कैनलटॉप सोलर पैनल : अब सूखी नहरें बना सकेंगी बिजली, पढ़िए कैसे

Devanshu Mani TiwariDevanshu Mani Tiwari   5 April 2017 2:06 AM GMT

कैनलटॉप सोलर पैनल : अब सूखी नहरें बना सकेंगी बिजली, पढ़िए कैसेकैनलटॉप सोलर पावर प्लांट से बढ़ेगी सौर ऊर्जा क्षमता।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। उत्तराखंड राज्य के टिहरी और कुमाऊ क्षेत्र में नहरों के किनारे और बंजर ज़मीनों पर स्लांटिंग व कैनलटॉप सोलर पैनल प्लांट लगवाए जा रहे हैं। यह तकनीक उत्तर प्रदेश में सूखी पड़ी नहरों को काम में लाए जाने के लिए कारगर साबित हो सकती है।

उत्तर भारत में सौर क्षमता बढ़ाने के लिए मार्च में लखनऊ में उत्तर भारत की सबसे बड़ी सौर निर्वाचिका सभा हुई। इस सभा में उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (यूरेडा) की निदेशक ज्योति नीरज खेरवाल ने उत्तराखंड में नहरों पर व वनक्षेत्रों में इस्तेमाल न की जाने वाली ज़मीनों पर स्लांटिंग व कैनलटॉप सोलर पैनल प्लांट लगाए जाने की बात रखी थी। उत्तराखंड में टिहरी व कुमाऊ क्षेत्र की नहरों पर कैनलटॉप सोलर पैनल तकनीक पर आधारित सोलर प्लांट लगाने का काम जारी है।

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रायबरेली के लालगंज ब्लॉक में डलमऊ पंप-बी से जुड़ी 17 नहरों में पानी पिछले आठ वर्षों नहीं आया है। जिला मुख्यालय से 35 किमी. लालगंज तहसील के अंतर्गत आने वाले भोजपुर गाँव के निवासी राघेवेंद्र सिंह (56 वर्ष) बताते हैं, “हमारे गाँव में बहने वाली नहर डलमऊ पंप से जुड़ी है। डलमऊ पंप के बंद कर दिए जाने से इस नहर में पानी आना बंद हो गया है।’’ कैनलटॉप सोलर पैनल तकनीक लालगंज ब्लॉक में बहने वाली इन नहरों को उपयोग में लाने के लिए कारगर साबित हो सकता है।

क्या है कैनलटॉप सोलर पैनल तकनीक

देश में नहरों व बंजर ज़मीनों को इस्तेमाल में लाए जाने के लिए कैनलटॉप सोलर पैनल तकनीक को सबसे पहले गुजरात में वाइब्रेंट गुजरात योजना के अंतर्गत इस्तेमाल किया गया। इसके बाद इस तकनीक को पंजाब, केरल और उत्तराखंड जैसे राज्यों में प्रयोग किया जा रहा है।

उत्तराखंड में कैनलटॉप सोलर पैनल तकनीक के अंतर्गत हो रहे काम के बारे में उत्तरकाशी मंडल के क्षेत्रीय अभियंता रघुवीर सिंह कोरी ने बताया, ‘’कैनलटॉप सोलर पैनल तकनीक के अंतर्गत प्रदेशभर के वनक्षेत्र और नहरों को जोड़ा जाना है। अभी टिहरी डैम से निकलने वाली नहरों व कुमाऊ के कुछ वनक्षेत्रों में काम शुरू भी हो चुका है।’’ भारत में लगभग 75 लाख हेक्टेयर भूमि बंजर है, वहीं विश्व में लगभग 9,520 लाख हेक्टेयर भूमि ऊसर प्रभावित है। उत्तर प्रदेश में लगभग 11.50 लाख हेक्टेयर भूमि ऊसर है। ऐसे में इन ज़मीनों पर स्लांटिंग व कैनलटॉप सोलर पैनल प्लांट लगाए जाने से इनका बेहतर प्रयोग किया जा सकता है।

स्लांटिंग व कैनलटॉप सोलर पावर प्लांट एक बड़ा प्रोजेक्ट है। उत्तराखंड में वनक्षेत्र अधिक है इसलिए ऐसी योजना के लिए इन राज्यों में ज़मीन भी ज़्यादा है। उत्तर प्रदेश में ऐसे प्रोजेक्ट को लाने के लिए बड़ी कार्य योजना बनाने की आवश्यकता पड़ेगी।
संगीता सिंह, निदेशक यूपीनेडा

उत्तर प्रदेश में स्लांटिंग व कैनलटॉप सोलर पावर प्लांटों को लगाए जाने को एक बड़ा कदम मानते हुए यूपी नेडा की निदेशक संगीता सिंह बताती हैं, ‘’स्लांटिंग व कैनलटॉप सोलर पावर प्लांट एक बड़ा प्रोजेक्ट है। उत्तराखंड में वन क्षेत्र अधिक है इसलिए ऐसी योजना के लिए इन राज्यों में ज़मीन भी ज़्यादा है। उत्तर प्रदेश में ऐसे प्रोजेक्ट को लाने के लिए बड़ी कार्य योजना बनाने की आवश्यकता पड़ेगी।’’

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