कर्ज़माफी : किसानों की डाटा फीडिंग की तारीख खत्म, कई मंडलों में 40 फीसदी भी काम पूरा नहीं

कर्ज़माफी : किसानों की डाटा फीडिंग की तारीख खत्म, कई मंडलों में 40 फीसदी भी काम पूरा नहींबैंकों की हीलाहवाली से किसानों को कर्जमाफी के लिए अभी और इंतजार करना होगा।

लखनऊ। प्रदेश सरकार ने भले ही किसानों की कर्जमाफी के लिए राशि घोषित कर दी है, लेकिन बैंकों की हीलाहवाली से किसानों को कर्जमाफी के लिए अभी और इंतजार करना होगा।

बैंकों में 85 लाख किसानों के कर्ज की डाटा फीडिंग के लिए घोषित डेडलाइन 22 जुलाई, 2017 (शनिवार) को समाप्त हो चुकी है, जबकि डाटा फीडिंग का काम कई मंडलों में 40 प्रतिशत तक भी नहीं हो पाया है।

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लखनऊ मंडल की समीक्षा करने के बाद जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने बताया, "फसली ऋण मोचन के लिए बैकों द्वारा किसानों का डाटा फीड किया जाना है। जिसके लिए लखनऊ का लक्ष्य56,537 है, जिसको 22 जुलाई 2017 की रात्रि 12 बजे तक पूरा करना था, लेकिन अभी तक बैंकों ने केवल 21,299 किसानों का डाटा ही फीड किया है।"

लखनऊ मंडल में पांच बैंकों की कार्य की प्रगति बहुत ही असंतोषजनक रही है, जिसमें बैंक ऑफ इंडिया ने 21,161 लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 4,427, इलाहाबाद बैंक ने 5,396 के सापेक्ष मात्र 1,805, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 5,011 के सापेक्ष मात्र 1,799, यूको बैंक ने 2,889 के सापेक्ष 1,690, कोऑपपरेटिब बैंक 2,652 के सापेक्ष मात्र 643 का डाटा फीडिंग की है।"

यही हाल प्रदेश के बाकी मंडलों का है, जहां डाटा फीडिंग काफी पीछे है। सरकार की ओर से बैंकों के कोआडिनेटरों को चेतावनी दी गई है कि अगर कोई किसान लाभ से वंचित रह जाता है तो उसकी पूरीजिम्मेदारी शाखा प्रबन्धक और बैंक के जिला स्तरीय अधिकारी की होगी। शाखा प्रबन्धक व बैंक के जिला स्तरीय अधिकारी के विरुद्ध आरोप पत्र बनाकर बैंक के सीएमडी को भेजा जायेगा कि आपके बैंक के कर्मचारी किसानों की समस्याओं के प्रति गम्भीर नही हैं।

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वहीं इस बारे में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा, "बैंकों से लापरवाही की खबरें पूरे प्रदेश से आ रही हैं। प्रदेश लघु एवं सीमांत किसानों के एक लाख रुपये तक की ऋण माफी राज्य सरकार की सबसे बड़ी योजना है। सितंबर में किसानों तक ऋणमाफी का प्रमाणपत्र दिया जाना है। इसमें बैंकों की किसी भी तरह की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों ने इस वक्त उत्तर प्रदेश में 86,214.20 करोड़ रुपए का कर्ज यूपी के छोटे किसानों को दिए हुए हैं, इसका औसत 1.34 लाख प्रति किसान बैठता है।

हालांकि कर्जमाफी की घोषणा बैंकों को रास नहीं आ रही है। इस बारे में स्टेट बैंक की प्रमुख अरुंधती भट्टाचार्य ने कहा था, "ऐसे कदम से लोग कर्ज चुकाने से कतराएंगे। कर्ज माफ करने से एक बार तो सरकार किसानों की तरफ से पैसे भर देती है। मगर उसके बाद जब किसान कर्ज लेते हैं तो वो अगले चुनाव का इंतजार करते हैं, इस उम्मीद में कि शायद उनका कर्ज माफ हो जाए।"

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