संवादहीनता और लापरवाही से सुलगा बीएचयू, कमिश्नर ने पीएमओ और सीएमओ को भेजी रिपोर्ट

संवादहीनता और लापरवाही से सुलगा बीएचयू, कमिश्नर ने पीएमओ और सीएमओ को भेजी रिपोर्टलाठीचार्ज के बाद का दृश्य।

वाराणसी। बीएचयू में छात्रा से छेड़खानी के बाद विरोध-प्रदर्शन, पथराव, लाठीचार्ज, और आगजनी के मामले की जांच के बाद कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने प्रधानमंत्री कार्यालय पीएमओ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रारंभिक रिपोर्ट भेज दी। रिपोर्ट में विवि प्रबंधन की ओर से बरती गयी संवादहीनता और लापरवाही को बड़ी वजह बताया गया है। साथ ही जिला प्रशासन ने भी छात्राओं के आंदोलन की अनदेखी की।

रिपोर्ट में कमिश्नर ने कहा है कि बीएचयू प्रशासन ने अगर धरने के पहले दिन ही छात्र-छात्राओं से बातचीत की गयी होती तो परिसर में उपद्रव के हालात नहीं बनते। संवादहीनता से छात्राओं में नाराजगी बढ़ी, जो आंदोलन का रूप ले लिया।

ये भी पढ़ें-बीएचयू में लाठीचार्ज पर पहली बड़ी कार्रवाई, हटाए गए लंका के एसओ और भेलूपुर के सीओ और एसीएम

यह भी बताया गया है कि कानून व्यवस्था ठीक होने और धरना शांतिपूर्ण होने का दावा करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पूरे मामले से दूरी बनाए रखी। जिला प्रशासन ने भी यदि शुरुआत में ही बीएचयू प्रशासन से वार्ता कर हल निकालने की कोशिश की होती तो छात्राओं की सुरक्षा की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन उग्र नहीं होता। रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे कमिश्नर बीएचयू पहुंचे थे। शाम पांच बजे तक उन्होंने बीएचयू प्रशासन, जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों के अलावा कैंपस में मौजूद कुछ छात्र-छात्राओं से भी बातचीत की थी।

गौरतलब है कि शनिवार रात परिसर में पथराव, लाठीचार्ज और आगजनी के मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने रविवार को प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। इसी मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज की घटना की जांच कराने का निर्देश कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण को दिया था।

बीएचयू को विशाखा पैटर्न अपनाने का आदेश

छात्राओं के विरोध-प्रदर्शन और हिंसक घटना के बाद जिलाधिकारी ने प्रकरण में सीधा हस्तक्षेप किया है। उन्होंने विवि के रजिस्टार को पत्र भेजा है, जिसमें सुरक्षा के मानकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशाखा विवि को दी गयी गाइड लाइन का हवाला देते हुए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिये हैं। खास यह कि सुरक्षा के लिए बनी समिति में छात्राओं का प्रतिनिधि भी रहेगा और परिसर में सीसी टीवी का जाल बिछेगा। पीएमओ से लेकर सीएम तक मामले पर नजर रखे हैं, जिससे इसका स्थायी समाधान निकलने की उम्मीद है।

ये भी पढ़ें-बीएचयू की कहानी 4 लड़कियों की जुबानी... ‘हां हम हर वक्त छेड़खानी की दहशत में जीते हैं’

तत्काल कार्यवाही की अपेक्षा

डीएम ने रजिस्टार को भेजे पत्र में याद दिलाया है कि सुप्रीम कोर्ट ने विशाखा प्रकरण में व्यवस्था दी है कि सुरक्षा के लिए समिति बने जिसमें छात्राओं का प्रतिनिधित्व भी रहे। यह समिति समयबद्ध तरीके के वीसी को रिपोर्ट दे जिससे उस पर कार्यवाही की जा सके। पूरे परिसर के प्रवेश और निकास द्वार के अलावा सभी छात्रावास विशेष तौर पर महिला हास्टल को सीसी टीवी से कवर किया जाये।

महिला हास्टल के लिए डेलीकेटेड महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाये। प्राक्टोरियल बोर्ड और निकाय आकस्मिक चेकिंग कर देखे कि जो परिसर में घूम रहे हैं वह छात्र या अभिभावक है अथवा कोई और। छात्र-छात्राओं से संवाद की निरंतर पारदर्शी प्रक्रिया आरम्भ हो। इन सभी बिन्दुओं पर वीसी से बात कर तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा जताते हुए सीसी टीवी और महिला सुरक्षाकर्मियों का तत्काल प्रबंध करने की हिदायत दी गयी है।

ये भी पढ़ें-‘हम लड़कियों को कभी ना कभी रास्ता चलते यहां - वहां हाथ तो मारा ही जाता है’

ये भी पढ़ें-बीएचयू विवाद : “कुर्ते में हाथ डाला था, कोई कहां तक बर्दाश्त करे”

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top