कन्नौज में बढ़ रही है बंगाली बंडे की खेती, औसतन एक बंडे का वजन करीब ढाई किलो

कन्नौज में बढ़ रही है बंगाली बंडे की खेती, औसतन एक बंडे का वजन करीब ढाई किलोडीएचओ मनोज कुमार को बंगाली बंडा दिखाता किसान रामसनेही।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कन्नौज। किसान ने बंगाली बंडा (बड़ी अरबी) की खेती में इस बार बंपर पैदावार की है। 40 सेमी लंबाई वाले बंडे का वजन करीब ढाई किलो है। जिला मुख्यालय कन्नौज से करीब पांच किलोमीटर दूर सदर ब्लाक क्षेत्र के बगिया निवासी किसान रामसनेही राजपूत (55वर्ष) बताते, ‘‘मैं तीन साल से बंडा की खेती कर रहा हूं। इस बार बड़े साइज का बंडा निकल रहा है। अभी तक की खोदाई में 40 सेमी लंबाई और ढाई किलो वजन का बंडा निकला है। इससे भी बड़ा बंडा होने की संभावना है।’’

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रामसनेही आगे बताते हैं, ‘‘फैजाबाद जिले से बीज लाया था। पहले खेती में करीब एक किलो का ही बंडा निकलता था। लंबाई भी कम होती थी। उस दौरान तीन बीघा में 100 क्विंटल बंडा निकला था। इस बार तीन बीघा में 150 से 170 क्विंटल उत्पादन होने की उम्मीद है।’’

‘‘छह महीने की फसल होती है। करीब 25-30 हजार रुपए लागत आई है। लागत निकालकर एक लाख का फायदा होगा। बाजार में थोक रेट 80-100 रुपए पसेरी सब्जी (बंडा) बिक रहा है।’’ किसान रामसनेही यह कहते हुए बताते हैं कि गोबर की खाद और पानी से फसल बेहतर हुई है। साथ ही हल्की फर्टीलाइजर प्रयोग की है। डीएपी नहीं डालते हैं, इससे सब्जी सड़ने की संभावना भी रहती है।

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डीएचओ मनोज कुमार बताते है कि किसानों को सलाह दी जाती है कि आलू के अलावा औद्यानिक फसलें करें। हर आदमी आलू की खेती करता है। घुइंया और बंगाली बंडा की खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारें। किसान मेरे पास आया था। बड़ी घुइंया दिखाई। रामसनेही को इससे फायदा हुआ है। दूसरे किसान भी इनसे सीख लें।

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