एनटीपीसी हादसा : ब्वॉयलर की राख निकलने वाली पाइप में अचानक हुआ ब्लास्ट, और चारों ओर बिखर गईं लाशें

एनटीपीसी हादसा : ब्वॉयलर की राख निकलने वाली पाइप में अचानक हुआ ब्लास्ट, और चारों ओर बिखर गईं लाशेंआगे लगने के बाद का दृश्य।

रायबरेली। बुधवार को उत्तर प्रदेश में एक और बड़ा हादसा हो गया। ऊंचाहार के एनटीपीसी में ऊंचाहार स्थित नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन एनटीपीसी के प्लांट में ब्वायलर के पाइप फटने से अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदेश पिछले दिनों गोरखपुर में हुई बच्चों की मौत को लेकर भी चर्चा में था।

वहीं, एनटीपीसी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में भी हादसे की वजह पाइप का फटना माना है। एनटीपीसी के सूत्र के बताया, “शटडाउन के समय लीकेज होने से इंजीनियर पाइप लाइन में दबाव को कम करने का प्रयास कर रहे थे, उसी समय हादसा हुआ।” तीन एजीएम के भी घायल होने की खबर है। बुधवार दोपहर 3.30 बजे हुए इस हादसे के बाद घायलों को रायबरेली जिला अस्पताल में भेजने के साथ ही लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज और अन्य अस्पतालों में भेजा गया है।

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ऊंचाहार बिजली उत्पादन संयत्र में कुल छह यूनिट से बिजली उत्पादन होता है, जिस यूनिट में हादसा हुआ वह डेढ़ महीने पहले ही शुरू हुई थी। ऊंचाहार स्थित एनटीपीसी में 210 मेगावट की पांच यूनिट हैं और 500 मेगावट की नई यूनिट है। इस यूनिट के ब्वायलर की ऊंचाई 90 मीटर थी। एनटीपीसी के पास रहने वाले रऊफ ने बताया, “हादसे के बाद हम वहां से लोगों को लेकर भागे, हमारे बहनोई भी थे उनको भी ले आए हैं वो कम जले हुए हैं।

ज्यादातर मजदूर बंगाल और बिहार के हैं।” ऊंचाहार एनटीपीसी से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड को बिजली दी जाती है। ब्वायलर कैसे काम करता है उसके बारे में आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर शांतनु डे ने बताया, “ट्यूब काफी हाई क्वालिटी की होती हैं, कोयले को जलाकर पाइप से पानी ले जाकर भाप बनाई जाती है। इस भाप को 500 डिग्री सेल्सियस तक लेकर जाते हैं।”

वहीं, भारतीय मजदूर संघ के जिला महामंत्री, रामदेव सिंह ने एनटीपीसी के प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “इस यूनिट में आठ दिन पहले हूटर बजा था, इसमें सुरक्षा के मानकों की अनदेखी की गई।

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कैसे हुआ हादसा

एनटीपीसी ऊंचाहार परियोजना के संयंत्र क्षेत्र में नवनिर्मित पांच सौ मेगावाट क्षमता की छठी इकाई में बिजली उत्पादन का काम चल रहा था। शाम करीब पांच बजे ब्वॉयलर की राख निकलने वाली पाइप में अचानक तेज आवाज के साथ धमाका हो गया। लगभग 90 फीट ऊंचाई पर विस्फोट हुआ और प्लांट के चारों ओर गर्म राख फैल गई। ब्वॉयलर के आसपास निजी कंपनी के दो सौ से ज्यादा श्रमिक, एनटीपीसी के कर्मचारी व अधिकारी काम में जुटे थे। ये सभी राख की चपेट में आ गए। हादसे की सूचना पर एनटीपीसी प्रबंधन सक्रिय हुआ।

गर्म राख को हटाकर घायलों को बाहर निकालने का काम शुरू हुआ। सबसे पहले घायलों को एनटीपीसी अस्पताल लाया गया। फिर उनकी गंभीर हालत को देखते हुए रायबरेली या लखनऊ रेफर किया जाने लगा। जानकारी के मुताबिक यह हादसा एनटीपीसी ऊंचाहार की 500 मेगावाट की छठी यूनिट हुआ है। एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार के मुताबिक यह हादसा बुधवार शाम पांच से साढ़े पांच बजे मध्य का है। शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि बॉयलर के नीचे जलने वाली आग की राख पाइप से बाहर नहीं निकल सकी थी। जिससे ऐश पाइप में गैस का प्रेशर बनने से पाइप व बॉयलर में जोरदार ब्लास्ट हो गया।

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100 - 150 मज़दूर विस्फोट होते ही गिरे नीचे

हादसे के बाद मज़दूर गुस्से में हैं। मजदूर एनटीपीसी परिसर के बाहर पहुंच कर धरना कर रहे हैं। घटना स्थल पर धरना दे रहे मज़दूर हादसे की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। साथ ही उनकी मांग है कि अंदर जो लोग फंसे हुए हैं उन्हें जल्दी से जल्दी बाहर निकाला जाए और बाकी मज़दूरों को अंदर जाने की अनुमति दी जाए। एनटीपीसी में काम करने वाले कर्मचारी राजू बताते हैं, ''राख निकलने वाला पाइप चार जगह से फटा था। पाइप फटने से बहुत तेज़ धुआं उठा और कुछ दिखाई नहीं दिया। हालात यह थे कि विस्फोट के होते ही लगभग 100 - 150 लोग तुरंत ऊपर से नीचे गिरे। उनका कहना है कि अभी भी कुछ लोग राख में पड़े होंगे जिनका पता नहीं लग रहा है।

मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपए का मुआवजा

मुख्यमंत्री ने इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की मदद का ऐलान किया है। इसके अलावा गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार रुपये और सामान्य घायलों को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया गया है। सीएम ने रायबरेली के डीएम और अन्य वरिष्ठ अफसरों को घायलों के समुचित इलाज का निर्देश दिया है।

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राय बरेली के डीएम संजय कुमार ने बताया कि 66 लोग घायल हैं। एनडीआरएफ बचाव कार्य कर रही है। घायलों का फिलहाल अस्पतालों में इलाज जारी है। डीएम ने कहा, “हमने मजिस्ट्रेट और एक तकनीकी अधिकारी की टीम का गठन किया है, जो इस घटना की मैजिस्ट्रियल जांच करेगा।” हादसे में घायलों में एनटीपीसी के तीन एजीएम भी शामिल हैं। मृतकों में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के लोग शामिल हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पहल से रायबरेली को मिली थी एनटीपीसी की सौगात

ऊंचाहार एनटीपीसी की स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1981 में की थी। जिले के पहले सांसद फीरोज गांधी के निधन के बाद इंदिरा गांधी ने जिले की कमान संभाली थी। जिले के कई वरिष्ठ नेताओं का वह पिता की तरह ही सम्मान करती थीं। इनमें ही एक नाम था स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रहे ठाकुर दल बहादुर सिंह का। उनके कहने पर ही ऊंचाहार में एनटीपीसी की 1981 में स्थापना हुई। यहां 1988 में बिजली उत्पादन शुरू हुआ था। एनटीपीसी ऊंचाहार में कुल पांच यूनिट हैं, जिसमें प्रत्येक की क्षमता 210 मेगावाट है।

बॉयलर में खराबी आने के कारण बंद हुई थी एक नंबर यूनिट

बता दें कि ऊंचाहार एनटीपीसी की यूनिट नंबर एक बॉयलर में खराबी आने की वजह से 20 अक्टूबर 2017 को बंद हो गई थी। इससे 210 मेगावाट बिजली का उत्पादन ठप हो गया था। यूनिट के अचानक बंद होने से प्रदेश सहित अन्य राज्यों को दी जाने वाली बिजली में कटौती की गई थी। जानकारी होते ही परियोजना के अधिकारियों में हड़कंप मच गया था।

कई राज्यों को मिलती है बिजली

एनटीपीसी ऊंचाहार से उत्तर प्रदेश सहित हिमाचल प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, पंजाब व हरियाणा को बिजली की आपूर्ति की जाती है।

मिल चुके हैं कई पुरस्कार

देश में स्थापित एनटीपीसी की विद्युत परियोजनाओं में ऊंचाहार परियोजना ने एक वर्ष तक निर्बाध विद्युत उत्पादन किया था। इसके लिए ऊंचारहार कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर ने परियोजना को पुरस्कृत किया था।

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