किसान 31 जुलाई तक अपनी फसलों का बीमा करा लें- कृषि मंत्री 

किसान 31 जुलाई तक अपनी फसलों का बीमा करा लें- कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि मंत्री

लखनऊ। प्रदेश के कृषि मंत्री एस0पी0 शाही ने कहा कि खरीफ 2017 में प्रदेश के समस्त जनपदों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व चयनित जनपदों-गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर, बहराइच, इलाहाबाद, कौशाम्बी, देवरिया, बाराबंकी, बरेली, मिर्जापुर, लखीमपुरखीरी, शाहजहांपुर, फतेहपुर व फिरोजाबाद में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू है।

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इन योजनाओं में अधिसूचित फसलों का बीमा दिनांक 31 जुलाई की अंतिम तिथि तक कृषकों द्वारा निर्धारित प्रीमियम का भुगतान कर कराया जा सकता है। ऋणी कृषकों की अधिसूचित फसलों का बीमा सम्बन्धित बैंक शाखा द्वारा अनिवार्य आधार पर किये जाने का प्राविधान है, जबकि अन्य सभी कृषक अपनी इच्छानुसार निकटतम बैंक शाखा/कामन सर्विस सेन्टर (सीएससी)/बीमा कम्पनी के एजेन्ट आदि के माध्यम से दिनांक 31 जुलाई की अंतिम तिथि तक फसलों का बीमा करा सकते हैं।

श्री शाही ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना कें प्राकृतिक आपदाओं व रोके न जा सकने वाले जोखिमों-रोगों, कृमियों आदि से फसल की क्षति की स्थिति में उन सभी कृषकों को बीमा लाभ अनुमन्य है जिनके द्वारा फसल का बीमा निर्धारित अन्तिम तिथि तक कराया गया है। योजना में फसलों की क्षति का आंकलन मौसम के अन्त में ग्राम पंचायत में अधिसूचित फसलों पर निर्धारित संख्या में सम्पादित फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त उपज के आधार पर किया जाता है। योजना में ग्राम पंचायत स्तर पर प्रतिकूल मौसमीय स्थितियों के कारण फसल की बुवाई न कर पाना/असफल बुवाई के जोखिम तथा व्यक्तिगत बीमित कृषक के स्तर पर स्थानिक आपदाओं-ओला, भू-स्खलन व जलप्लावन अथवा फसल की कटाई के उपरान्त आगामी 14 दिनों तक खेत में कटी हुई फसल की क्षति के जोखिमों को कवर किया गया है।

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स्थानिक आपदाओं व फसल कटाई के उपरान्त की स्थिति, जिसमें बीमित कृषक के स्तर पर क्षति का आंकलन किया जाना है, में प्रभावित कृषकों को आपदा के 48 घंटे के अन्दर फसल की क्षति के पूर्ण विवरण के साथ व्यक्तिगत दावा स्वयं/सम्बन्धित बैंक/जनपदीय अधिकारियों के माध्यम से बीमा कम्पनी को प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।

उन्होंने बताया कि पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में फसल की क्षति का आंकलन फसल हेतु निर्धारित मौसमी स्थितियों तथा मौसम की वास्तविक स्थिति में अन्तर के आधार पर फसल की सम्भावित क्षति को दृष्टिगत रखते हुए करने का प्राविधान है।

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