जीएसटी की मार से जमीन पर जरी कारोबार #NationalHandloomDay

नोटबन्दी और जीएसटी की वजह से जरी के काम से जुड़े लाखों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हजारों लोग जरी का काम छोड़ दूसरे काम की तलाश में जुट गए हैं।

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   7 Aug 2018 4:46 AM GMT

बरेली। अपनी चमक से देश-विदेश में भी पहचान बनाने वाला जरी कारोबार बंद होने के कगार पर है। नोटबन्दी और जीएसटी की वजह से जरी के काम से जुड़े लाखों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हजारों लोग जरी का काम छोड़ दूसरे काम की तलाश में जुट गए हैं।

जरी कारोबार पर पांच प्रतिशत जीएसटी लागू हो गया है। जीएसटी ने जरी अद्योग को सबसे ज्यादा प्रभावति किया है। जरी का काम करने वाले मोहम्मद शानू हुसैन (40वर्ष) बताते हैं, " मैं करीब बीस साल से जरी का काम कर रहा हूं, लेकिन पहली बार हालत इतनी खराब हुई है। जीएसटी ललगने के बाद काम नहीं आ रहा है। अगर यही हाल रहा था तो कुछ महीने में इस कारोबार को बंद करके दूसरा कारोबार शुरू करना पड़ेगा। "



जरी कारोबारी अजीम खान (45वर्ष) का कहना है, " जरी उद्योग में पांच प्रतिशत से 18 प्रतिशत की जीएसटी लग रहा है। जीएसटी की वजह से छोटे कारोबारियों ने अपना काम करना ही बंद कर दिया है। इसके साथ ही जो कारोबारी हर माह 10 लाख तक का कारोबार करते थे, उनका काम जीएसटी लागू होने के बाद बन्द हो गया है। सरकार जरी कारोबार में कुछ छूट प्रदान करें, जिससे कि इससे जुड़े लोग उबर सकें और एक बार फिर बरेली का जरी उद्योग अपनी एक अलग पहचान बना सके।"

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हजारों महिलाओं के हाथ से छूट रहा करोबार

जरी का ज्यादातर काम महिलाएं करती हैं। कई घरों में आदमी काम नहीं करते, घर महिलाएं और बच्चों के जरी की मेहनत से चलता था, अब दो समय की रोटी जोड़ना मुश्किल है। नोटबंदी में बड़े कारोबारियों ने कारीगरों को खूब छला, मद्दे दाम पर उनसे ज्यादा काम लिया गया, स्थिति अब भी लगभग वैसी है। पुराने बरेली के कुछ मोहल्लों में पूरा का पूरा इस कारोबार से जुड़ा है। महिलाएं घर के काम के साथ साथ जरी के काम को करती थीं। जरी का काम उनके आय का जरिया था, लेकिन अब महिलाएं बेरोजगार होती जा रही हैं। जरी का काम करने वाली रेशमा (50वर्ष) का कहना है, " हमारे सामने रोजी रोकी की दिक्कत खड़ी हो गई है। पहले इतना काम होता था कि फुर्सत नहीं मिलती थी, लेकिन अब पूरे दिन बेकार बैठे रहते हैं। घर में बेटियां हैं, अब पता नहीं इनकी शादी कैसे होगी। बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। मेरी बेटियां भी इस काम में मेरा हाथ बंटाती थीं, लेकिन वे भी बेरोजगार हो गई हैं।"

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सीजन के बावजूद काम पड़ा ठप

दुकानदार शारिक हुसैन (32वर्ष) का कहना है, " जो लहंगा दो हजार में बिकता था, वहीं लहंगा अब 1400 में भी नहीं बिक रहा है। पहले जो माल हजार में तैयार होता था अब वही माल 12 सौ रुपये तक में तैयार होता है। इस माल को बेचने वाले उसी पुराने रेट पर ही मांगते है। इस समय सीजन के बावजूद काम ठप पड़ा है। जीएसटी की वजह से माल और महंगा बिक रहा है। बाहर के काई खरीददार नहीं आ रहे हैं। यह समय हमारा कारोबार का था, जीएसटी लगने के पहले इस माह हम लोगों को खाना खाने की फुर्सत नहीं मिलती थी, लेकिन अब हम लोग काम नहीं होने के कारण खाली बैठे हैं। पूरे दिन हम लोग ग्राहक का इंतजार करते रहते हैं और शाम को वापस लौट जाते हैं। लाखों रुपए लगाकर हम लोग बैठे हैं, लेकिन माल बिक नहीं रहा है। दिन भर मोबाइल देखकर टाइम पास करते हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें। हम तो दूसरे काम की तलाश में हैं।"

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छोटे व्यापारी पूरी तरह से खत्म

दुकानदार आदिल खां (26वर्ष) का कहना है, " मार्केट में पैसा नहीं है। छोटे व्यापारी पूरी तरह से खत्म हो गया है। यह कारोबार फेरी वाले करते थे, लेकिन अब फेरी वालों का रजिस्ट्रेशन नहीं है इसलिए यह काम पूरी तरह से खत्म होता जा रहा है। बाहर का दुकानदार इसलिए नहीं आता चाहता है कयोंकि उसका कहना है, इधर से भी जीएसटी दूं और उधर भी जीएसटी दूं, फिर हमें बचेगा क्या। इससे अच्छा तो कोई और कारोबार करना सही है।"

वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट से है उम्मीद

जरी उद्योग को फिर वही पहचान दिलाने के लिए योगी सरकार ने वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट योजना के तहत बरेली के जरी उद्योग को शामिल किया है। इसके लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही बदहाली से जूझ रहे जरी कारीगरों के लिये स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट किसी संजीवनी से कम नहीं है। जरी कारीगरों के उत्थान के लिए प्रशासन की सोसायटी और जरी इंडिया एक साथ मिलकर काम करेगी। अब जरी कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित फल मिलेगा और उनको देश दुनिया के मुताबिक उत्पाद तैयार करना सिखाया जाएगा। जरी इंडिया की स्थापना करने वाले हाजी शकील कुरैशी के अनुसार बरेली में करीब आठ लाख जरी कारीगर हैं, जिनमें से तीन लाख महिलाएं हैं। बरेली के स्मार्ट सिटी में शामिल होने में जरी प्रोजेक्ट का अहम रोल है जिससे इन जरी कारीगरों की दशा में सुधार आएगा साथ ही इनका जीवन स्तर उन्नत हो सकेगा। वह यही चहाते हैं कि हुनर से जुड़े कारीगरों को जीवन खुशहाल हो।

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