उत्तर प्रदेश

पांच हज़ार साल पुराना पांडवों का लाक्षागृह मिलने का दावा, शुरु हो चुकी है खुदाई

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में महाभारत काल के लाक्षागृह होने की आंशका जताई गई है। इतिहासकारों व शहजाद राय शोध संस्थान ने पुरातत्व विभाग से दसकी खुदाई की मांग की। पिछले दो दिनों से यहां पुरातत्व विभाग की टीम खुदाई में जुटी है।

संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने बताया कि यहां वर्षों से किवदंती है कि महाभारत के समय में हस्तिनापुर में जो लाक्षागृह बनाया गया था वो यही हैं। ऐसा अनुमान प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो बीबी लाल का भी है। 1960 में सर्वेक्षण के बाद उन्होंने ये आंशका जताई थी कि महाभारत समय का लाक्षागृह यहीं हैं।

बागपत में शहजाद राय शोध संस्थान की मांग पर केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने ये खुदाई शुरु की है। 50 से 60 लोगों की टीम है, ये खुदाई अभी छह महीने तक चलेगी, इसकी मांग 20 साल से की जा रही थी।

अमित राय आगे बताते हैं, “हमारा ये अनुमान है कि यहां पर कई तरह की संस्कृति व सभ्यताएं बस चुकी हैं। 500 साल से अलग अलग मानव बस्तियां यहां रह चुकी हैं। यहां कई तरह की संस्कृति बनी व बिगड़ी हैं। इस खुदाई से इनका पता चलेगा।”

बागपत के इस इलाके में लाक्षागृह होने की संभावना काफी समय से जताई जा रही है। एएसआई ने खुदाई के लिए 2 अथॉरिटी को लाइसेंस दिया है। ASI की उत्खनन ब्रांच और इंस्टिट्यूट ऑफ ऑर्किओलॉजी संयुक्त रूप से खुदाई करेंगे।

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बागपत के इस इलाके में लाक्षागृह होने की संभावना काफी समय से जताई जा रही है। एएसआई ने खुदाई के लिए 2 अथॉरिटी को लाइसेंस दिया है। ASI की उत्खनन ब्रांच और इंस्टिट्यूट ऑफ ऑर्किओलॉजी संयुक्त रूप से खुदाई करेंगे।

लाक्षागृह एक भवन था जिसे दुर्योधन ने पांडवों के विरुद्ध एक षड्यंत्र के तहत उनके ठहरने के लिए बनाया था। इसे लाख से निर्मित किया गया था ताकि पांडव जब इस घर में रहने आएं तो चुपके से इसमें आग लगा कर उन्हें मारा जा सके। यह वार्णावत (वर्तमान बरनावा) नामक स्थान में बनाया गया था। पर पांडवों को यह बात पता चल गई थी। इसलिए उन्होंने इसमें खुफिया तरीके से सुरंग बनाई। लाक्षागृह के भस्म होने का समाचार जब हस्तिनापुर पहुंचा तो पाण्डवों को मरा समझ कर वहां की प्रजा अत्यन्त दुःखी हुई।

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