उत्तर प्रदेश: बिना लाइसेंस के नहीं चलेंगे ब्लड बैंक

Mohit AsthanaMohit Asthana   6 Nov 2017 1:48 PM GMT

उत्तर प्रदेश: बिना लाइसेंस के नहीं चलेंगे ब्लड बैंकप्रतीकात्मक तस्वीर।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ब्लड बैंक के मानको के संग अब कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मरीजों को सुरक्षित ब्लड मिल पाए इसके लिये खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ब्लड बैंक से जुड़े नियमों को और सख्त करने जा रहा है। अब ब्लड बैंक संचालक बैंक के लिये तय किये गये मानकों पर खरे उतरेंगे तभी उन्हें नेशनल एग्रीटेशन ऑफ ब्लड लैबोरेटरी (एनएबीएल) प्रमाण पत्र जारी करेगा।

जिसके बाद संचालक ब्लड बैंक का संचालन कर सकेंगे। यह जानकारी एक कार्यक्रम के दौरान केजीएमयू ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉक्टर तूलिका चंद्रा ने दी। डॉक्टर चंद्रा ट्रांस मेडिकॉन 2017 के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि प्रमाण पत्र लेने के बाद साल में तीन बार ब्लड बैंकों की जांच की जाएगी। कमियां मिलने पर ब्लड बैंक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ये भी पढ़ें- इंटरव्यू : ब्लड प्रेशर और डायबिटीज पर रखें नियंत्रण वर्ना लकवे का हो सकते हैं शिकार

गौरतलब है कि प्रदेश में अभी 251 ब्लड बैंक हैं जिनमें से किसी का भी एनएबीएल प्रमाण पत्र नहीं है। अगर पूरे देश की बात करें तो ऐसे ब्लड बैंक जिनके पास एनएबीएल द्वारा प्रमाण पत्र है उनकी संख्या सात है। कार्यक्रम में उड़ीसा से आए डॉक्टर देवाशीष मिश्रा ने कहा कि खून की जांच में न्यूक्लियर एसिड टेस्ट तकनीकी सबसे बेहतर है इस तकनीकी से वैक्टीरिया और वायरस का खतरा काफी हद तक समाप्त हो जाता है।

पहले चरण में 70 से 80 ब्लड बैंक

एनएबीएल ने फिलहाल 500 ब्लड बैंकों को प्रमाण पत्र देने का निर्णय लिया है। पहले चरण में 70 से 80 ब्लड बैंकों को प्रमाण पत्र दिया जाएगा। डॉक्टर चंद्रा ने बताया कि लाइसेंस मिलने के बाद ब्लड बैंक मानकों को अनदेखा करने लगते है। लाइसेंस की अवधि 5 साल होती है।

ये भी पढ़ें- शहरों में महिलाओं से ज्यादा पुरुष होते हैं हाई ब्लड प्रेशर के शिकार: रिपोर्ट

क्या है एनएबीएल

एनएबीएल में ब्लड बैंक के लिये जो मापदंड है उसे देखा जाता है प्राइवेट ब्लड बैंकों के लिये पर्याप्त जगह है या नहीं। इसके अलावा ब्लड बैंक चलाने के लिये ट्रेनिंग दी जाती है। डॉक्टर तूलिका चंद्रा ने गाँव कनेक्शन से बातचीत में बताया अभी तक ब्लड बैंक का एक बार लाइसेंस बनाने के बाद मनमर्जी के मुताबिक ब्लड बैंक चलाया जाता था लेकिन अब लाइसेंस बनाने के बाद साल में तीन बार ब्लड बैंक की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खेती और रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाली मशीनों और जुगाड़ के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top