उत्तर प्रदेश में आटा सूजी व मैदा उत्पादक मिलें ले रहीं अंतिम सांसें

उत्तर प्रदेश में आटा सूजी व मैदा उत्पादक मिलें ले रहीं अंतिम सांसेंउत्तर प्रदेश में फ्लोर मिलें बदहाली की कगार पर हैं।

उत्तर प्रदेश में फ्लोर मिलें बदहाली की कगार पर हैं। प्रदेश में फ्लोर मिलों पर लगने वाला 2.5 फीसदी मंडी शुल्क कारोबारियों पर भारी पड़ रहा है। देश में जब जीएसटी लगाया गया था तब बोला गया था "वन इंडिया, वन टैक्स" इसके बाद भी अन्य कई राज्यों में फ्लोर मिल पर मंडी शुल्क नहीं लगता है जहां लगता भी है वहां बहुत कम है, एकमात्र यूपी में ही मंडी शुल्क सर्वाधिक वसूला जाता है।

यही वजह है कि पिछले तीन साल में बनारस व आसपास के जनपदों की 100 से ज्यादा फ्लोर मिलें बंद हो गईं और कई मिले बंद होने के कगार पर हैं जहां प्रोडक्शन 50 प्रतिशत से भी कम हो रहा है। उत्तर प्रदेश में वाराणसी व चंदौली के अब तक एक दर्जन से ज्यादा उद्यमी अपना कारोबार समेट कर उन राज्यों में चले गए जहां उन्हें मंडी शुल्क देना नहीं पड़ रहा है।

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वाराणसी के कंडवा बाजार में स्थित श्याम फूड उद्ययोग फ्लोर मिल के मालिक दीन दयाल गुप्ता बताते हैं, "उत्तर प्रदेश सरकार की नीति सही नहीं हैं। हमारे यहां से महज सात किलो मीटर दूर बिहार पड़ता है वहां पर सरकार की तरफ से न ही कोई मंडी शुल्क लिया जाता है और न ही जीएसटी लगया गया है।" दीन दयाल आगे बताते हैं, "यूपी में हम लोगों के ऊपर 2.5 प्रतिशत मंडी शुल्क लगाया जाता है। साथ ही नॉन ब्रांडेड फ्लोर उत्पाद पर एक प्रतिशत जीएसटी और ब्रांडेड उत्पाद पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है। जीएसटी लगने के बाद से हम फ्लोर मिल व्यापारियों ने कई बार सरकार की नीतियों के खिलाफ धरना प्रदर्शन भी किया, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला।"

पूर्वांचल फ्लोर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कपूर बताते हैं, "अकेले वाराणसी में इस समय करीब 27 फ्लोर मिलें आटा, मैदा व सूजी का उत्पादन करती हैं। इनमें अधिकतर खस्ताहाल स्थिति में हैं। यदि पूर्वाचल की बात करें तो करीब 100 मिलें इन्हीं कारणों से बंद हो चुकी हैं जबकि 200 के आस-पास खस्ताहाल में चल रहीं है। मिलों की इस हालत की मुख्य वजह मंडी शुल्क बताई जा रही है।"

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बनारस के चिनार रोड पर स्थित समृद्धि उद्योग के मालिक बबलू जायसवाल बताते हैं, "हम सभी सरकार की योजनाओं का विरोध कर रहे हैं। जब जीएसटी आया था तब 'वन टैक्स, वन इंडिया' बोला गया था फिर क्यों हम लोगों से जीएसटी के अलावा मंडी शुल्क वसूला जा रहा है। उत्तर प्रदेश में ही मंडी शुल्क वसूला जा रहा है। इसके अलावा कई और प्रदेशों में ये शुल्क नहीं लिया जाता है।

अकेले उत्तर प्रदेश ही है जहां आज भी मंडी शुल्क सबसे ज्याद 2.5 प्रतिशत वसूला जाता है। मंडी शुल्क हटाने का एक बार वर्तमान सरकार से आश्वासन मिला था, लेकिन यह समस्या अभी भी यथावत बनी हुई है।
विजय कपूर, पूर्वाचल फ्लोर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष

लखनऊ की श्री बाला जी फ्लोर मिल के कारोबारी आशुतोष अग्रहरी बताते हैं, "उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पड़ोसी राज्यों की तरह यूपी में भी मंडी शुल्क समाप्त करने के आश्वासन के बाद भी अब तक कुछ नहीं हुआ। जीएसटी लागू होने पर वर्तमान सरकार ने भरोसा दिलाया था कि मंडी शुल्क समाप्त कर देंगे। लेकिन अभी तक सरकार ने इस बात को संज्ञान में नहीं लिया गया। कई बार हम कारोबारियों ने सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए धरना प्रदर्शन भी किया।"

पड़ोसी राज्यों जैसे खत्म हो टैक्स

पूर्वाचल फ्लोर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष व उद्यमी विजय कपूर बताते हैं, "कई बार सरकार से अन्य राज्यों की तरह प्रदेश की फ्लोर मिलों को मंडी शुल्क से मुक्त करने की मांग हुई पर कोई सार्थक नतीजा नहीं निकला। हर बार भरोसा दिलाया जाता है लेकिन होता कुछ नहीं। अभी हाल में एक मिल बंद हो गई। जो चल रही है उनका उत्पादन 50 फीसद ही रह गया है। सरकार यदि इस ओर ध्यान नहीं देगी तो स्थिति बिगड़ सकती है।"

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इन राज्यों में नहीं लगता मंडी शुल्क

बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा आदि कई राज्यों में मंडी शुल्क नहीं लगता।

बनारस में प्रतिदिन होता है आठ करोड़ का कारोबार

वाराणसी में रामनगर, पड़ाव, मुगलसराय, आशापुर आदि क्षेत्रों में 40 मिलें थीं। इसमें से 13 बंद हो चुकी हैं। इस समय 27 मिलें चल रही हैं जिनका प्रतिदिन का करीब आठ करोड़ कारोबार है।

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