सुरक्षा कानून होने के बावजूद दफ्तरों में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं

सुरक्षा कानून होने के बावजूद दफ्तरों में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएंकानून होने के बावजूद आज भी महिलाएं नौकरी में शोषण का शिकार हो रही हैं।

स्वाती शुक्ला, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। "मैं एक मार्केट के बेसमेंट में एक पर्स की दुकान में करती थी। मेरे साथ दो लड़कियां और काम करती थीं। एक दिन दोनों लड़कियां नहीं आईं और उस दिन मेरे मालिक ने मेरे साथ बुरा व्यवहार किया। उसने मुझे पैसे का लालच भी दिया मगर मैंने शोर मचा दिया और वहां बहुत लोग आ गए। उसके बाद मैंने वहां नौकरी छोड़ दी।" यह कहना है प्रियंका मिश्रा का।

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महिलाओं की सुरक्षा के तहत कानून होने के बावजूद आज भी महिलाएं नौकरी में शोषण का शिकार हो रही हैं। महिलाओं के साथ होने वाले शारीरिक उत्पीड़न को रोकने के लिए शिकायत रोकथाम निषेध और निवारण अधिनियम 2013 के तहत ऐसे सभी सरकारी और प्राइवेट सेक्टर की कंपनी जहां 10 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन होना चाहिए।

ऐसे मामले बहुत ज्यादा बढ़ रहे हैँ और बहुत से ऐसे मामले झूठे भी साबित हुए हैं लेकिन दिल्ली की घटना के बाद से लॉ एंड आर्डर अच्छा हुआ है। तेजी से लागू भी किया जा रहा है लेकिन अभी भी सुधार करने की जरूरत है।
वीर प्रकाश, वकील, हाई कोर्ट


2015 में हुए सर्वे में ये खुलासा हुआ है कि 36 प्रतिशत भारतीय और 25 प्रतिशत विदेशी कंपनियों ने आईसीसी का गठन नहीं किया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ने सुरक्षित कार्यस्थलों को बढ़ावा देने के लिए एक आयोजन किया, जिसमें आए 120 कंपनियों में से 50 प्रतिशत ने ये माना कि आईसीसी कानून के बारे में उन्हें जानकारी ही नहीं है।

हाई कोर्ट में सिविल, क्रिमिनल के मामले देख रही एडवोकेट प्रतिमा सिंह बताती हैं, "नौकरी कर रही हर महिला के साथ एक से दो बार यौन शोषण जरूर हुआ है क्योंकि जब एडवोकेट और पुलिस महिलाकर्मी यौन शोषण के मामले से पीड़ित हैं तो बाकी महिलाओं के बार में क्या कहा जाए। मुझे इतने साल यहां काम करते हो गया, न जाने कितनी बार मैंने लोगों की गंदी बातें सुनी हैं।"

पीड़ित महिलाएं नहीं करती हैं शिकायत

प्रियंका और पल्लवी उन पीड़िताओं में से हैं जो कार्यस्थल पर अपने साथ हुई छेड़छाड़ की शिकायत रोकथाम निषेध और निवारण अधिनियम 2013 के तहत शिकायत नहीं करतीं। ये अधिनियम 2012 में नई दिल्ली में हुए गैंगरेप के बाद लागू किया गया था। 6047 पर महिलाओं पर इंडियन बार एसोसिएशन द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक, 70 फीसदी महिलाओं ने ये माना है कि वे कार्यस्थल में अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की शिकायत नहीं करतीं, क्योंकि उसके बाद की प्रतिक्रिया से वे डरती हैं।

महिलाएं अपने लिए स्वयं जिम्मेदार हैं क्योंकि वो गलत होने पर विरोध नहीं करती हैं। मुश्किलों को डट कर सामना नहीं करती हैं, इसलिए अपराध बढ़ रहा है। घर हो या बाहर, यौन शौषण के मामले बढ़ रहे हैं। जब हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं तो सिर्फ नारेबाजी करते हैं। महिलाओं को अपने अन्दर विश्वास जगाना चाहिए। समाज में फैली मानसिकता को बदलना चाहिए।
माननी श्रीवास्तव, मनोवैज्ञानिक, लखनऊ विश्वविद्यालय

दोगुनी रफ़्तार से बढ़ रहे मामले

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों की मानें तो 2014 की अपेक्षा 2015 में कार्यस्थल पर शारीरिक उत्पीड़न के मामलों में दोगुना वृद्धि हुई है। 2014 में ऐसे 57 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2015 में ये आंकड़ा 119 हो गया। वहीं ऑफिस के काम से बाहर गई महिलाओं के साथ 2014 में शारीरिक उत्पीड़न के 469 मामले दर्ज हुए थे, 2015 में आंकड़ा बढ़कर 714 हो गया। 2014 में नेशनल कमीशन फार वीमन की एक रिपोर्ट पर लोकसभा में दिए गए एक जवाब के अनुसार 2013 में ऐसे शिकायतों की संख्या 249 थी। दरअसल ऑफिस काम करने वालीं ज्यादातर महिलाओं को कानूनी कार्रवाई के बारे में पता ही नहीं होता। (ख़बर मूलरुप से वर्ष २०१७ में गांव कनेक्शन अख़बार में प्रकाशित की गई थी)

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