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मेरठ की ज़मीन को बंजर बना रहे ईंट-भट्ठे

Sundar ChandelSundar Chandel   14 July 2017 6:33 PM GMT

मेरठ की ज़मीन को बंजर बना रहे ईंट-भट्ठेजनपद के कई ब्लाकों में चल रहे हैं ईंट भट्टें

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मेरठ। जिले के कृषि विभाग द्वारा कराए गए सर्वे में सामने आया है कि मेरठ की मिट्टी से काफीमात्रा में पोशक तत्व गायब हो चुके हैं, जिनका मुख्य कारण ईंट भट्टे और अवैध खनन हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर जरूरत से ज्यादा बढ़ रहे ईंट भट्टों पर लगाम नहीं लगाई गई तो एक समय आएगा मिट्टी बंजर में तब्दील हो जाएगी।

एक समय था कि मेरठ की ज़मीन को वेस्ट यूपी की सबसे ज्यादा पैदावार वाली भूमि माना जाता था। गंगा और यमुना नदियों का दोआब होने के कारण यहां सिचाई के लिएपानी की कोई कमी नहीं होती है। इस कारण यहां के किसान हमेशा अपने हाथों से तकदीर लिखते आएं हैं, पर आज कि स्थिति एक दम उलट है। मेरठ की ताकतवर धरतीके पोशक तत्व गायब हो चुके हैं। कृषि विभाग के ताजे सर्वें में यह हकिकत सामने आई है।

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कृषि अधिकारी जशवीर तेवतिया बताते हैं ,“जनपद के हस्तिनापुर, दौराला, किठौर, परिक्षिगढ सहित करीब आठ ब्लाकों की मिट्टी मेरठ की संभागीय मृदा परीक्षणप्रयोगशाला में परखी गई, जिससे खोखली हुई जमीन की कलई खुलकर सामने आ गई।”

प्रयोगशाला के मंडलीय अध्यक्ष सीवी सिंह बताते हैं,“ मेरठ जनपद के अलावा आसपास के जिलों के भी खेत-खेत जाकर नमूने एकत्र किए गए। मिट्टी की जांच होने परसामने आया कि मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस अति न्यूनतम व पोटाश मध्यम स्तर का मिला। यही हालत सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी रही। मिट्टी में सल्फरजिंक, लोहा, कापर, मैगनीज का स्तर भी जरूरत के हिसाब से काफी कम पाया गया। मिट्टी से मुख्य पोशक तत्वों के कम होने के चलते फसलों को मोटा नुकसान हो रहा है।इसके पीछे संबंधित क्षेत्रों में पनप रहे अधांधुंद ईंट भट्टे, अवैध खनन, व बेहिसाब रासायनिक खादों का प्रयोग है।”

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बड़ी संख्या में चल रहे ईंट भट्टे -

कृषि वैज्ञानिक अतुल मेघवाल बताते हैं,“ मेरठ के हस्तिनापुर, मवाना, सरधना, किला, किठौर आदि ब्लाकों में सैकड़ों ईंट भट्टे हैं। इस भट्टों के कारण जहां एक और धरतीतेजी से तप रही है, वहीं ईंट बनने के लिए खनन से अच्छी मिट्टी उठा ईंट पाथ ली जाती है। जिसकी वजह से संबंधित क्षेत्रों की मिट्टी खोखली होती जा रही है। जिस कारणमिट्टी से फसल पैदा करने वाले पदार्थ गायब मिल रहे हैं। इसके अलावा खेतों में देशी खाद्य न डालना भी एक कारण है।”

कृषि विज्ञान केन्द्र हस्तिनापुर के प्रभारी डा. संदीप चैधरी बताते हैं कि मिट्टी से नाइट्रोजन गायब होना उसकी उर्वरा शक्ति नष्ट कर देता है, जिससे पौधे हल्के रंग के याहल्के पीले होकर बौने रह जाते हैं। पुरानी पत्त्यिां पहले पीली रह जाती हैं। फास्फोरस की कमी से किसी भी पौधे की पत्तियां छोटी रह जाती है, जिसका पौधों पर बुरा असरपड़ता है। वहीं पोटाश कम होने से पुरानी पत्तियों का रंग पीला हो जाता है और पौधा विकास नहीं कर पाता।”

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