‘जिनके पैर न पड़ी बिवाई, ते का जाने पीर पराई’

Ravindra VermaRavindra Verma   30 May 2017 6:22 PM GMT

‘जिनके पैर न पड़ी बिवाई, ते का जाने पीर पराई’बुंदेलखंड, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और कर्नाटका में आज भी पानी की एक-एक बूंद सोने के समान है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

बाराबंकी। 'जिनके पैर न पड़ी बिवाई, ते का जाने पीर पराई' बाराबंकी के उप कृषि निदेशक डॉक्टर एस पी सिंह ने इस कहावत का जिक्र करते हुए लोगों से कहा कि अभी यहाँ पानी पर्याप्त है इस लिए आप लोगों को पानी की समस्या का अंदाजा नहीं है, जहां पानी की समस्या है उनसे पूछिए की पानी की कीमत क्या है।

लोगों को संबोधित करते एसपी सिंह।

एस पी सिंह ये कृषि विभाग बाराबंकी द्वारा मसौली विकासखण्ड के लछबर बजहा गाँव में आत्मा योजनान्तर्गत आयोजित कृषि जागरूकता कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए कही। अपने संबोधन में उन्होंने आगे कहा, ''आप लोगो से अनुरोध है कि पानी की उपयोगिता को समझे और टपक/फुहारा सिचाई से पानी को बचाने में योगदान दे।''

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इस मौके पे जिला उद्यान अधिकारी बाराबंकी जय करण सिंह ने उद्यान विभाग की योजनाओ की जानकारी दी, जिसमे बताया कि बागवानी की फसलों को रोपित करने के लिए गड्ढे बनाने का समय बिलकुल उपयुक्त है। पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर सुधाकर सिंह ने पशुओं में लगने वाले रोगों के टीकाकरण के बारे में जानकारी दी। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर राजाराम राय ने ड्रम सीडर से धान की रोपाई से लाभ के बारे में बताया।

कार्यक्रम में शामिल लोग।

इस मौके पे सैकड़ो की संख्या में किसान व खुशहाली कृषि केंद्र, पायनियर धान, कोरोमंडल खाद आदि कंपनियों से अपने स्टाल लगाकर किसानों को जानकारी दी।

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