ लोगों ने हमें सपोर्ट किया ।

कलाकृतियों को बनाती विभा गोयल

फिल्म स्टार शबाना आज़मी भी विभा की कायल हो गयी

शबाना आज़मी के साथ विभा गोयल

संस्था शुरू करते ही विभा ने कई कीर्तिमान रच डाले। बड़ी बात उनके लिए उस समय थी जब फिल्म स्टार शबाना आज़मी भी उनकी प्रतिभा की कायल हो गयी और उन्हें अपने एन.जी.ओ. का एक बड़ा काम भी सौंप दिया। विभा के केंद्र में हर साल सैकड़ों महिलायें, बच्चे, लड़के , लडकियां अलग अलग कलाओं को सीखने आते है। विभा को भगवान ने या यू कहें तो विभा ने खुद अपनी कमजोरी को अपना सबसे बड़ा हथियार बना कर खुद को सभी कलाओं में पारंगत किया। आज विभा लगभग 20 से ज्यादा कलाओं में निपुढ़ है जिसका लोहा आज़मगढ़ शहर के लोग भी मान चुके है। विभा ने सन 1999 में अपने सेंटर की शुरुवात की। आज विभा के सेंटर में तकरीबन 2 से 3 हजार छात्र हाथ से बनी चीजों की ट्रेनिंग ले चुके है। फिर उसमें चाहे साड़ी डिजाइनिंग हो, कढ़ाई हो या इसके अलावा म्यूजिक या डांस की ट्रेनिंग देना शामिल है।

शबाना आज़मी के साथ एक कार्यक्रम में विभा गोयल

विभा जब बनी जिले की इलेक्शन अम्बेस्डर

पिछले विधानसभा चुनाव में विभा को आज़मगढ़ का इलेक्शन अम्बेस्डर (District Election Ambassador) भी बनाया गया। 2017 विधान सभा चुनाव में आज़मगढ़ डीएम ने विभा को पूरे जिले का ब्रांड एम्बेसडर बनाया। आज आज़मगढ़ जिले में अगर कहीं भी कोई कार्यक्रम होता है तो वहां विभा की उपस्थिति आयोजकों की पहली पसंद होती है।

विभा जब मिली शबाना आज़मी से

विभा से जब हमने पुछा कि आप शबाना आज़मी से कैसे मिली, तो इसका जवाब विभा हंस के देती है और बताती हैं कि इसके पीछे एक बड़ी घटना है। "विभा बताती है कि मेरे सेंटर की एक स्टूडेंट शबाना आज़मी जी के एन.जी.ओ. में काम करती थी। मेज़वा वेलफेयर सोसाइटी के नाम से उनका एन.जी.ओ. है जो फूलपुर में है। वहां भी कुछ ऐसा ही काम होता है। तो वहां एक ट्रेनर की वेकैंसी खाली थी। तो शबाना जी को मेरे सेंटर की लड़की ने मेरे बारे में बताया। मुझे शबाना जी ने इंटरव्यू के लिए बुलाया। जिस दिन हमारा इंटरव्यू था, उस दिन शबाना जी के यहां बहुत सी महिकाएँ इंटरव्यू के लिए आई थी। सबको नंबर से बुलाया गया। जब मेरा नंबर आया तो शबाना जी ने पुछा कि आपकी तो आँख से कुछ दिखता ही नहीं, आप कैसे काम करेंगी? तो मैंने उनको जवाब भी दिया कि, आप मेरा काम देख लीजिए। अगर पसंद आये तो ठीक वरना कोई बात नहीं। तो शबाना जी ने एक साड़ी मेरे सामने फेंकी और बोली इसमें कौन सा काम हुआ है। तो मैंने हाथ से छू कर उनको बताया क़ि ये दरदोजी का काम है। साड़ी में ये मटीरियल इस्तेमाल हुआ है। ये सुनकर शबाना जी उठ खड़ी हुई और बोली कि आप ही हमारा पूरा काम देखोगी। इसके बाद वो मुझे गेट तक छोड़ने भी आईं।"

शबाना आज़मी के साथ विभा गोयल

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विभा आज 41 साल की हो चुकी है। और अपने घर 121, गुरु टोला आज़मगढ़ में सेंटर चलाती है। विभा की ख़ास बात ये है कि वो अपने काम और अपनी शख्शियत पर बहुत भरोसा करती है। मतलब आप अगर उनके सामने बैठ कर उनसे बात करेंगें तो आप को कहीं से भी नहीं लगेगा कि वो दोनों आँखों से देख नहीं सकती है, विभा का यही कॉन्फिडेंस उनको आज़मगढ़ में ख्याति दे रहा है। विभा के बारे में आज़मगढ़ के किसी बड़े व्यापारी, डॉक्टर, सरकारी अफसर यहां तक कि दुसरे शहर में ट्रांसफर होकर गए अफसर से भी पूछेंगें तो वो भी विभा के बारे में आपको बताएगा, लोग विभा को भूल नहीं पाते।

विभा गोयल द्वारा बनायी गयी कलाकृतियाँ

विभा से जब मैंने उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में पूछा तो उन्होंने बहुत बेबाकी से जवाब दिया, कि शादी के बारे में एक बार सोचा था लेकिन मैंने लड़के वालों से साफ़ बता दिया कि मैं एक लायबिलिटी हूँ। अगर आप इसे ले सके तो ही मैं शादी करूंगी। हालांकि बाद में मेरा शादी से मन भी हट गया। जहां तक समाज की बात है तो मै अब बहुत खुश हूँ। पूरा आज़मगढ़ आज मेरी एक आवाज पर मेरे साथ खड़ा हो जाता है। विभा हँसते हुए कहती है कि मैं बहुत खुश नसीब हूँ कि मुझे हमेशा बहुत अच्छे लोग मिले है। मै आज़मगढ़ की बहुत शुक्रगुजार हूँ, जिसने मुझे इतना सब कुछ दिया है। आखिर में विभा एक लाइन बोलती हैं कि "मुश्किलें कितनी भी आएं, आप हारिये नहीं। ये मुश्किलें ही आपकी जीत का रास्ता तय करती है।"

विभा गोयल द्वारा बनायी गयी कलाकृतियाँ

अबू सलेम, हकीम तारिक, अबू बशर, साजिद, आतिफ ऐसे न जाने कितने नाम है जिनकी वजह से हमेशा आजमगढ़ सुर्ख़ियों में रहा। लेकिन कभी किसी ने इन सबका नाम इज्जत से नहीं लिया। हर किसी ने इनको आतंकी या देश द्रोही कहा, जिसकी वजह से हमेशा आजमगढ़ का सर शर्म से झुकता रहा। लेकिन कोई ऐसा भी आज आज़मगढ़ में है जो चुप चाप कुछ अच्छा और बेहतर किये जा रहा है। और शायद अब ये कहना भी गलत नहीं होगा कि उस लड़की ने पूरे आज़मगढ़ को एक नई रोशनी दिखाई है जो खुद दोनों आँखों से नहीं देख सकती।

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