यूपी में लौट रही बाजरा की खेती, मोटे अनाज की लगातार बढ़ रही है डिमांड

यूपी में लौट रही बाजरा की खेती, मोटे अनाज की लगातार बढ़ रही है डिमांडफाइबर से भरपूर बाजरा सेहत के लिए अच्छा होता है (साभार: इंटरनेट)

लखनऊ। अच्छी सेहत के लिए मोटे अनाजों की डिमां‍ड बाजार में तेजी से बढ़ रही है। कैंसर, अर्थराइटिस, गठिया और दमा जैसी बीमारियों से लोगों को बचाने के लिए वैज्ञानिक और डॉक्टर भी बाजरे से बने खाद्य उत्पाद के लिए सलाह दे रहे हैं।

देश में बाजरा के प्रमुख उत्पादक राज्यों में से उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक से बाजारा की खेती का रकबा लगतार घट रहा था। बाजरे की जगह किसान गेहूं और दूसरी फसलें उगाना पसंद करत थे लेकिन इस साल किसानों ने बाजरे के लिए रूचि दिखाई है और इसकी खेती बढ़ी है।

कृषि विभाग की तरफ से जायद अभियान में इस बार प्रदेश में 40 हजार, 249 हेक्टेयर में बाजरा की बुवाई हुई है, हालांकि यह तय लक्ष्य से कम है। कृषि विभाग ने इस बार जायद में 52 हजार हेक्टेयर में बाजरा की बुवाई का लक्ष्य रखा था। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के निदेशक ज्ञान सिंह ने बताया, ‘बाजरा एक महत्वपूर्ण पोषक अनाज है जिसके कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रदेश के किसान बाजरा की खेती करके समृद्ध हो सके इसके लिए कृषि विभाग किसानों को जागरूक करने के साथ ही उन्हें सुविधाएं दे रहा है।’

बाजरा देश की लगभग 10 प्रतिशत जनसंख्या का मुख्य भोजन है। साथ ही यह पशुओं का महत्वपूर्ण चारा है। देश में यह 11.33 मिलियन हेक्टेयर में उगाया जाता है। हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। उत्तर प्रदेश में इसकी कभी बड़ी मात्रा में खेती होती थी लेकिन धीरे-धीरे इसकी खेती कम को गई थी जो अब बढ़ रही है। देश में मोटे अनाजों खासकर बाजरा, ज्वार और दूसरे अनाजों के रिसर्च और बढ़ावा देने के लिए काम करने वाले भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान हैदराबाद के निदेशक विलास, ए तोनापी ने बताया, ‘मोटे अनाजों की खेती और इसकी खपत को बढ़ावा देने के लिए सरकार को बड़े पैमाने पर काम करने की जरूरत है।’

शरीर में टॉक्सिन बनने से रोकता है बाजरा

कदन्न अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक एसएस राव ने कहा कि बाजरा में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और आयरन मिलता है। बाजरा को खाद्य पदार्थ के रूप में सेवन करने से कैंसर कारक टॉक्सिन नहीं बनता है। बाजरे से मांस पेशियों मजबूत बनती हैं। बाजरा को खाने से आयरन की कमी दूर होती है। हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट्स को यह ऊंचा रखता है। उन्होंने बताया कि बाजरा की खिचड़ी, पूरी, मोठ, पकौड़े, कटलेट, सूप, ढोकला, मालपुआ, चूरमा, बिस्कुट और लड्डू के रूप में सेवन कर सकते हैं।

कम पानी में उग जाती है बाजरे की फसल

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जीपी राव ने बताया बाजरा की फसल मौसम की विपरीत स्थितियों में बनी रहती है। यह सूखे, मिट्टी की कम उर्वरता और अधिकतम तापमान के अनुसार खुद को अनुकूल बना लेती है। यह कम बारिशों वाले स्थान पर उगती है जहां पर 50-70 सेमी तक बारिश होती है। यह सूखे के अनुकूल फसल है। खारी मिट्टी में बाजरा की खेती हो जाती है क्योंकि विपरीत परिस्थियों के प्रति यह सहनशील है, बाजरा ऐसे स्थानों पर भी पैदा हो सकता है, जहां पर अनाज की अन्य फसलें जैसे मक्का या गेहूं नहीं उग पाती हैं।

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