महाजनों और सूदखोरों के चंगुल में फंसे किसानों को योगी सरकार से उम्मीद

Ashwani NigamAshwani Nigam   6 April 2017 5:33 PM GMT

महाजनों और सूदखोरों के चंगुल में फंसे किसानों को योगी सरकार से उम्मीदसूदखारों का जाल इतना तगड़ा है कि एक बार जो इसमें फंस गया वह आसानी से नहीं निकला पाता है (फोटो: महेंद्र पांडेय)

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों का कर्जमाफी करके किसानों को बड़ी राहत दी है लेकिन किसानों का एक बड़ा दर्द महाजनी और सूदखोरी की मार है। अधिकतर छोटे किसान बीज, खाद, कीटनाशक और अपनी दूसरी जरूरतों के लिए सूदखोरों पर निर्भर हैं, जो उनकी जमीन को छिनकर उन्हें भूमिहीन भी बना रहे हैं।

मार्च महीने में ही फिरोजाबाद के एक किसान सूदखोरों से तंग आकर प्रभदुयाल नामक एक किसान ने आग लगाकर आत्महत्या की कर ली जिसके बाद से वहां का जिला प्रशासन सूदखारों के खिलाफ अभियान चला रहा है। सूदखारों पर भारतीय रिजर्व बैंक के एक सर्वे के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में जो कर्ज लोग ले रहे हैं उसमें 30 प्रतिशत सूदखारों से ले रहे हैं।

गोरखपुर जिले के खजनी तहसील के सैरो गांव के रामश्रय के पास तीन बीघा जमीन थी जिसपर खेती करके वह अपने परिवार का पालन पोषण करते थे लेकिन एक साल बाद सूदखारों के जाल में फंसने के बाद उनकी पूरी जमीन उनके हाथ से निकल गई। रामश्रय ने बताया, ‘पांच साल पहले मेरी पत्नी को कैंसर की बीमारी हो गई। उसकी दवा में सारा जो भी पैसा था खर्च हो गया। उस साल खेतों की बुवाई के लिए बीज-खाद के लिए पैसा नहीं था। बगल के गांव के महाजन से ब्याज पर पैसा लिया। धीरे-धीरे ब्याज का पैसा बढ़ता गया। खेत भी हमारा चला गया।’

सूदखारों का जाल इतना तगड़ा है कि एक बार जो इसमें फंस गया वह आसानी से नहीं निकला पाता है। मार्च महीने में ही फिरोजाबाद के एक किसान सूदखोरों से तंग आकर प्रभदुयाल नामक एक किसान ने आग लगाकर आत्महत्या की कर ली जिसके बाद से वहां का जिला प्रशासन सूदखारों के खिलाफ अभियान चला रहा है। सूदखारों पर भारतीय रिजर्व बैंक के एक सर्वे के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में जो कर्ज लोग ले रहे हैं उसमें 30 प्रतिशत सूदखारों से ले रहे हैं। स्थिति यह है कि बड़े बैंक छोटे किसानों का कर्ज देने से कतराते हैं। ऐसे में छोटे किसान और खेतिहर मजदूर महाजनों से ब्याज पर पैसा लेने को मजबूर हैं।

छोटे किसानों का आर्थिक शोषण करने में आढ़तियों ने भी सूदखोर की भूमिका बना ली है। बुवाई और फसलों पर मौसम की मार के समय आढ़ती छोटे किसानों को कर्ज देते हैं लेकिन उसपर अनाप-शनाप ब्याज लगाकर किसान को कंगाल करने में लग जाते हैं। कुछ साल पहले ग्रामीण विकास नियोजन के सचिव रहे आर. सुब्रमण्यम ने एक रिपोर्ट तैयार करके बताया था कि सूदखोर किसानों से 50 प्रतिशत तक की ब्याज ले रहे हैं जिसका नतीजे में किसान कभी भी कर्ज चुकता नहीं कर पाता और खेत बेचने की नौबत आ जाती है।

सूदखोरी रोकने के लिए कड़ा कानून बनाए योगी सरकार

सूदखोरों पर लगाम लगाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों को आगाह किया है कि व उन माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को पैसा न उपलब्ध कराएं जो कर्ज के बदले 24 से लेकर 50 प्रतिशत तक की ब्याज वसूली कर रहे हैं। सूदखोरों पर लगाम लगाने के लिए महराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, पंजाब जैसे राज्यों में कानून बनाए गए हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में कोई ठोस कानून नहीं है। ऐसे यहां के किसान भी चाह रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ की सरकार सूदखोरी को रोकने के लिए कोई कड़ा कानून बनाए।

हर वक्त ताक में रहते हैं सूदखोर

गोरखपुर जिले के चौरीचौरा ब्लॉक के सरदार नगर गांव के किसान रामकिशुन सिंह ने कहा, ‘गांव-गांव में सूदखोरों का जला बिछा हुआ है। सूदखोर इस ताक में रहते हैं कि किसान कब मुसीबत में आए और वह उन्हें कर्ज दे सकें।’ उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार से उम्मीद है कि वह इस समस्या पर ध्यान देगी और किसानों का कर्ज ही न लेना पड़े ऐसी व्यवस्था करेगी। महाराष्ट्र सरकार ने सूदखोरी की समस्या को समाप्त करने के लिए जो काम किया है उसी की तर्ज पर उत्तर प्रदेश सरकार को भी काम करना चाहिए।

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