ई-टेंडरिंग में फंसी टाइगर रिजर्व की तार फेंसिंग व्यवस्था 

ई-टेंडरिंग में फंसी टाइगर रिजर्व की तार फेंसिंग व्यवस्था टाइगर रिजर्व।

नीतीश तोमर, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

पीलीभीत। जनपद में पिछले एक-डेढ़ वर्षों से लगातार बाघ के हमले में करीब दो दर्जन ग्रामीणों की मौत की चुकी है। बाघ के डर से ग्रामीण अपने खेतों में फसलों की देखभाल करने जाने से भी डरते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जून महीने में क्षेत्रीय जनता द्वारा जंगल के किनारे तार फेंसिंग की मांग जोर-शोर से की गई थी।

जनता की मांगों को ध्यान में रखते हुए जनपद के चारों विधायकों ने अपनी-अपनी विधायक निधि से पांच-पांच लाख रुपए की धनराशि स्वीकृत कर दी थी, लेकिन वन विभाग की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण तार फेंसिंग की इस योजना को अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।

पिछले दिनों जनपद के प्रभारी मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा की मौजूदगी में हुई समीक्षा बैठक में भी इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि टाइगर रिजर्व के जंगलों की सोलर तार फेंसिंग होनी चाहिए। विधायक निधि से धन स्वीकृत होने के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से यह धनराशि टाइगर रिजर्व प्रशासन को प्राप्त भी हो गई है, लेकिन वन विभाग की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया बीच में बाधा बन गई।

विधायक निधि से पैसा प्राप्त हो गया है। जल्द ही ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया को पूरा करके टाइगर रिजर्व के जंगलों के किनारे सोलर तार फेंसिंग के कार्य को पूरा कर लिया जाएगा।
कैलाश प्रकाश, डीएफओ, पीलीभीत

वहीं जंगल की तार फेंसिंग न हो पाने के कारण लगातार जंगली जानवर जंगलों से निकलकर जंगल के किनारे बसे ग्रामीणों के खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा सबसे बड़ी बात यह है कि पिछले डेढ़ साल से अब तक बाघ द्वारा किए गए हमले में लगभग दो दर्जन ग्रामीण भी अपनी जान गंवा चुके हैं। अब भी इन इलाकों में बाघ का आतंक छाया हुआ है।

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