यूपी को सूखाग्रस्त होने से बचाएंगे डीजी महेंद्र मोदी

यूपी को सूखाग्रस्त होने से बचाएंगे डीजी महेंद्र मोदीआईपीएस महेंद्र मोदी

लखनऊ। यूपी में ईमानदार छवि और लीग से हटकर दूसरों की भलाई के लिए काम करने वाले एक ऐसे सिनियर आईपीएस ऑफिसर हैं, जो उत्तर प्रदेश को आने वाले वक्त में सूखाग्रस्त होने से बचाने के लिए नगर विकास मंत्रालय के अधिकारियों को जल संरक्षण कार्ययोजना पर सलाह देंगे।

बुंदेलखंड के कई इलाकों को सूखे की मार से राहत दिलाने के लिए अपनी सैलरी का 5 परसेंट हिस्सा बहुत समय से दे रहे आईपीएस महेंद्र मोदी को योगी सरकार ने बुधवार को प्रदेश में नगरीय विकास विभाग में सलाहाकार पद पर तैनात किया है। उन्हें यह कार्य सूबे में लंबे समय से जल संचयन और जागरूकता अभियान चलाने के लिए दिया गया है।

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आईपीएस महेंद्र मोदी की इस नई तैनाती की पुष्टी उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने की है। मनोज कुमार सिंह ने बताया कि, आईपीएस महेंद्र मोदी मौजूदा वक्त में यूपी पुलिस की टेक्निकल सेवा में डीजी पद पर तैनात हैं। साथ ही उन्हें प्रदेश के नगरीय क्षेत्र में जल संरक्षण, रेन वॉटर हार्वस्टिंग, ग्राउण्ड वाटर रीचार्ज के क्षेत्र में योगदान और सुझाव देने के लिए नियुक्त किया गया है, जिसके एवज में उन्हें कोई अतिरिक्त मानदेय नहीं दिया जायेगा तथा उनके इस अतिरिक्त कार्य की सहमति गृह विभाग से ले ली गई है।

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आईपीएस महेंद्र मोदी 1986 बैच के आईपीएस ऑफिसर हैं। महेंद्र मोदी ने बुंदेलखंड के कई इलाकों को सूखे की मार से राहत दिलाने के लिए अपनी सैलरी का 5 परसेंट हिस्सा दे दिया। यही नहीं, जल संचयन के लिए लोगों को जागरूक भी लगातार करते आये हैं। साल 2008 में झांसी में डीआईजी रहने के दौरान महेंद्र मोदी ने बुंदलेखंड में पानी की किल्लत को देखते हुए बड़े पैमाने पर सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने झांसी जिले के कंचनपुर गांव में 150 गांव में पानी की किल्लत तो खत्म किया। जिसके लिए उन्होंने 40 हजार के पानी टैंक और गौशला के लिए रूफ टाप से बारिश के पानी से 6300 लीटर पानी सेव करने की व्यवस्था की।

डीजी महेंद्र मोदी ने नई जिम्मेदारी मिलने पर कहा कि जल संरक्षण के लिए लंबे समय से कार्य कर रहा हूं, इसके लिए 2008 से अपनी छुट्टी और पर्सनल टाइम निकाल कर ही जल संचय अभियान चलाता हूं। उन्होंने कहा कि, यूपी ही नहीं 11 राज्यों में 152 रिचार्ज वाटर टैंक बनवाए हैं। यह काम मैंने श्रमदान और अपनी सैलरी के 5 फीसदी के खर्च से तैयार किया है, जिसे आगे लगातार करता रहूंगा।

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