योगी के जनता दरबार में कितनी शिकायतें आईं, सीएम ऑफिस को पता नहीं 

योगी के जनता दरबार में कितनी शिकायतें आईं, सीएम ऑफिस को पता नहीं जनता दरबार में लोगों से मिलते योगी आदित्यनाथ 

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार का कोई भी रिकार्ड मुख्यमंत्री कार्यालय के पास नहीं है। कुल कितनी शिकायतें आईं। इसमें कितनी का निस्तारण किया गया। कितने अधिकारियों को दंडित किया गया, ऐसा कोई भी आंकड़ा सीएम आफिस के अफसरों के पास नहीं है।

मजे की बात ये हैं कि पांच सवालों में से हर बात का जवाब आरटीआई में न में ही दिया गया है। ऐसे में जनता दरबार को लेकर भले ही मुख्यमंत्री संवेदनशील हों मगर शासन के हाकिम केवल रवायत भर ही पूरी करते हुए नजर आ रहे हैं।

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अफसरों ने महज दिखावा बनाया योगी के जनता दर्शन और जनसुनवाई

आरटीआई में हुआ खुलासा जनता दरबार की सूचनाएं उपलब्ध नहीं

आरटीआई एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने मई माह में मुख्यमंत्री कार्यालय में एक आरटीआई दायर की थी। आरटीआई पर दिए गए जवाब में अनेक अचंभित करने वाले खुसाले किये गये हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने मई महीने में मुख्यमंत्री कार्यालय में आरटीआई अर्जी देकर जनता दरबारों के संबंध में छह बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। इस आरटीआई पर मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुभाग अधिकारी और जनसूचना अधिकारी सुनील कुमार मंडल ने बीते 10 जुलाई को पत्र भेजकर जो सूचना दी है, उसमें खुलासा हुआ कि अधिकांश रिकार्ड मुख्यमंत्री कार्यालय में उपलब्ध ही नहीं हैं।

उससे सीएम योगी की जनता दरबार और जनसुनवाई जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर शासन के अफसरों के रवैये को उजागर किया है। सुनील कुमार मंडल ने बताया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में विभिन्न माध्यमों से प्राप्त प्रत्यावेदन आईजीआरएस प्रणाली के अंतर्गत अपलोड किये जाते है और इनका अलग से कोई डेटा उपलब्ध नहीं होने के कारण जनता दरबारों में प्राप्त शिकायतों और इन शिकायतों में से निस्तारित शिकायतों की सूचना देने में असमर्थता व्यक्त कर दी है। जनता दरबारों में प्राप्त शिकायतों के आधार पर किसी भी अधिकारी को दंडित न किये जाने और जनता दरबारों पर राजकोष से व्यय की गई धनराशि की जानकारी न होने का चौंकाने वाला खुलासा भी मंडल के इस जबाब से हुआ है।

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आरटीआई में पूछे गए सवाल

  • जनता दरबार में आईं कुल शिकायतें और उनमें से हुए कुल निस्तारणों की संख्या
  • जनता दरबार में शिकायती पत्रों को लेकर हुईं बैठकों की तिथियों की जानकारी
  • शिकायतों में दोषी पाए गए अफसरों की सूची और उनको दिये गये दंड की सूचना
  • जनता दरबार में खर्च की गई राशि का ब्योरा
  • जनसूचना अधिकारी के जवाब
  • पहली दो सूचनाओं को देना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिये नहीं दी जाएंगी
  • बाकी सवालों से संबंधित सूचनाओं का कोई भी ब्योरा कार्यालय में उपलब्ध नहीं है

“सूचना के अधिकार के तहत इस तरह के जवाब देना उचित नहीं है। इससे पता चलता है कि शासन के अधिकारी मुख्यमंत्री के जनता दरबार जैसे कार्यक्रम को लेकर भी गंभीर नहीं हैं। हमको नये सिरे से अपील करने के लिए कहा गया है।”

संजय शर्मा, आरटीआई एक्टिविस्ट

“वादी अगर जवाबों से संतुष्ट नहीं है, तो वह 30 दिन के भीतर दूसरी अपील कर सकता है। हमारे जो अधिकतम जानकारी थी, वह दे दी गई है।”

सुनील कुमार मंडल, जनसूचना अधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय

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