सोशल मीडिया के अफवाह से परेशान रही बिजनौर पुलिस

Abhishek PandeyAbhishek Pandey   3 Jun 2017 8:34 PM GMT

सोशल मीडिया के अफवाह से परेशान रही बिजनौर पुलिससोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर।

लखनऊ। पश्चिम यूपी में सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर कुछ इस कदर लोगों पर हावी है कि बगैर पुष्टि के सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही खबर को हकीकत मान लेते हैं। मामला बिजनौर के नगीना थाना क्षेत्र का है, जहां नगीना थाने की पुलिस गुरुवार देर रात दो वारंटियों को गिरफ्तार कर थाने ले आती है, लेकिन सीओ नगीना के मुताबिक, दोनों वारांटी सपा के पूर्व विधायक मनोज पारस से जुड़े हैं।

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इसके चलते कुछ लोगों ने वाट्सएप और फेसबुक पर अफवाह उड़ा दी कि पूर्व विधायक मनोज पारस को पुराने आपराधिक मामले में नगीना पुलिस गिरफ्तार कर थाने ले आई है, हालांकि सर्किल ऑफिसर नगीना का कहना है कि, पूर्व विधायक रात से वारांटियों को छुड़ाने का दबाव बना रहे थे, शायद इसकी जानकारी उनके विरोधियों को लग गई थी, इस बात से ही नाराज होकर बिजनौर से लेकर राजधानी लखनऊ तक लोगों ने मनोज पारस के गिरफ्तार होने की सूचना को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक मनोज पारस पर रेप का आरोप है। जिसके चलते विधानसभा चुनाव में मनोज पारस का टिकट काट कर पूर्व सपा सांसद यशवीर सिंह धोबी को समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया था। पर चंद घंटों में ही अखिलेश को अपना फैसला बदलना पड़ा था। बिजनौर के नगीना से पूर्व सपा विधायक मनोज पारस और उनके 3 साथियों पर उनके ही गांव की रहने वाली एक महिला ने 2006 में बलात्कार का आरोप लगाया था। जिसमें कोर्ट में आदेश हुआ था कि 18 अक्तूबर 2013 को मंत्री को कोर्ट में पेश होना है, नहीं तो पुलिस मंत्री को गिरफ्तार किया जाएगा।

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वहीं सपा से नगीना सुरक्षित विधान सभा सीट से मनोज पारस ने 2012 में जीत दर्ज की थी। इसके बाद इनको सपा सरकार में स्टाम्प राज्य शुल्क मंत्री पद से नवाज़ा गया था। मंत्री ने अपनी गिरफ्तारी न हो, इसके लिए रिवीजन कोर्ट में डाला था। इसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था। इसके बाद से मंत्री के ऊपर 18 अक्तूबर 2013 के बाद से गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी थी। कोर्ट में पेश न होने पर मंत्री मनोज पारस के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी हो चुके थे। 2014 में इनका मंत्री पद भी प्रदेश सरकार ने छीन लिया था, लेकिन विधायक मनोज पारस जेल जाने से बचे रहे।

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