कर्ज़माफी में दो रुपये के प्रमाण पत्र का गणित समझिए 

कर्ज़माफी में दो रुपये के प्रमाण पत्र का गणित समझिए कर्जमाफी का गणित

लखनऊ। किसानों की कर्जमाफी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, कुछ किसानों को चंद रुपये का प्रमाण पत्र थमाना उनके साथ मजाक बताया जा रहा है। लेकिन सरकार इसे नियम आधारित बता रही है। बैंक और विभागीय अधिकारियों के मुताबिक 9 पैसे और दो रुपए के किसानों को सर्टिफिकेट दिए गए हैं, लेकिन उन पर निर्धारित तिथि के दौरान कर्ज ही इतना था।

किसानों के 9 पैसे से लेकर 2 रूपये तक का कर्ज माफ करने के बारे में 'गाँव कनेक्शन' ने बैंक अधिकारियों और विशेषज्ञों से बात की तो जो गणित समझ आया, वो ये है कि जिन किसानों के बैंक खाते में 9 पैसे का कर्ज दिख रहा था तो अधिकारियों ने डिटेल मिलने के बाद उसे भी प्रमाण पत्र दे दिया।

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वाराणसी में यूनियन बैंक में अधिकारी अनरव गुप्ता बताते हैं, “आप ऐसे समझिए किसी किसान ने 50 हजार का कर्ज लिया। मान लीजिए सालभर में ब्याज सहित उसकी रकम 51,050.9 रुपये हुयी। किसान जब पैसे चुकाने या केसीसी अपडेट कराने के लिए बैंक पहुंचा तो उसने 51,050 रुपए जमा कर दिए लेकिन 9 पैसे बाकी नहीं दिए। क्योंकि वो चलन में नहीं है, लेकिन बैंक में तो रह गए न। अब वो बाद में माफ हुए, क्योंकि ऑटोमेटिक ऐसा हुआ।"

प्रदेश में अब तक 11.9 लाख किसानों को 7,317 करोड़ रुपये की कर्जमाफी के सर्टिफिकेट दिए जा चुके हैं। इनमें से करीब 11.25 लाख किसान वो हैं जो 10 हजार से एक लाख के बीच का कर्ज माफ हुआ है।

"31 मार्च, 2016 तक कर्ज लेने वाले लघु और सीमांत किसानों को नियमों के तहत कर्जमुक्त किया जा रहा है, अब वो कर्ज़ 500 का हो या एक लाख का। ऐसे में कुछ किसान वो भी हैं जिन पर कुछ रुपए ही कर्ज़ था, उसे भी माफ किया गया।” विनोद कुमार सिंह, उपनिदेशक सांख्यिकी, उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने बताया। विनोद सिंह, कर्जमाफी प्रक्रिया के प्रभारी भी हैं।

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नियमों के मुताबिक उन्हीं का कर्ज़ माफ होगा, जिन्होंने 31 मार्च, 2016 तक फसली ऋण लिया हो। जिन्होंने वित्तीय वर्ष 2016-17 में भुगतान कर दिया होगा, उनके दिए गए पैसों को समायोजित करने के बाद बाकी बचे कर्ज के एक लाख रुपए तक इस दायरे में लाए जाएंगे। गोंडा के बरांव निवासी प्रगतिशील किसान सुधीर कुमार तिवारी बताते हैं, "इस व्यवस्था में उन किसानों का फायदा हुआ जो डिफाल्टर थे, ईमानदार किसानों को फायदा नहीं हुआ है।”

पिछले कई महीनों से कर्जमाफी प्रक्रिया में जुटे बांदा के जिला कृषि अधिकारी इसे ऐसे समझाते हैं, "देखिए, अगर आप ने एक लाख का कर्ज़ लिया था, और 31 मार्च, 2016 से पहले 99 हजार रुपए जमा कर दिए, यानि तय नियमावली के मुताबिक सिर्फ एक हजार रुपए बाकी था, जो बैंक ने डिटेल भेजी और वो पैसा ब्याज समेत माफ कर दिया गया।"

सरकार ने लंबी प्रक्रिया के बाद 17 अगस्त से कर्जमाफी के प्रमाण पत्र भी बांटने शुरु कर दिए। जिलों में मंत्री और जिलाधिकारी कर्जमाफी के प्रमाण पत्र बांट रहे हैं। पिछले कई दिनों में ऐसे किसानों की लिस्ट आई, जिन्हें 9 पैसे लेकर 2 रुपए तक की कर्जमाफी दिखाई गई। विपक्ष ने इसे किसानों के साथ धोखा बताया। सोशल मीडिया में भी ये ख़बरें खूब चलीं।

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आरोप प्रत्यारोप के दौर के बीच सरकार ने विज्ञप्ति जारी इस पर अपना पक्ष रखा। सरकार के मुताबिक कर्जा तो वादे के अनुसार सभी किसानों का माफ हुआ है लेकिन पहले चरण में 7371 करोड़ की धनराशि 11.93224 लाख किसानों के खातों में पहुंचाई गई। यानि उनका कर्जा माफ हुआ। सरकार की विज्ञप्ति के अनुसार कई जिलों में कर्ज की राशि को लेकर भ्रम बन है लेकिन प्रक्रिया पूरी तरह सही है। लखनऊ के जिला कृषि उपनिदेशक, डॉ. एसपी सिंह कहते हैं, "पूरी पारदर्शिता बरती गई है, सरकार ने जो वादा किया था उसके अनुरूप काम हुआ है।”

सरकार ने जारी की डिटेल- बकाया ब्याज तक हुआ माफ

सरकार लाभ पाने वाले मोचित किसानों का पूरा विवरण दिया है, जिसके मुताबिक 1 रुपए से 100 रुपए तक पात्र किसानों की संख्या 4814 तो 100 से 500 तक के किसान 6895 हैं। 500 से 1000 रुपए के बीच जिन किसानों का कर्जा माफ हुआ है उनकी संख्या 5553, 10 हजार रुपए तक वाले किसानों की संख्या 41690 है, जबकि 10 हजार से ऊपर के जिन किसानों का कर्जा माफ हुआ है उनकी संख्या 11.27890 लाख है। सरकार के मुताबिक पात्र किसानों का न सिर्फ कर्ज़ माफ किया गया है बल्कि उनके द्वारा चुकाए गए कर्ज़ की रकम को घटाने के बाद उस पर लगाए गए ब्याज तक को माफ किया गया है, इसलिए कुछ किसानों के प्रमाणपत्र में बेहद कम रकम दिखाई दे रही है।

किसानों का आरोप, हुआ है गोलमाल, समय पर कर्ज चुकाने वालों की अनदेखी क्यों ?

कन्नौज के छिबरामऊ क्षेत्र सिकंदरपुर निवासी राजेश शुक्ला बताते हैं, "वर्ष 2016 में मैंने 62 हजार का कर्ज लिया था, लेकिन मेरे सिर्फ 315 रुपए माफ हुए, मुझे उसी का प्रमाणपत्र मिला है। किसानों को कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं।” इस आरोप पर कन्नौज के जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह ने सफाई दी, "संभव है किसान ने केसीसी खाते का रिन्युअल कराया हो, या फिर निर्धारित तिथि तक कुछ भुगतान किया होगा, इसलिए उस दौरान के कर्ज पर माफी मिली है, ऐसा कई और जगह देखने को मिला है।”

गांव कनेक्शन ने राजेश शुक्ला के मामले को डीएम कन्नौज और कृषि विभाग के अधिकारियों के सामने उठाया। पता चला राजेश शुक्ला, बैंक गए जहां से कुछ अलग तस्वीर मिली। गांव कनेक्शन से 2 दिन बाद दोबारा बात करते हुए छिबरामऊ तहसील क्षेत्र में सिकंदर पुर निवासी राजेश शुक्ला (40 वर्ष) ने बताया, “बैंक से पता चला कि मैंने क्योंकि अपने कर्ज के 84 हजार रुपए चुका दिए थे, 315 कैसे भी कर के बाकी रह गए थे जो योजना के तहत माफ हुए।’

जिस आर्यवर्त ग्रामीण बैंक सिकंदरपुर में राकेश का किसान क्रेडिट कार्ड का खाता है, वहां के शाखा प्रबंधक अविनाश सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया, “क्योंकि राकेश शुक्ला ने 31 मार्च के बाद अपने खाते में जमा-निकासी (कर्ज चुकाया और नया कर्ज लिया) की थी, उन पर अभी कर्ज है लेकिन वो सरकार द्वारा तय नियमावली के बाहर का है, जो माफ नहीं किया गया।’ जिसके बाद राजेश आगे कहते हैं, “सरकार की लिमिट में नहीं आने के कारण मेरा पूरा कर्ज़ माफ नहीं हुआ, लेकिन मेरी समस्या ये है कि जब बैंक- लेखपाल को पता था कि मेरे इतने कम पैसे माफ होने हैं तो फिर जांच और तहसील के चक्कर क्यूं लगवाए? सरकार को चाहिए था जिन किसानों के एक हजार से कम रुपए हैं उन्हें सर्टिफिकेट के चक्कर से बाहर रखती। सही मायने में चाहिए ये था कि 50-50 रुपए का सबका कर्ज माफ कर देती।”

इटावा में भी कई किसानों को पैसों में कर्जमाफी हुई है। दि क्वींट हिंदी के मुताबिक इटावा जिले के किसान इश्वर दयाल ने कहा है, "सरकार ने इस तरह की कर्जमाफी कर किसानों का मजाक बनाया है. उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज स्वतंत्रता सैनानी थे. सरकार का यह काम स्वतंत्रता सैनानियों के मुंह पर तमाचा है. सरकार ने हमारे साथ मजाक किया है।"

पचौरी ने आरोपों को बताया निराधार, कहा 1 लाख तक कर्जा माफ हुआ

हालांकि योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी ने सोशल मीडिया लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि ये आरोप झूठें हैं। किसानों का 80 हजार से एक लाख तक के कर्जे माफ किए गए हैं।

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गांव कनेक्शन में कर्जमाफी मुद्दे पर प्रकाशित ख़बर

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