बाबरी मामले पर अदालती आदेश पर सावधानी से कदम बढ़ाना चाहती है भाजपा

बाबरी मामले पर अदालती आदेश पर सावधानी से कदम बढ़ाना चाहती है भाजपाgaonconnection

नई दिल्ली (भाषा)। बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले से भाजपा के हाशिये पर चले गए नेता चर्चा के केंद्र में आ गए हैं लेकिन पार्टी ने इस मामले में सावधानी से कदम बढ़ाने का निर्णय किया है और अपने नेताओं से इसे सार्वजनिक तौर पर उठाने से बचने को कहा है।

पार्टी के एक नेता ने बताया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने केंद्रीय मंत्री उमा भारती को अयोध्या की यात्रा की घोषणा के कुछ ही घंटे के भीतर उसे रद्द करने को कहा, जो इसका प्रतीक है। लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के साथ उमा भारती के खिलाफ आपराधिक साजिश का मामला चलाया जायेगा। भाजपा ने उन खबरों को खारिज किया कि बुधवार रात शाह ने आडवाणी से बात की थी। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा था कि यह मामला 1993 से चल रहा है और कोई नई स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है।

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उन्होंने संवाददाताओं से कहा था, ‘‘इसलिए जो स्थिति है, वह जारी रहेगी।'' उन्होंने एक तरह से अदालती आदेश के बाद उमा भारती के इस्तीफ को खारिज कर दिया था और इन संभावनाओं को ‘काल्पनिक' बताया था कि इसका राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में उम्मीदवारों के चयन पर कोई प्रभाव पड़ेगा। भाजपा इस बात से प्रसन्न है कि राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है लेकिन वह इस मामले को ज्यादा प्रमुखता देने के पक्ष में नहीं दिखती जिसका निर्णय उच्चतम न्यायालय को करना है।

इस मामले की सुनवाई दो वर्षो में पूरी करनी है जो हिन्दुत्व के मुद्दे पर पार्टी को उपयुक्त लग रहा है क्योंकि तब तक 2019 के लोकसभा चुनाव का समय हो जाएगा। लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी अभी भाजपा के ‘मार्गदर्शक' मंडल में है हालांकि इसकी बैठक अभी नहीं हुई है। इन दोनों नेताओं ने इस विषय पर कुछ नहीं कहा। दोनों नेताओं ने बुधवार को मुलाकात की और समझा जाता है कि इन्होंने इसके राजनीतिक और कानूनी पहलुओं पर चर्चा की। इन दोनों नेताओं को राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए प्रमुख उम्मीदवारों के रुप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव जुलाई और अगस्त में होने हैं। बुधवार को अदालत के फैसले से इन दोनों नेताओं की संभावनाओं को झटका लगा है।

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