जिलों से न्याय न मिलने पर पीड़ित पहुंच रहे डीजीपी मुख्यालय

जिलों से न्याय न मिलने पर पीड़ित पहुंच रहे डीजीपी मुख्यालयडीजीपी मुख्यालय पहुंच रहे हैं पीड़ित।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जिला पुलिस से न्याय न मिलने पर पीड़ित अपनी फरियाद लेकर राजधानी लखनऊ स्थित डीजीपी मुख्यालय पहुंचे रहे हैं, जिनकी सुनवाई वहां मौजूद अधिकारी कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि, आखिर ऐसी नौबत क्यों आ रही है कि पीड़ित की जिला स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही है। इसे लेकर ज्यादातर अधिकारियों को अक्सर ढुलमुल रवैया की देखने को मिलता है।

प्रदेश में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार बन जाये फिर भी पुलिसियां कार्यप्रणाली जस की तस रहती है, जिसे सुधार पाना बहुत मुश्किल साबित होता दिख रहा है। इस बानगी इससे साफ जाहिर हो रही है कि, जिलों से न्याय न मिलने के चलते किसी भी पीड़ित परिवार को लम्बा सफर तय कर राजधानी स्थित डीजीपी मुख्यालय में बने लोक शिकायत जन प्रकोष्ठ में अपनी सुनवाई के लिए आना पड़ता है। इसके बाद वहां मौजूद संबंधित अधिकारी मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित जिले के अधिकारी से जवाब-तलब करते हैं। जबकि संतोषजनक जिले के अधिकारी से जवाब न मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तृति कर उच्चाधिकारियों को सुचित कर दिया जाता है।

डीजीपी मुख्यालय के शिकायत प्रकोष्ठ में तैनात आईपीएस जय प्रकाश यादव जिलों से आने वाले पीड़ित की पहले सुनवाई करते हैं, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित की शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारी से मुलाकात कर उन्हें उचित न्याय का भरोस देकर प्रार्थन पत्र की रिसिविंग पीड़ित को सौंप दिया जाता है, जिससे वह आगे अपनी सुनवाई न होने पर उस रिसिविंग के जरिए अपने केस का अपडेट ले सके।

रोजाना आते हैं 25 से 30 प्रार्थना पत्र

लोक शिकायत प्रकोष्ठ के आंकड़ों की मानें तो करीब रोजाना 25 से 30 प्रार्थना पत्र इस कार्यालय में पीड़ितों के आते है, जिसमें ज्यादातर मामले जमीनी विवाद के होते हैं। वहीं मौसम खराब होने पर इस प्रकोष्ठ में आने वाली की संख्या में कमी आते ही,इसके पीछे अधिकारी वजह यह बताते हैं कि, पीड़ित को लगता है कि मौसम ठीक रहे तो वहां तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट के जरिए पहुंचने में आसानी होगी।

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ज्यादातर शिकायतों पर संबंधित जिले के अधिकारी से जवाब-तलब किया जाता है और साथ ही हमारे कार्यालय से एक पत्र भेज कर संबंधित जिले के अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाता है। साथ ही पीड़ित की शिकायत के आधार पर उसकी मुलाकात मुख्यालय में तैनात संबंधित अधिकारी से करवाई जाती है।
विजय मीना, आईजी, जन लोक शिकायत

उन्होंने बताया कि, प्रकोष्ठ में सीएम कर्यालय से भेजे गए शिकायती आते हैं, जिनकी सुनवाई कर उन्हें जल्द न्याय दिलाने का प्रयास किया जाता है। वहीं प्रकोष्ठ में तैनात आईपीएस जय प्रकाश यादव ने बताया कि, हर पीड़ित की अपनी समस्या होती है, जिसे सुनने के बाद उसकी मुलाकात उच्चाधिकारियों से करवा दी जाती है।

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उन्होंने कहा कि, कभी-कभी आरोपी पक्ष भी अपनी सुनवाई के लिए वहां पहुंचता है, क्योंकि उसकी शिकायत रहती है कि पीड़ित पक्ष ने हमे जबरन गलत तरीके से केस में फंसाया है। इसके लिए दोनों पक्षों की हर जिले में स्थापित विशेष प्रकोष्ठ से जांच करा न्याय दिलाने का प्रयास किया जाता है। वहीं कुछ पीड़ित सीधे डीजीपी तक पहुंचने का भी प्रयास करते हैं, जिनकी मुलाकात डीजीपी पीआरओ राहुल श्रीवास्तव करवा उसे न्याय दिलाने का प्रयास करते हैं। बता दें कि, पुलिस मुख्यालय में मामले की गंभीरता के आधार पर ही पीड़ित की मुलाकात डीजीपी सुलखान सिंह से करवाई जाती है, जबकि अन्य मामलों का निपटारा मुख्यालय में तैनात दूसरे अधिकारी अपने स्तर से करते हैं।

वहीं शिकायत प्रकोष्ठ में फैजाबाद जिले से आने वाले अनिल सिंह बताते हैं कि, उनकी जमीन पर दबंग किस्म के पड़ोसी कब्जा कर रहे हैं और स्थानीय थाने एवं जिला एसएसपी कार्यालय पर सुनवाई न होने के चलते डीजीपी से मुलाकात करने आया हूं।

उन्होंने बताया कि, यहां आने पर एक आशा रहती है कि, बड़े अधिकारी से मिलने के बाद जरुर न्याय मिलेगा। वहीं शिकायत प्रकोष्ठ में लखनऊ से सटे आस-पास के जिलों सबसे अधिक शिकायतें आती हैं। इसकी वजह अधिकारी राजधानी आने में इन जिलों के पीड़ितों को अधिक समय नहीं लगता है इसलिए वह सीधे ही डीजीपी मुख्यालय अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं।

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