किसानों की कर्जमाफी बैंककर्मियों के गले की फांसी, आमरण अनशन पर शाखा प्रबंधक

किसानों की कर्जमाफी बैंककर्मियों के गले की फांसी, आमरण अनशन पर शाखा प्रबंधकगोंडा के सर्व यूपी ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक डेनियल सिंह।

लखनऊ/गोंडा। योगी सरकार द्वारा माफ किये गये किसानों के कर्ज से किसानों को तो फायदा हुआ है, लेकिन किसानों की कर्जमाफी बैंक कर्मिचारियों की गले की फांसी बन गई है। कर्मचारियों को दिन रात एक करके डाटा फीडिंग का काम करना पड़ रहा था। इसके साथ ही उन्हें धमकी भी दी गई थी कि अगर 22 जुलाई तक डाटा फीडिंग का काम पूरा नहीं हुआ तो उन्हें जेल भिजवा दिया जाएगा। प्रशासन के उत्पीड़न से परेशान गोंडा के सर्व यूपी ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक डेनियल सिंह ने जब मुख्य सचिव से पत्र लिखकर इसकी शिकायत की तो उन्हें निलंबित कर दिया गया। डेनियल 24 जुलाई से आमरण अनशन पर हैं।

डेनियल सिंह ने 23 जुलाई 2017 को मुख्य सचिव को लिखे अपने पत्र में लिखा था कि किसान कर्जमाफी के नाम पर प्रशासन द्वारा बैंक प्रबंधकों का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। बैंककर्मी कई दिनों से लगातार काम कर रहे हैं। लेकिन बदले में प्रशासन से उन्हें लगातार बेइज्जत किया जा रहा है और बार-बार जेल भेजने की धमकी दी जा रही है।

प्रशासन ने हमें बंधुआ मजदूर समझ रखा है और हमारे साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। हमारा धैर्य अब समाप्त हो चुका है। रोज-रोज की जलालत झेलने और गुलामों की तरह काम करने से कहीं अच्छा है कि अब हम जेल ही चले जाएं।

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इसके साथ ही उन्हों ने पत्र में लिखा था कि अब मैं गुलामों की तरह डाटा फीडिंग नहीं करूंगा, प्रशासन चाहे तो मुझे जेल भेज सकता है। इसके लिए मैं अपनी गिरफ्तारी देने के लिए कार्यालय पर मौजूद रहूंगा। इसके साथ ही उन्हों ने अपने आमरण अनसन की भी घोषणा की थी।

इससे पहले ऑल इंडिया आफीसर्स एशोसिएशन की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रदेश सचिव दिलीप चौहान ने स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा था कि साधनों के आभाव में फसली कर्ज माफी काम में देरी होने पर बैंक अधिकारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने बताया था कि पूरे प्रदेश में नेट की धीमी गति तथा NIC का सर्वर धीमे चलने के कारण डाटा फीडिंग में दिक्कत आ रही है।

सर्व यूपी ग्रामीण बैंक क्षेत्रीय कार्यालय गोंडा के सीनियर मैनेजर अनुराग श्रीवास्तव का कहना है कि बैंक में दिन-रात काम हो रहा है, लेकिन शाखा प्रबंधक की टिप्पणी पर समस्या आ रही है।

डेनियल ने बताया कि परेशान सब हैं लेकिन हर कोई विरोध इसलिए नहीं कर पा रहे हैं, कि कहीं दूर ट्रांसफर न कर दिया जाए। डेनियल के विरोध के बाद उनका ट्रांसफर मेरठ कर दिया गया है, जिसपर उन्होंने कहा कि मैं इस्तीफा दे दूंगा, लेकिन उत्पीड़न नहीं सहूंगा।

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उन्होंने कहा, ''हम सभी बैंककर्मी यही चाहते हैं कि किसानों की कर्जमाफी शीघ्र से शीघ्र हो जाये। लेकिन जिस तरह से प्रशासन यह काम बैंक अधिकारियों से करवा रहा है, उससे शाखा प्रबंधको की नौकरी खतरे में पड़ गयी है।

लखनऊ के चिनहट क्षेत्र स्थित इलाहाबाद बैंक की जुग्गौर शाखा के वरिष्ठ प्रबंधक सिसिर कुमार मिश्रा ने बताया, ''हमारा यहां डाटा फीडिंग का काम तो पूरा हो चुका है, लेकिन इस काम को करने में मुझे और मेरे स्टाफ को तीन से चार दिन लगातार चौबीस घंटे काम करना पड़ा।''

लखनऊ के चिनहट क्षेत्र स्थित इलाहाबाद बैंक की जुग्गौर शाखा में डाटा फीडिंग करते बैंककर्मी। फोटोः प्रमोद अधिकारी

उनका कहना है, ''हमारी शाखा में 11 ग्राम सभाओं के लगभग 50 गाँवों में रहने वाले ग्रामीणों के खाते संचालित होते हैं। ऐसे में बैंकिंग के कार्यों के साथ ही किसान कर्जमाफी योजना के कार्य को भी निपटना में अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ी। ग्रामीण क्षेत्र में बैंक की शाखा होने के कारण इंटरनेट की सुविधा ठीक नहीं है। बैंक में जो इंटरनेट सेवा चल रही है, वह केवल बैंकिंग कार्यों के लिए उपयोग की जा सकती है। उसके अलावा कौई और काम नहीं कर सकते हैं। हमने और हमारे कर्मचारियों ने कड़ी मेहनत करके 297 किसानों को चिन्हित किया है, जिन्हें किसान कर्जमाफी योजना का लाभ मिलना है।

फोटोः प्रमोद अधिकारी

बैंक प्रबंधकों को क्या है समस्या ?

डेनियल ने बाताया कि शाखा प्रबंधकों को एक-एक यूजर पासवर्ड के साथ उपलब्ध कराया गया है, जिसके द्वारा उन्हें किसानों की कृषि भूमि का विवरण जेसे- गाँव, गाटा संख्या, खाता संख्या, ऋणी का शेयर, आधार संख्या आदि अत्यंत महत्वपूर्ण सूचनाएं ऋण माफी पोर्टल पर अंकित करनी हैं। ऋण माफी पोर्टल भी जल्दबाज़ी में तैयार किया गया है, जिसमें प्रतिदिन कोई न कोई बदलाव किया जाता रहा है। पोर्टल पर लॉगिन, कैप्चा कोड, error 500 व् धीमी स्पीड जैसी अनेक समस्याओं से शाखाओं का बहुत समय ख़राब हुआ है। बहुत सी शाखाओं पर तो इन्टरनेट कनेक्टिविटी बहुत ख़राब है या नहीं है।

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उन्होंने बताया कि प्रशासन व बैंक प्रबंधन ने शाखा प्रबंधकों की सुविधा के लिए NIC, अन्य कार्यालयों व बैंक की चुनी हुई शाखाओं एवं क्षेत्रीय कार्यालयों पर अनेक कंप्यूटरों की नेट कनेक्टिविटी के साथ व्यवस्था कर दी थी। काम का काफी बोझ होने के कारण एवम मल्टीप्ल लॉगिन अलाउड होने के कारण एक ही यूजर पर कई लोगों से डाटा फीडिंग का कार्य कराया गया। इनमें ऐसे लोग भी थे जिन्हें डाटा फीडिंग के लिए बाहर से बुलाया जाता था। इस प्रकार की डाटा फीडिंग में गलतियाँ होना स्वाभाविक है और ऐसी गलतियों के कारण गाटा संख्या, कृषि भूमि, ऋणी का शेयर निकलने में त्रुटि हो सकती है। पोर्टल पर प्रदर्शित होने वाले मैसेज के अनुसार सभी प्रविष्टियों के लिए शाखा प्रबंधक जिम्मेदार माने जायेंगे (चाहे त्रुटि डाटा फीडिंग करने वाले किसी भी व्यक्ति के द्वारा हुई हो।) इस प्रकार प्रशासन द्वारा दबाव डालकर जल्दबाज़ी में कराये गए काम के कारण, शाखा प्रबंधकों को भविष्य में बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है और उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है।

डेनियल ने कहा कि मेरी उत्तर प्रदेश सरकार एवं विभिन्न बैंकों से यह माँग है कि उनके द्वारा यह आश्वासन दिया जाय कि ऋण रहत पोर्टल पर डाटा फीडिंग की किसी भी त्रुटि के लिए किसी भी शाखा प्रबंधक के विरुद्ध कोई भी कार्यवाही नहीं की जायेगी।''

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