इन बुजुर्गों के लिए फादर्स-डे का कोई मतलब नहीं

Ashwani DwivediAshwani Dwivedi   21 Jun 2017 1:35 PM GMT

इन बुजुर्गों के लिए फादर्स-डे का कोई मतलब नहींगहमागहमी से दूर एक आश्रम में कुछ बुजुर्ग अपने बच्चों की राह देख रहे।

लखनऊ। जिस पिता ने बच्चों को पढ़ा-लिखा कर लायक बनाया, वही बेटे उनकी जरूरत के वक्त वृद्धाश्रम में छोड़ कर चले गए। जब सोशल मीडिया पर फादर्स-डे के मौके पर युवा अपने पिता के साथ फोटो चस्पा कर रहे थे, वहीं इस गहमागहमी से दूर एक आश्रम में कुछ बुजुर्ग अपने बच्चों की राह देख रहे थे।

लखनऊ के जानकीपुरम स्थित शांति छवि धाम में पिछले छह सालों से रह रहे सुधीर कुमार (87 वर्ष), जो एक बड़े अधिकारी थे, फादर्स-डे पर अपना दर्द छिपा न सके। उन्होंने ने कहा, "मेरे बच्चों से पूछिए, उन्होंने अपने पिता को क्यों छोड़ दिया। मैं ही केवल अकेला नहीं हूं, मेरे जैसे यहां 70 बुजुर्ग हैं, जो अपने बच्चों के होते हुए आज वृद्धाश्रम में रह रहे हैं।"

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सुधीर कुमार के दो बेटियां और एक बेटा है। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। बेटा सरकारी अधिकारी है और अपने पत्नी व बच्चों के साथ लखनऊ में ही रहता है। लेकिन इस पिता के लिए घर में जगह नहीं।

उधर, लखनऊ के कैंट में छावनी परिसद द्वारा संचालित जीवन संध्या वृद्ध आश्रम में पिछले तीन साल से रह रहे बसंत अग्रवाल का दर्द भी कुछ ऐसा ही है। बसंत अग्रवाल (72 वर्ष) कपड़े के कारोबारी थे, परिवार में पत्नी, बेटे और तीन बेटियां थीं। वह बताते हैं, "जब बहू ने परेशान करना शुरू कर दिया तो बेटे से कई बार शिकायत की, उसने ध्यान नहीं दिया। घर में बेइज्जती महसूस होने लगी तो घर छोड़ना ही मुनासिब लगा।" आगे बसंत अग्रवाल बताते हैं, "तीन साल में एक बार आश्रम में मिलने भी नहीं आया। बेटियां ही दो तीन महीने में मिलने को आती रहती हैं। जिस बेटे को पढ़ा लिखा कर संपन्न बनाया, उसी ने मुझे बोझ समझ कर सड़क पर मरने को छोड़ दिया।"

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फादर्स-डे के अवसर पर लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में बुजुर्गों के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन नंबर शुरु करने वाले गाइड समाज संस्थान की निदेशक डॉ. इंदु सुभाष बतातीहैं, “पहले ही दिन 34 शिकायतें आईं, कुछ तो ऐसी हैं कि विश्वास करना मुश्किल है कि समाज मे ऐसा भी हो रहा है। कुछ बुजुर्गों ने तो टेस्टिंग कॉल कीऔर कुछ बुजुर्गो ने टोल फ्री नम्बर पर सस्था की आर्थिक मदद की भी पेशकश की है।"

लखनऊ के गोमती नगर निवासी 90 वर्षीय एक बुजुर्ग नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं, "नौकरी से रिटायर हुए मुझे 30 साल हो गए। मेरे कोई बेटा नहीं है, लेकिन एकलौती बेटी है। उसकी शादी की मगर तलाक हो गया और घर आ गई। जैसे-जैसे मेरा शरीर कमजोर होता गया, मेरी बेटी का व्यवहार दिन-प्रतिदिन खराब होता चला गया। आज मेरी बेटी मुझे मारने लगी है, खाना नहीं देती, हमेशा नाराज रहती है।" थोड़ा गंभीर होते हुए आगे बोलते हैं, "किस से कहें, जग हंसाई होगी।"

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बुजुर्गों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800-180-006024 का उद्घाटन किया गया, जिसमें देशभर से सस्था के 20 काउंसलर बुजुर्गो की शिकायतें सुनेंगे।

सभी फोटो- प्रमोद अधिकारी

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