परिवार पर हत्या का आरोप : पंचायत ने हुक्का-पानी बंद कर मुंडवाया सिर, लगाया एक लाख का जुर्माना

परिवार पर हत्या का आरोप : पंचायत ने हुक्का-पानी बंद कर मुंडवाया सिर, लगाया एक लाख का जुर्मानाजुर्माना भरने के लिए परिवार को अपनी जमीन बेचनी पड़ी।

अरविंद सिंह परमार

ललितपुर। किसी भी जुर्म की सज़ा देने का अधिकार सिर्फ कानून को है। आप भी इस बात को मानते होंगे। लेकिन आपके ही समाज में आज भी ऐसी पंचायते हैं, जो कानून और न्यायालय से ज्यादा शायद अपने फैसले को महत्वपूर्ण और सही मानती हैं।

ललितपुर जिले से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां पर एक परिवार का हुक्का पानी बंद कर दिया गया, पूरे परिवार को मुंडन करवाने का आदेश दे दिया गया और इसके साथ ही एक लाख रुपए जुर्माना भरने का आदेश दिया गाया। जुर्माना भरने के लिए परिवार को अपनी जमीन बेचनी पड़ी। जुर्माने के पैसों से पंचो ने शादी की तरह टेट लगाकर समाज को खाना खिलवाया। यह खाना इसलिए समाज ने खाया जिससे गेंदाबाई के परिवार को समाज में दोबारा शामिल किया जा सके।

''हमारी जमीन बिकवा कर पंचो ने मिठाई, पूड़ी सब्जी बनवायी। सब खा रहे थे और हम रो रहे थे," गेंदाबाई ने बताया।

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ललितपुर जिले से पूर्व दिशा में 55 किमी महरौनी तहसील के भदौरा गाँव की गेंदाबाई कुशवाहा के बड़े लड़के लक्ष्मन कुशवाहा उर्फ लल्लू (20 वर्ष) ने करीब तीन महीने पहले फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी। उसी समय मौके पर पुलिस आयी पंचनामा होकर पोस्टमार्टम हुआ। इसी बीच समाज के पंचो ने गेंदावाई व उनके परिजनों पर हत्या का आरोप लगाते हुए गाँव से हुक्का पानी बंद करवा दिया। एक लाख का दण्ड देने के बाद गेंदावाई सहित पूरे परिवार को मुण्डन कराने का फरमान दे दिया।

पंचायत के फैसले ने गेंदाबाई कुशवाहा के परिवार को झकझोर कर रख दिया। गाँव के बाहर परिवार के साथ रह रही गेंदाबाई (40 वर्ष) बताती हैं, "गाँव की पंचायत ने दो बार मुण्डन करवाने को कहा, पहली बार इलाहाबाद में और दूसरी बार इलाहाबाद से लौटने पर गाँव के नाले पर।"

ग्राम प्रधान भदौरा नाथूराम कुशवाहा बताते हैं, "पंच तो निपटारे के लिए थे। किसी पर जोर जबरजस्सी नहीं की, सभी की राय से फैसला पंचों ने किया। ये तो पुरानी परम्परा हैं उसी को पंचो ने आगे बढ़ाया।"

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इसी परिवार की प्रेमबाई (60 वर्ष) बताती हैं, "मेरे रिश्तेदार कह रहे थे कि ऐसा हमने कही नही देखा, ढाई माह हमारा परिवार नंगे पैर घूमा, चप्पल पहनकर नहीं चल पाया। गाँव से निकलना बंद कर दिया खेतों के रास्ते निकलना पड़ता था। गाँव के हैण्डपम्पों से पानी नही भर पाये क्योकि समाज के पंचो ने सब बंद जो कर दिया था। हमारे 20 लोगों के परिवार में सभी ने यह भोगा।"

दण्ड का रूपया देने के लिए बेचनी पड़ी जमीन

पंचो के फरमान के आगे पूरा परिवार को नतमस्तक होना पड़ा। पंचो ने एक लाख का दण्ड लगाया, गेंदावाई के परिवार के पास पैसे नही थे। जिस बजह से गेंदाबाई के पति विन्दावन ने एक एकड़ खेत बेचकर पैसे चुकायें। तब जाकर पंचो की बात पूरी कर पाये। गेंदाबाई के पति विन्द्रावन (42 वर्ष) बताते हैं, "ढाई एकड़ जमीन में से एक एकड़ जमीन बेच दी। हम गरीब थे पैसे कहाँ से दे पाते, समाज के लोगों ने एक लाख का दण्ड रखा था। जमीन बेचकर पंचो को एक लाख रूपया दिया।"

हुक्का पानी बंद होने से नहीं बो पायी जमीन

पंचो के फैसले ने हमारे घर को बर्बाद कर दिया, पंचो के फैसले के बाद कोई ट्रेक्टर खेत में चलाने को, पानी देने को कोई तैयार नहीं था। इस कारण बची जमीन में अन्न का एक दाना भी नहीं बो पाये। विन्द्रावन बताते हैं, "पंचो ने कहा था कोई भी इस परिवार का सहयोग नही करेगा, जो करेगा वह भी इलाहाबाद जायेगा। जिस बजह से गाँव का कोई भी ट्रेक्टर से जोतने के लिए खेतों को तैयार नही हुआ, ना ही किसी ने खेत को पानी दिया। जिससे खेत में अन्न का एक भी दाना नहीं बो पाये, खेत खाली पड़े हैं। पंचो ने हमारे घर को बर्बाद कर दिया।

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इन्ही के परिवार के चतरा (58 वर्ष) बताते हैं, "पूरे परिवार ने पंचो के बीच हाथ जोड़कर कहा कि अपने ही बच्चे को कौन मार देगा, अगर आप लोग आरोप लगा ही रहे हैं, तो मंदिर में चिट्ठी उठवा लो। यह बात किसी ने नहीं सुनी और पंचो ने कहा कि तुम लोग स्वीकार करों कि हमने ही मारा, पंचायत से निपटने होय तो, नहीं तो निपट नही सकते। बिरादरी से ऐसे ही बाहर पडे रहोगे। समाज से सब कुछ बंद रहेगा।'' वो आगे बताते हैं, "मैने एक रोगी को जड़ी बूटी की दवा दे दी, तो पंचो ने ग्यारह सौ का जुर्माना भी हम पर लगाया।"

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